पीएम जन धन योजना के 12 साल: 59 करोड़ से अधिक खातों में जमा हुए 3.16 लाख करोड़ रुपये, महिलाओं की भागीदारी रही सबसे आगेतिब्बत में भीषण बाढ़ के बीच फंसीं भारतीय श्रद्धालु सुनीता आहूजा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लगाई एयरलिفت और एग्जिट परमिट की गुहारगूगल होम स्पीकर रिव्यू (2026): जेमिनी स्मार्ट सपोर्ट और बेहतरीन वॉइस कंट्रोल, लेकिन साउंड क्वालिटी में कमियांराखी पर्व पर रांची के 10 प्रमुख मिष्ठान केंद्र, जहां पारंपरिक स्वाद से लेकर फैंसी मिठाइयों तक की है बड़ी रेंजतिब्बत की ल्हेंदे नदी में झील बनने से भोटेकोशी क्षेत्र पर मंडराया नए सैलाब का खतरा, अलर्ट जारीफ्रांस के ग्रेवलाइंस परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर समुद्री जीवों का हमला, जेलीफिश के झुंड के कारण बंद करनी पड़ीं कई इकाइयांएक्सआरपी में 1.40 डॉलर के सपोर्ट से उछाल, स्टेलर और बिटकॉइन की तेजी से बदला क्रिप्टो मार्केट का मिजाजकॉमर्सबैंक के अध्ययन के अनुसार चीनी युआन की कमजोरी नहीं बल्कि संरचनात्मक ताकतें बढ़ा रही हैं निर्यातछत्रपति संभाजीनगर में तीन लोगों की मौत के मामले में पुलिस जांच लगभग पूरी, परिजनों ने साजिश से किया इंकारगुजरात में 226 करोड़ रुपये के अवैध क्रिप्टो सिंडिकेट की चार्जशीट दाखिल, हमास और हूती से जुड़े तार
लुटियंस दिल्ली में सांसद आवास से कूलर और कुर्सियां चोरी के मामले में अदालत ने आरोपी को किया बरीदिल्ली
27 अग॰ 2026, 8:10 pm (1 घंटे पहले)· 2

लुटियंस दिल्ली में सांसद आवास से कूलर और कुर्सियां चोरी के मामले में अदालत ने आरोपी को किया बरी

दिल्ली की एक अदालत ने वर्ष 2019 में लुटियंस क्षेत्र स्थित सांसद के सरकारी बंगले से घरेलू सामान चोरी करने के आरोप में घिरे नीरज कुमार सिंह को बरी कर दिया है। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ लगे आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा।

देश की राजधानी में राष्ट्रीय जनप्रतिनिधियों के लिए सुरक्षित माने जाने वाले लुटियंस जोन स्थित एक सांसद के सरकारी बंगले से वर्ष 2019 में हुए घरेलू सामान की कथित चोरी के मामले में अदालत का बड़ा निर्णय सामने आया है। दिल्ली की एक अदालत ने मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद आरोपी नीरज कुमार सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ लगाए गए चोरी और अनधिकृत प्रवेश के आरोपों को कानून के स्थापित मानकों के अनुसार संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह से विफलता का शिकार रहा है। यह मामला लुटियंस दिल्ली के डॉ. राजेंद्र प्रसाद रोड स्थित सांसद निवास से जुड़ा हुआ था, जहां से कई कीमती और उपयोगी घरेलू सामान गायब होने की शिकायत दर्ज कराई गई थी।

लुटियंस दिल्ली के हाई प्रोफाइल बंगले में कथित चोरी का पूरा मामला

यह पूरा घटनाक्रम 21 जुलाई 2019 की तड़के का है, जब दिल्ली के अति-सुरक्षित लुटियंस क्षेत्र के डॉ. राजेंद्र प्रसाद रोड स्थित एक सांसद को आवंटित सरकारी आवास में कथित तौर पर अनधिकृत रूप से प्रवेश किया गया। दर्ज मामले के अनुसार, अज्ञात परिस्थितियों में बंगले के भीतर से कई प्रकार के घरेलू सामान चोरी कर लिए गए थे। गायब हुए सामानों की सूची में एक कूलर, कंप्यूटर, मॉनिटर, खिड़कियों और दरवाजों के पर्दे, रसोई घर के बर्तन, गद्दे तथा कई प्लास्टिक की कुर्सियां शामिल थीं। घटना के बाद संसद भवन थाने में आपराधिक मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। पुलिस जांच के दौरान दावा किया गया कि बिहार के खगड़िया जिले के निवासी नीरज कुमार सिंह के पास से चोरी गए सामानों में से एक कूलर, तीन प्लास्टिक की कुर्सियां और एक गद्दा बरामद किया गया है। इसी आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था।

ये भी पढ़ें

मुख्य गवाह के पलटने और ठोस सबूतों की कमी से कमजोर पड़ा पक्ष

मामले की नियमित सुनवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट कौतुक भारद्वाज की अदालत में चल रही थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष का दावा उस समय पूरी तरह से धाराशायी हो गया जब इस मामले का मुख्य प्रत्यक्षदर्शी और शिकायतकर्ता ही अदालत के सामने अपने बयानों से मुकर गया। 24 अगस्त को दिए गए अपने फैसले में अदालत ने रेखांकित किया कि मुख्य शिकायतकर्ता ने कटघरे में खड़े होकर कहा कि उसे घटना के संबंध में कुछ भी याद नहीं है। इसके अलावा, मुकदमे के दौरान पेश किए गए दूसरे गवाह ने अदालत को बताया कि आरोपी नीरज कुमार सिंह तत्कालीन सांसद के यहां चालक के रूप में काम करता था और कथित घटना वाले दिन वह बंगले के परिसर में शराब पी रहा था।

अदालत ने अपने विस्तृत विश्लेषण में कहा कि मुख्य गवाह को किसी तीसरे व्यक्ति के माध्यम से यह जानकारी मिली थी कि चोरी की घटना को सिंह ने अंजाम दिया है। चूंकि मुख्य शिकायतकर्ता स्वयं अपने शुरुआती बयानों से मुकर गया, इसलिए किसी अन्य व्यक्ति द्वारा दी गई जानकारी पर आधारित गवाही का कोई स्वतंत्र कानूनी मूल्य नहीं रह जाता। इसके अतिरिक्त, पुलिस पूरी जांच के दौरान घटना का कोई भी ऐसा स्वतंत्र प्रत्यक्षदर्शी अदालत के समक्ष पेश करने में नाकाम रही जिसने आरोपी को बंगले में चोरी करते या सामान ले जाते देखा हो।

बरामद सामान की सरकारी पहचान और जब्ती पर उठे गंभीर सवाल

अदालत ने आरोपी के पास से कथित तौर पर बरामद किए गए सामानों की वैधता और पहचान पर भी अभियोजन पक्ष की दलीलों को अपर्याप्त और कमजोर माना। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष की ओर से ऐसा कोई भी प्रत्यक्षदर्शी या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया जो यह साबित कर सके कि आरोपी के पास से जब्त किया गया कूलर, तीन कुर्सियां और गद्दा वही सामान थे जो 21 जुलाई 2019 को सांसद के बंगले से गायब हुए थे। अदालत ने यह सिद्धांत दोहराया कि केवल पुलिस हिरासत में दिए गए आरोपी के प्रकटीकरण बयान के आधार पर उसे दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब तक कि उसकी पुष्टि स्वतंत्र साक्ष्यों से न हो।

इसके साथ ही, अदालत ने जांच एजेंसी की एक बड़ी लापरवाही को उजागर करते हुए पाया कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में पूरी तरह असफल रहा कि बरामद सामान केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) की सरकारी संपत्ति था। जांच के दौरान CPWD के किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बरामद कूलर या कुर्सियों की तस्वीरें नहीं दिखाई गईं और न ही उनकी आधिकारिक पहचान कराई गई, जिससे यह स्थापित हो पाता कि वे वस्तुएं सरकारी रिकॉर्ड का हिस्सा थीं।

अदालत का अंतिम फैसला और आरोपी की ससम्मान बरी का आधार

इन सभी कानूनी कमियों, गवाहों के बयानों में विरोधाभास और साक्ष्यों के अभाव का संज्ञान लेते हुए अदालत ने अपना अंतिम निष्कर्ष निकाला। न्यायिक मजिस्ट्रेट कौतुक भारद्वाज ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि आरोपी नीरज कुमार सिंह ने चोरी की नीयत से सांसद के सरकारी बंगले में छिपकर प्रवेश किया था या गृह-अतिचार (सेंधमारी) की घटना को अंजाम दिया था। चूंकि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आपराधिक आरोप संदेह से परे साबित नहीं हो सके, इसलिए अदालत ने नीरज कुमार सिंह को मामले के सभी आरोपों से बरी करने का आदेश जारी कर दिया।

सवाल-जवाब

यह मामला किस वर्ष और कहाँ का है?
यह मामला जुलाई 2019 का है, जो दिल्ली के लुटियंस क्षेत्र स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद रोड पर बने एक सांसद के सरकारी आवास से जुड़ा है।
मामले में मुख्य आरोपी कौन था?
बिहार के खगड़िया निवासी नीरज कुमार सिंह इस मामले में मुख्य आरोपी थे, जो तत्कालीन सांसद के पास चालक के रूप में कार्यरत थे।
सांसद के बंगले से किन सामानों की चोरी का आरोप लगाया गया था?
बंगले से कूलर, कंप्यूटर, मॉनिटर, पर्दे, रसोई के बर्तन, गद्दे और प्लास्टिक की कुर्सियां चोरी होने का आरोप लगाया गया था।
कोर्ट ने आरोपी नीरज कुमार सिंह को क्यों बरी कर दिया?
अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष चोरी और बरामदगी के आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह असफल रहा तथा मुख्य गवाह भी अपने बयान से मुकर गया।
किस जज ने यह फैसला सुनाया और पुलिस स्टेशन कौन सा था?
यह फैसला न्यायिक मजिस्ट्रेट कौतुक भारद्वाज ने सुनाया और मामला संसद भवन थाने में दर्ज किया गया था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·43 मिनट पहले

लुटियंस जोन जैसे अति-सुरक्षित क्षेत्र में इस प्रकार की आपराधिक घटनाएं और कमजोर पुलिस जांच प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। मुख्य गवाहों के मुकरने से यह साबित होता है कि जमीनी स्तर पर साक्ष्यों के संकलन में कितनी बड़ी खामियां थीं, जिसका सीधा लाभ आरोपियों को मिलता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·43 मिनट पहले

यह मामला केवल एक बरी होने का आदेश नहीं, बल्कि हमारी आपराधिक न्याय प्रणाली में जांच के स्तर पर मौजूद गंभीर विसंगतियों का आईना है। जब अति-सुरक्षित माने जाने वाले वीवीआईपी क्षेत्र में दर्ज मामलों में भी अभियोजन पक्ष पुख्ता और निर्विवाद साक्ष्य पेश करने में विफल रहता है, तो यह पुलिस की वैज्ञानिक और तकनीकी जांच पद्धतियों पर सीधा सवालिया निशान लगाता है। इस तरह के फैसलों से यह स्पष्ट होता है कि केवल प्राथमिक गवाहों के बयानों और कमजोर बरामदगी के भरोसे फाइलें अदालत तक पहुँचाने से अपराधियों को कानून की कमियों का लाभ मिल जाता है और न्याय की प्रक्रिया अधूरी रह जाती है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR