देश की राजधानी में राष्ट्रीय जनप्रतिनिधियों के लिए सुरक्षित माने जाने वाले लुटियंस जोन स्थित एक सांसद के सरकारी बंगले से वर्ष 2019 में हुए घरेलू सामान की कथित चोरी के मामले में अदालत का बड़ा निर्णय सामने आया है। दिल्ली की एक अदालत ने मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद आरोपी नीरज कुमार सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ लगाए गए चोरी और अनधिकृत प्रवेश के आरोपों को कानून के स्थापित मानकों के अनुसार संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह से विफलता का शिकार रहा है। यह मामला लुटियंस दिल्ली के डॉ. राजेंद्र प्रसाद रोड स्थित सांसद निवास से जुड़ा हुआ था, जहां से कई कीमती और उपयोगी घरेलू सामान गायब होने की शिकायत दर्ज कराई गई थी।
लुटियंस दिल्ली के हाई प्रोफाइल बंगले में कथित चोरी का पूरा मामला
यह पूरा घटनाक्रम 21 जुलाई 2019 की तड़के का है, जब दिल्ली के अति-सुरक्षित लुटियंस क्षेत्र के डॉ. राजेंद्र प्रसाद रोड स्थित एक सांसद को आवंटित सरकारी आवास में कथित तौर पर अनधिकृत रूप से प्रवेश किया गया। दर्ज मामले के अनुसार, अज्ञात परिस्थितियों में बंगले के भीतर से कई प्रकार के घरेलू सामान चोरी कर लिए गए थे। गायब हुए सामानों की सूची में एक कूलर, कंप्यूटर, मॉनिटर, खिड़कियों और दरवाजों के पर्दे, रसोई घर के बर्तन, गद्दे तथा कई प्लास्टिक की कुर्सियां शामिल थीं। घटना के बाद संसद भवन थाने में आपराधिक मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। पुलिस जांच के दौरान दावा किया गया कि बिहार के खगड़िया जिले के निवासी नीरज कुमार सिंह के पास से चोरी गए सामानों में से एक कूलर, तीन प्लास्टिक की कुर्सियां और एक गद्दा बरामद किया गया है। इसी आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था।
मुख्य गवाह के पलटने और ठोस सबूतों की कमी से कमजोर पड़ा पक्ष
मामले की नियमित सुनवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट कौतुक भारद्वाज की अदालत में चल रही थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष का दावा उस समय पूरी तरह से धाराशायी हो गया जब इस मामले का मुख्य प्रत्यक्षदर्शी और शिकायतकर्ता ही अदालत के सामने अपने बयानों से मुकर गया। 24 अगस्त को दिए गए अपने फैसले में अदालत ने रेखांकित किया कि मुख्य शिकायतकर्ता ने कटघरे में खड़े होकर कहा कि उसे घटना के संबंध में कुछ भी याद नहीं है। इसके अलावा, मुकदमे के दौरान पेश किए गए दूसरे गवाह ने अदालत को बताया कि आरोपी नीरज कुमार सिंह तत्कालीन सांसद के यहां चालक के रूप में काम करता था और कथित घटना वाले दिन वह बंगले के परिसर में शराब पी रहा था।
अदालत ने अपने विस्तृत विश्लेषण में कहा कि मुख्य गवाह को किसी तीसरे व्यक्ति के माध्यम से यह जानकारी मिली थी कि चोरी की घटना को सिंह ने अंजाम दिया है। चूंकि मुख्य शिकायतकर्ता स्वयं अपने शुरुआती बयानों से मुकर गया, इसलिए किसी अन्य व्यक्ति द्वारा दी गई जानकारी पर आधारित गवाही का कोई स्वतंत्र कानूनी मूल्य नहीं रह जाता। इसके अतिरिक्त, पुलिस पूरी जांच के दौरान घटना का कोई भी ऐसा स्वतंत्र प्रत्यक्षदर्शी अदालत के समक्ष पेश करने में नाकाम रही जिसने आरोपी को बंगले में चोरी करते या सामान ले जाते देखा हो।
बरामद सामान की सरकारी पहचान और जब्ती पर उठे गंभीर सवाल
अदालत ने आरोपी के पास से कथित तौर पर बरामद किए गए सामानों की वैधता और पहचान पर भी अभियोजन पक्ष की दलीलों को अपर्याप्त और कमजोर माना। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष की ओर से ऐसा कोई भी प्रत्यक्षदर्शी या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया जो यह साबित कर सके कि आरोपी के पास से जब्त किया गया कूलर, तीन कुर्सियां और गद्दा वही सामान थे जो 21 जुलाई 2019 को सांसद के बंगले से गायब हुए थे। अदालत ने यह सिद्धांत दोहराया कि केवल पुलिस हिरासत में दिए गए आरोपी के प्रकटीकरण बयान के आधार पर उसे दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब तक कि उसकी पुष्टि स्वतंत्र साक्ष्यों से न हो।
इसके साथ ही, अदालत ने जांच एजेंसी की एक बड़ी लापरवाही को उजागर करते हुए पाया कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में पूरी तरह असफल रहा कि बरामद सामान केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) की सरकारी संपत्ति था। जांच के दौरान CPWD के किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बरामद कूलर या कुर्सियों की तस्वीरें नहीं दिखाई गईं और न ही उनकी आधिकारिक पहचान कराई गई, जिससे यह स्थापित हो पाता कि वे वस्तुएं सरकारी रिकॉर्ड का हिस्सा थीं।
अदालत का अंतिम फैसला और आरोपी की ससम्मान बरी का आधार
इन सभी कानूनी कमियों, गवाहों के बयानों में विरोधाभास और साक्ष्यों के अभाव का संज्ञान लेते हुए अदालत ने अपना अंतिम निष्कर्ष निकाला। न्यायिक मजिस्ट्रेट कौतुक भारद्वाज ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि आरोपी नीरज कुमार सिंह ने चोरी की नीयत से सांसद के सरकारी बंगले में छिपकर प्रवेश किया था या गृह-अतिचार (सेंधमारी) की घटना को अंजाम दिया था। चूंकि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आपराधिक आरोप संदेह से परे साबित नहीं हो सके, इसलिए अदालत ने नीरज कुमार सिंह को मामले के सभी आरोपों से बरी करने का आदेश जारी कर दिया।





















