देश की राजधानी दिल्ली में सियासी सरगर्मियों के मुख्य केंद्र जंतर-मंतर पर एक तरफ गंभीर राजनीतिक टकराव चल रहा था, तो दूसरी तरफ एक अलग ही वाकये ने हर किसी को चौंका दिया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी राजनीतिक दलों और विभिन्न छात्र संगठनों के सैकड़ों कार्यकर्ता जंतर-मंतर पर जुटे हुए थे। इसी दौरान सोशल मीडिया पर एक महिला का विचित्र वीडियो तेजी से वायरल होने लगा। वीडियो में महिला दिल्ली की व्यस्त सड़क पर लेटी हुई दिख रही है और मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों के बार-बार समझाने के बावजूद वहां से हटने से साफ इनकार कर रही है। जब पुलिसकर्मियों ने उसे उठाने की कोशिश की, तो उसने एक ऐसी अजीबोगरीब शर्त रख दी जिसे सुनकर राहगीर और सुरक्षाकर्मी दंग रह गए।
सड़क पर लेटकर रखी अजीब शर्त
वायरल फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि महिला सड़क के बीचों-बीच लेटी हुई है और यातायात बाधित हो रहा है। मौके पर तैनात सुरक्षाकर्मी उससे शांतिपूर्वक बातचीत करते हैं और रास्ता साफ करने का अनुरोध करते हैं। इसके बावजूद वह अपनी जिद पर अड़ी रहती है। महिला का कहना था कि जब तक अभिनेता और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय थलपति मौके पर आकर उसे गले नहीं लगाएंगे, तब तक वह अपनी जगह से टस से मस नहीं होगी। जब महिला पुलिसकर्मी उसे सहारा देकर सड़क से हटाने के लिए आगे बढ़ीं, तो उसने कड़ा ऐतराज जताया। महिला ने तीखी आवाज में कहा, “मुझे मत छुओ।” काफी देर तक चले इस ड्रामे के बाद आखिरकार महिला पुलिसकर्मियों ने उसे जबरन सड़क से हटाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।
वायरल वीडियो और तारीख का सच
इंटरनेट पर कई लोग इस वीडियो को सीधे तौर पर जंतर-मंतर पर चल रहे चुनाव आयोग विरोधी धरने से जोड़कर साझा कर रहे थे। हालांकि घटनाक्रम की बारीकी से जांच करने पर पता चला कि यह वीडियो 29 सितंबर 2026 का है। इसका मतलब यह है कि यह वाकया 2 अक्टूबर को आयोजित मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ हुए बड़े विरोध प्रदर्शन से अलग दिन का है। सोशल मीडिया पर एक संस्था के आधिकारिक हैंडल द्वारा साझा किए जाने के बाद यह क्लिप व्यापक चर्चा का केंद्र बन गई।
जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ हुआ था बड़ा प्रदर्शन
इस वायरल वीडियो की पृष्ठभूमि में 2 अक्टूबर को जंतर-मंतर और आसपास के संवेदनशील इलाकों में एक बड़ा राजनीतिक आंदोलन देखने को मिला था। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग कर रहे थे। विपक्षी राजनीतिक दलों और छात्र यूनियनों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए थे। आंदोलनकारियों का सीधा आरोप था कि इस प्रक्रिया की आड़ में बड़े पैमाने पर वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज किया। आयोग का कहना था कि मतदाता सूची में संशोधन का यह काम पूरी तरह से तय नियमों और स्थापित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही किया जा रहा है।
नेताओं समेत 700 से अधिक लोग हिरासत में
राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस ने सख्त रुख अपनाया। पुलिस प्रशासन के अनुसार, इस प्रदर्शन के लिए पहले से कोई आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था और जगह-जगह बहुस्तरीय बैरिकेडिंग की गई थी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, जिसके बाद पुलिस ने जंतर-मंतर तथा आसपास के रास्तों से 700 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया। हिरासत में लिए गए प्रमुख चेहरों में आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता आतिशी, सौरभ भारद्वाज, संजीव झा और संजय सिंह शामिल थे। इस प्रकार एक तरफ जहां दिल्ली की सड़कों पर मतदाता सूची और चुनाव आयोग को लेकर भारी सियासी टकराव चल रहा था, वहीं दूसरी तरफ विजय थलपति से मिलने की महिला की अजीब मांग वाले पुराने वीडियो ने इंटरनेट पर ध्यान खींच लिया।



















