राष्ट्रीय राजधानी में हुए दंगों की व्यापक साजिश से जुड़े मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को अदालत से एक बार फिर राहत नहीं मिल सकी। दिल्ली हाईकोर्ट ने 30 सितंबर को दोनों आरोपियों की नियमित जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए उन्हें खारिज करने का फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि शीर्ष अदालत के पिछले रुख और तय की गई शर्तों को ध्यान में रखते हुए वर्तमान स्थिति में उन्हें जमानत पर रिहा नहीं किया जा सकता। इस मामले में दोनों आरोपियों की जमानत अर्जी तीसरी बार खारिज हुई है।
सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश और शर्तों का हवाला
अदालत की कार्यवाही के दौरान उच्चतम न्यायालय के पूर्व आदेश का विशेष उल्लेख किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में इनकी जमानत खारिज करते हुए कुछ विशेष परिस्थितियां निर्धारित की थीं। उस आदेश के तहत यह व्यवस्था दी गई थी कि यदि मामले के सुरक्षित और गोपनीय गवाहों की गवाहियां दर्ज हो जाती हैं, अथवा आदेश के बाद एक साल का समय बीत जाने पर भी विचारण में अनावश्यक विलंब होता है, तभी आरोपी निचली अदालत में नए सिरे से राहत की गुहार लगा सकते हैं।
निचली अदालत में दोबारा अर्जी लगाने के विकल्प
उच्च न्यायालय के इस ताजा रुख के बाद दोनों आरोपियों को फिलहाल न्यायिक हिरासत में ही रहना होगा। कानूनी प्रावधानों के मुताबिक तय समयसीमा पूरी होने या गवाहों के बयान की प्रक्रिया संपन्न होने के बाद ही वे ट्रायल कोर्ट का रुख करने के हकदार होंगे। जांच एजेंसियों द्वारा दर्ज इस मामले में साजिश के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल लगातार चर्चा में रही है और अदालत के ताजा फैसले ने कानूनी प्रक्रिया के कड़े नियमों को रेखांकित किया है।



















