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वोटर लिस्ट विवाद में मुख्य चुनाव आयुक्त के विरुद्ध प्रस्तावित प्रदर्शन दिल्ली पुलिस ने रोका, जंतर मंतर छावनी में तब्दीलदिल्ली
1 अक्तू॰ 2026, 9:24 pm (1 घंटे पहले)· 0

वोटर लिस्ट विवाद में मुख्य चुनाव आयुक्त के विरुद्ध प्रस्तावित प्रदर्शन दिल्ली पुलिस ने रोका, जंतर मंतर छावनी में तब्दील

चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 2 अक्टूबर को तय जंतर मंतर विरोध सभा की मंजूरी दिल्ली पुलिस ने निरस्त कर दी है। नई दिल्ली इलाके में केंद्रीय बलों और पुलिस के कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।

राष्ट्रीय राजधानी में 2 अक्टूबर को आयोजित होने वाला एक बड़ा राजनीतिक जमावड़ा प्रशासनिक पाबंदी की भेंट चढ़ गया है। निर्वाचन सूची में कथित धांधली को लेकर चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के विरोध का फैसला करने वाले संगठनों को उस वक्त झटका लगा जब दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर पर सभा करने की इजाजत खारिज कर दी। खुफिया इनपुट में संकेत मिला था कि इस आंदोलन के तहत लुटियंस दिल्ली के आसपास तीन से चार हजार प्रदर्शनकारी एकत्र हो सकते हैं। इसी भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए प्रशासनिक अमले ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से समूचे नई दिल्ली क्षेत्र में कड़ा पहरा बिठा दिया है।

सड़क पर केंद्रीय सुरक्षा बल और चप्पे-चप्पे पर पहरा

प्रोटेस्ट की अनुमति रद होते ही प्रशासन ने संवेदनशील स्थलों को सुरक्षा घेरे में ले लिया। जंतर मंतर की ओर बढ़ने वाले तमाम रास्तों पर लोहे के बैरिकेड खड़े कर दिए गए हैं। स्थानीय पुलिस के अतिरिक्त सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स के जवानों की टुकड़ियों को रणनीतिक बिंदुओं पर तैनात किया गया है। शहर के प्रवेश और निकास द्वारों पर वाहनों की सघन जांच शुरू कर दी गई है ताकि बाहरी हिस्सों से समूहों में आने वाले लोगों को वहीं रोका जा सके। गश्त कर रहे पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि बिना मंजूरी किसी भी अनधिकृत मजमे अथवा जुलूस को सड़क पर निकलने नहीं दिया जाएगा।

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इस्तीफे और महाभियोग की मांग को लेकर लामबंदी

यह पूरा तनाव मतदाता सूची में विसंगतियों के दावों से उपजा है। आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने वाले गुटों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर उंगली उठाई है। उनका कहना है कि निष्पक्ष मताधिकार पर संकट मंडरा रहा है, जिसके चलते चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार को पद से हटाया जाना चाहिए अथवा उन पर महाभियोग चलाया जाए। इस विरोध की पुकार ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन, सांसद मनोज झा और वकील प्रशांत भूषण की तरफ से सामने आई थी। साथ ही आम आदमी पार्टी तथा यूथ कांग्रेस से जुड़े कार्यकर्ताओं ने भी इस मुहिम को समर्थन देने की तैयारी कर रखी थी। बुधवार को संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान आईसा अध्यक्ष नेहा बोरा ने जानकारी दी थी कि उन्होंने संसद मार्ग पुलिस थाने को तय समय और आने वाली संभावित भीड़ के ब्योरे से पहले ही अवगत करा दिया था।

नेताओं के आह्वान से बढ़ी चौकसी और अन्य राज्यों में असर

आंदोलन को व्यापक रूप देने के लिए नेताओं ने जनसमर्थन जुटाने की कोशिश की थी। दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने डिजिटल मंच एक्स पर नागरिकों से जंतर मंतर जुटने का आह्वान करते हुए चेतावनी भरे लहजे में लिखा कि आज अगर वोट का हक छिन रहा है तो कल बाकी नागरिक अधिकार भी चले जाएंगे। ऐसे खुले बयानों के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी निगरानी और तेज कर दी। इधर राजधानी में पाबंदी लगने के पश्चात कॉकरोच जनता पार्टी की योजनाएं भी बदल गईं। शुक्रवार के दिल्ली प्रदर्शन में कॉजपा के शामिल होने की कोई संभावना नहीं थी, मगर उसने 2 अक्टूबर को मुंबई के भीतर अलग रोष प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। दिल्ली में सभा की राह बंद होने के बाद संगठन ने जेल भरो आंदोलन छेड़ने की बात कही है।

सवाल-जवाब

दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर पर 2 अक्टूबर का प्रदर्शन क्यों रद्द किया?
खुफिया रिपोर्ट में 3,000 से 4,000 लोगों के जुटने की संभावना जताई गई थी, जिसके चलते कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अनुमति रद्द कर दी गई।
यह विरोध प्रदर्शन किसके खिलाफ और किस मुद्दे पर बुलाया गया था?
यह प्रदर्शन मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बुलाया गया था।
इस प्रदर्शन का आह्वान किन प्रमुख व्यक्तियों और संगठनों ने किया था?
प्रदर्शन का आह्वान ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन, सांसद मनोज झा और अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दिया था, जिसमें आप और यूथ कांग्रेस के नेता भी शामिल होने वाले थे।
प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के लिए क्या कदम उठाए हैं?
जंतर मंतर और आसपास के संवेदनशील इलाकों में दिल्ली पुलिस के साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल तैनात किया गया है और बैरिकेड लगाकर चेकिंग तेज कर दी गई है।
दिल्ली में अनुमति न मिलने पर अन्य संगठनों की क्या प्रतिक्रिया रही?
कॉकरोच जनता पार्टी ने दिल्ली में अनुमति निरस्त होने के बाद 2 अक्टूबर को मुंबई में प्रदर्शन करने और जेल भरो आंदोलन चलाने का ऐलान किया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Laxmi Gupta@laxmi-gupta·26 मिनट पहले

अक्टूबर की शुरुआत और ऐसा तनाव! ग्रहों की चाल बताती है कि जब तक संवाद नहीं सुधरेगा, टकराव ऐसे ही बढ़ता रहेगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·46 मिनट पहले

चुनाव आयोग पर सवाल उठना और इस तरह जंतर-मंतर पर रोक लगना सीधे तौर पर दिखाता है कि विपक्ष और प्रशासन के बीच टकराव कितना बढ़ गया है। 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के दिन ऐसी पाबंदियां माहौल को और गरम कर देंगी।

Dr. Aditya Sharma@aditya-sharma·45 मिनट पहले

अर्जुन जी, गांधी जयंती के दिन ऐसी रोक से तनाव कम नहीं होगा, बल्कि बात और बढ़ेगी। प्रशासन को बातचीत का रास्ता चुनना चाहिए था।

Karan Malhotra@karan-malhotra·52 मिनट पहले

मुझे वो दिन अच्छे से याद है जब जंतर-मंतर पर किसानों के धरने के वक्त ऐसी ही किलेबंदी हुई थी। तब भी पूरा इलाका छावनी बन गया था और ऑफिस पहुँचने में घंटों लग गए थे। पुलिस को जब भी भारी भीड़ का अंदेशा होता है, रास्ते बंद करना उनका सबसे पहला हथियार बन जाता है।

Rohan Verma@rohan-verma·52 मिनट पहले

करण भाई, तीन-चार हज़ार की भीड़ के लिए पूरा इलाका छावनी बना देना सच में गज़ब है।

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