राष्ट्रीय राजधानी में व्यवसायियों को निशाना बनाकर भारी भरकम रकम ऐंठने वाले एक अंतरराष्ट्रीय जबरन वसूली तंत्र के मंसूबों पर कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने पानी फेर दिया है। इस आपराधिक नेटवर्क के तार संयुक्त अरब अमीरात और भारत के विभिन्न हिस्सों से जुड़े पाए गए हैं। गिरोह के सदस्य कुख्यात गैंगस्टर गोल्डी बराड़ का खौफ दिखाकर दिल्ली के व्यापारियों को निशाना बना रहे थे। मांग पूरी न होने की स्थिति में पीड़ितों के आवासीय ठिकानों पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाने की घातक साजिश रची गई थी, जिसे समय रहते नाकाम कर दिया गया। इस पूरे प्रकरण में पुलिस ने तीन प्रमुख आरोपियों को अपनी गिरफ्त में ले लिया है।
व्यवसायी परिवार को विदेशी नंबर से लगातार धमकियां
इस पूरे षड्यंत्र का खुलासा तब हुआ जब 16 सितंबर 2026 की रात को शिकायतकर्ता प्रवीन जैन के मोबाइल हैंडसेट पर करीब 8 बजकर 15 मिनट पर तीन छूटी हुई कॉल दर्ज की गईं। इसके ठीक बाद रात के 9 बजकर 27 मिनट पर उनके पुत्र आयुष के फोन पर संयुक्त अरब अमीरात के अंतरराष्ट्रीय कोड वाले नंबर से संपर्क साधा गया। फोन करने वाले अज्ञात व्यक्ति ने खुद को गोल्डी बराड़ का नजदीकी साथी बताते हुए परिवार पर भारी दबाव बनाया। उसने सीधे तौर पर 1 करोड़ रुपये की बड़ी फिरौती की मांग रखी और यह चेतावनी दी कि यदि रकम का भुगतान नहीं किया गया तो पूरे परिवार को अत्यंत गंभीर हश्र भुगतना होगा। भय का माहौल पैदा करने के लिए बाद में दोबारा संपर्क कर इसी धमकी को दोहराया गया।
कानूनी कार्रवाई और विशेष जांच दल का गठन
पीड़ित परिवार द्वारा आपबीती साझा किए जाने के उपरांत रोहिणी क्षेत्र स्थित रूप नगर थाने में 17 सितंबर 2026 को प्रथम सूचना रिपोर्ट संख्या 162/2026 दर्ज की गई। यह कानूनी कार्रवाई भारतीय न्याय संहिता के प्रासंगिक प्रावधानों, धारा 308(4) तथा धारा 351(4) के तहत अमल में लाई गई। चूंकि मामला सीधे तौर पर सीमा पार से की जा रही कॉलों से जुड़ा था, इसलिए उत्तरी जिले की स्पेशल टास्क फोर्स को स्थानीय पुलिस के साथ संयुक्त पड़ताल में लगाया गया। पुलिस उपायुक्त उत्तरी निहारिका भट्ट के सीधे निर्देशन में एक उच्चस्तरीय दल तैयार हुआ, जिसमें एसीपी ऑपरेशंस विशेष धत्तरवाल, एसटीएफ निरीक्षक आशीष दुबे तथा रूप नगर थाना प्रभारी रमेश कौशिक शामिल रहे।
तकनीकी साक्ष्य और विदेशी सर्वर का सुराग
अपराधियों तक पहुंचने के लिए साइबर विशेषज्ञों ने डिजिटल पदचिह्नों और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स का गहन विश्लेषण शुरू किया। तकनीकी पड़ताल में यह तथ्य उजागर हुआ कि कॉल स्थापित करने के लिए सामान्य दूरसंचार तंत्र के बजाय जटिल इंटरनेट प्रोटोकॉल और रिमोट सर्वर का सहारा लिया गया था। जांच के दौरान आईपी एड्रेस 51.91.249.248 चिन्हित किया गया, जिसका सीधा संबंध फ्रांस की क्लाउड कंपनी ओवीएच एसएएस से निकला। इससे यह पुष्टि हुई कि कॉल की वास्तविक उत्पत्ति छुपाने के लिए वर्चुअल प्राइवेट सर्वर और विदेशी डेटा केंद्रों का व्यापक उपयोग किया जा रहा था।
दुबई कनेक्शन और परिजनों से पूछताछ
इलेक्ट्रॉनिक खातों की जांच आगे बढ़ने पर संदिग्ध गतिविधियों का केंद्र संयुक्त अरब अमीरात पाया गया। इसके आधार पर पुलिस ने अबूजर नामक एक शख्स के यात्रा ब्योरे खंगाले, जो 13 जून 2026 को दुबई रवाना हुआ था। इसके अतिरिक्त दुबई में इस्तेमाल हो रहे उस्मान के सिम कार्ड और एक खास मोबाइल डिवाइस के आईएमईआई नंबर ने मामले की गुत्थी सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर जांच दल ने देहरादून तथा करनाल पहुंचकर जुबैर, मारूफ और उस्मान से विस्तृत पूछताछ की। इस पूछताछ और तकनीकी विश्लेषण से सामने आया कि दुबई से धमकी भरी आवाज आरिश की थी, जो रिश्ते में अबूजर और उस्मान का सगा भाई है।
स्थानीय साजिशकर्ता और बोली बदलने की चाल
जांच का दायरा आगे बढ़ा तो उत्तर प्रदेश के शामली स्थित रसूलपुर गुजरान के निवासी आरिफ उर्फ पिस्टल की केंद्रीय भूमिका उजागर हुई। आरिफ इस पूरे अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय गठजोड़ का भारतीय संचालक बना हुआ था। उसने दुबई में बैठे आरिश को कॉल करने के एवज में मोटी नकदी की पेशकश की थी। इतना ही नहीं, आरिफ ने आरिश को निर्देश दिया था कि वह बातचीत के दौरान हरियाणवी बोली का इस्तेमाल करे ताकि पीड़ित यह समझे कि धमकी दिल्ली-एनसीआर के किसी स्थानीय दबंग अपराधी की ओर से आ रही है। इसी कड़ी में तितवाड़ा निवासी मुबारिक उर्फ गुल्लू का नाम भी षड्यंत्र के मुख्य सूत्रधार के रूप में सामने आया।
रोहिणी के दूसरे कारोबारी को 48 घंटे का अल्टीमेटम
अभी पहले मामले की तफ्तीश चल ही रही थी कि 19 सितंबर को रोहिणी सेक्टर-1 में रहने वाले निर्माण व्यवसायी मनोज मलिक के छोटे भाई को उसी विदेशी नंबर से रात 10 बजकर 11 मिनट और 10 बजकर 12 मिनट पर दो व्हाट्सऐप कॉल प्राप्त हुईं। इसके तुरंत बाद 37 सेकंड की एक ऑडियो रिकॉर्डिंग भेजी गई। इस संदेश में खुद को महेंद्रगढ़ का विक्रांत बताते हुए गोल्डी बराड़ गिरोह से संबंध का दावा किया गया। कॉलर ने 48 घंटे की समय सीमा तय करते हुए 1 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी और रकम न देने पर आवास पर सीधे गोलीबारी करने की खुली चेतावनी दी। इस घटना के संदर्भ में 24 सितंबर 2026 को विजय विहार थाने में बीएनएस की धारा 308(2) व 351(2) के तहत एफआईआर 0520/2026 दर्ज की गई।
घर पर पहरा और गोलीबारी की साजिश विफल
दोनों मामलों में एक ही विदेशी नंबर का उपयोग जांच एजेंसियों के लिए निर्णायक मोड़ साबित हुआ। इससे स्पष्ट हो गया कि राजधानी के अलग-अलग इलाकों में कारोबारियों को आतंकित करने के पीछे एक ही गिरोह सक्रिय है। इसी बीच खुफिया तंत्र से इनपुट मिला कि रूप नगर वाले मामले में रकम न मिलने पर पीड़ित के आवास पर भारी गोलीबारी करने की फुलप्रूफ योजना बनाई जा चुकी थी। हमले को अंजाम देने से करीब दो दिन पूर्व ही यह खाका खींचा गया था ताकि वारदात के बाद दोबारा भारी रकम वसूली जा सके। हालांकि पुलिस ने तेजी दिखाते हुए रूप नगर स्थित व्यवसायी के आवास पर सुरक्षा का कड़ा पहरा बैठा दिया और संभावित हमले को सिरे से नाकाम कर दिया।
अहमदाबाद से दबोचा गया मुख्य गुर्गा आरिफ
वारदात टलने के बाद पुलिस ने आरिफ उर्फ पिस्टल के हर कदम पर इलेक्ट्रॉनिक नजर रखी। उसकी लोकेशन गुजरात के अहमदाबाद में ट्रेस होते ही दिल्ली पुलिस की टीम ने स्थानीय वेजलपुर थाना पुलिस के समन्वय से 24 सितंबर 2026 को उसे धर दबोचा। 32 वर्षीय आरिफ मूल रूप से शामली का रहने वाला है लेकिन अहमदाबाद के फतेहबाड़ी में ठिकाना बनाए हुए था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 2016 से 2026 के बीच शामली के कैराना थाने में उसके खिलाफ जानलेवा हमला, रंगदारी, दंगा भड़काना और आर्म्स एक्ट समेत 12 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। वह इस सिंडिकेट का सबसे अहम जमीनी सिपहसालार था।
शूटरों का इंतजाम और अन्य गिरफ्तारियां
आरिफ से पूछताछ में यह खुलासा हुआ कि धमकियों के बाद दहशत पैदा करने के लिए बाकायदा भाड़े के शूटरों की व्यवस्था की गई थी। तितवाड़ा निवासी मुबारिक उर्फ गुल्लू ने इन शूटरों को छिपाने के लिए दिल्ली के किराड़ी क्षेत्र में बाकायदा कमरा किराए पर लिया और उसका भुगतान किया। पुलिस ने 25 सितंबर 2026 को मुबारिक को भी गिरफ्तार कर लिया। चौंकाने वाली बात यह है कि मुबारिक पीड़ित व्यवसायी के बिजनेस पार्टनर दिलशाद का सगा भाई निकला। वहीं गोलीबारी के लिए तैयार किए गए चार शूटरों में से एक नवाब अली उर्फ सोनिज को 1 अक्टूबर 2026 को रेवाड़ी रेलवे स्टेशन के समीप चलती ट्रेन से रेलवे सुरक्षा बल की मदद से दबोचा गया, जब वह भागने की फिराक में था। नवाब मुजफ्फरनगर के खालापार का रहने वाला है।
फरार शूटरों की तलाश और वित्तीय कड़ियों की पड़ताल
वर्तमान में पुलिस बचे हुए तीन अन्य शूटरों की धरपकड़ के लिए हरियाणा के पानीपत और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लगातार छापे मार रही है। इसके साथ ही दुबई में मौजूद आरिश तक पहुंचने के लिए राजनयिक व कानूनी माध्यमों की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। सुरक्षा एजेंसियां इस गिरोह के तमाम बैंक खातों, हवाला संपर्कों और डिजिटल लेन-देन के ब्योरे खंगाल रही हैं ताकि सिंडिकेट की आर्थिक जड़ों को काटा जा सके और यह पता लगाया जा सके कि क्या इस नेटवर्क ने दिल्ली या अन्य राज्यों में किसी और व्यवसायी को भी ऐसे जाल में फंसाया है।























