12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर देश भर में आयोजन, शशि थरूर ने रेखांकित किए रोजगार और महिला भागीदारी के आंकड़ेआईआईटी दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में शामिल होंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, 'परम प्रज्ञा' सुपरकंप्यूटर का करेंगे उद्घाटनसंजय दत्त और नगमा पर फिल्माया 1992 का रोमांटिक गाना आखिर तुम्हें आना है आज भी क्यों माना जाता है खाससीरिया में शिकारियों के चंगुल से छूटा दुर्लभ पूर्वी शाही गरुड़ 'फेलिक्स', सर्बिया के जंगलों में वापस लौटासोने के गहने गिरवी रखकर कर्ज लेने की होड़, एनबीएफसी का गोल्ड लोन 69 फीसदी बढ़कर 3.42 लाख करोड़ रुपये पर पहुंचानागपुर में नाबालिग के साथ बर्बरता के बाद सोशल मीडिया खातों के लिए अनिवार्य ई-केवाईसी की मांग तेजद लास्ट हाउस रिव्यू (2026): एक मकान में कैद परिवार की साइंस-फिक्शन कहानी में कितना है दमओडिशा के कटक में भीषण हादसा: स्कॉर्पियो ने इंडसइंड बैंक कर्मचारी सस्मिता को घसीटा, हालत नाजुकघरेलू काम करने वाली अनाथ बच्ची से पद्मश्री शास्त्रीय गायिका बनने तक सिद्धेश्वरी देवी का प्रेरक सफरई20 पेट्रोल नीति पर राहुल गांधी ने उठाया सवाल, वाहनों को नुकसान का दावा करते हुए अभियान चलाने का किया ऐलान
नई दिल्ली में भारत और चीन के बीच कूटनीतिक वार्ता, 36वीं WMCC बैठक में सीमाई स्थिरता पर जोरदिल्ली
7 अग॰ 2026, 12:59 pm (18 घंटे पहले)· 0

नई दिल्ली में भारत और चीन के बीच कूटनीतिक वार्ता, 36वीं WMCC बैठक में सीमाई स्थिरता पर जोर

भारत और चीन के अधिकारियों ने 6 अगस्त को नई दिल्ली में आयोजित 36वीं WMCC बैठक के दौरान वास्तविक नियंत्रण रेखा की स्थिति की व्यापक समीक्षा की और सीमा पर शांति बनाए रखने की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की।

भारत और चीन के बीच लंबे समय से चला आ रहा सीमा विवाद द्विपक्षीय संबंधों का एक संवेदनशील पहलू बना हुआ है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए 6 अगस्त को नई दिल्ली में दोनों देशों के बीच 36वीं सीमा परामर्श और समन्वय कार्य तंत्र (WMCC) बैठक संपन्न हुई। यह वार्ता केवल एक सामान्य बैठक तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर मौजूद स्थिति का गहन विश्लेषण किया गया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (पूर्वी एशिया) सुजीत घोष ने की, जबकि चीनी पक्ष का नेतृत्व वहां के विदेश मंत्रालय के सीमा और समुद्री मामलों के विभाग की महानिदेशक हाउ यानची ने किया। इस चर्चा का मुख्य उद्देश्य यह स्पष्ट करना था कि सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता कायम किए बिना द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य स्थिति में नहीं लाया जा सकता।

सैन्य और कूटनीतिक माध्यमों से संवाद जारी रखने का निर्णय

बैठक के दौरान दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने सीमा से जुड़े अनसुलझे मामलों पर विस्तार से विचार विमर्श किया। किसी भी संभावित गलतफहमी या गलत आकलन की स्थिति से बचने के लिए स्थापित सैन्य और कूटनीतिक रास्तों को निरंतर सक्रिय रखने पर सहमति बनी। इसमें स्थानीय स्तर पर तैनात सैन्य कमांडरों के बीच होने वाली वार्ताओं के साथ-साथ अन्य स्थापित संवाद तंत्रों को मजबूती देना शामिल है। दोनों पक्षों ने माना कि सीमा पर किसी भी तरह का तनाव रोकने के लिए बातचीत का दौर जारी रहना अनिवार्य है, क्योंकि सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिरता का सीधा प्रभाव दोनों देशों के बीच समग्र संबंधों के भविष्य पर पड़ता है।

ये भी पढ़ें

द्विपक्षीय संबंधों की बुनियाद के रूप में सीमाई शांति

विदेश मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, दोनों देशों ने इस तथ्य को रेखांकित किया कि सीमा क्षेत्रों में शांति का माहौल बनाए रखना द्विपक्षीय संबंधों के सुचारू विकास की प्राथमिक शर्त है। बैठक में वास्तविक नियंत्रण रेखा की वर्तमान परिस्थितियों का पूरा ब्योरा प्रस्तुत किया गया और विभिन्न विषयों पर खुले तौर पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ। दोनों देशों के अधिकारियों के बीच यह साझा समझ बनी कि सीमा विवादों के समाधान के लिए केवल स्थापित तंत्रों और द्विपक्षीय संवाद का ही सहारा लिया जाना चाहिए।

सीमा प्रबंधन और सीमा-पार सहयोग पर विस्तृत विचार-विमर्श

यह बैठक 24वीं विशेष प्रतिनिधियों (SR) की वार्ता से हासिल हुए निष्कर्षों के आलोक में आयोजित की गई थी। इसके तहत सीमा निर्धारण, सीमा प्रबंधन, सुरक्षा तंत्र के निर्माण और सीमा पार सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा की गई। ऐसे समय में जब दोनों देश किसी भी नए तनाव से बचना चाहते हैं, इन तंत्रों को बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। बातचीत में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि स्थानीय कमांडर स्तर की बैठकों को प्राथमिकता दी जाए ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत संवाद कायम कर गलतफहमी दूर की जा सके।

सीमा-पार नदियों और तकनीकी सूचना साझाकरण का मुद्दा

इस वार्ता के दौरान भारत ने सीमा-पार नदियों से जुड़े विषयों को भी प्रमुखता से उठाया। भारतीय पक्ष ने विशेषज्ञ स्तर के तंत्र की आगामी बैठक जल्द आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया। इसके अतिरिक्त, ऊपरी धारा वाले क्षेत्रों में संचालित परियोजनाओं से संबंधित तकनीकी आंकड़ों और जल संबंधी जानकारियों को साझा करने का विषय भी रेखांकित किया गया। सीमा पार नदियों का विषय दोनों राष्ट्रों के लिए अत्यंत संवेदनशील माना जाता है, इसलिए विशेषज्ञ स्तर पर नियमित बातचीत और तकनीकी डेटा का आदान-प्रदान आपसी विश्वास कायम करने के लिए आवश्यक है।

बहु-विभागीय भागीदारी और भविष्य का दृष्टिकोण

चीन के विदेश मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया कि दोनों देश कूटनीतिक और सैन्य चैनलों के माध्यम से संपर्क बनाए रखने और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने पर सहमत हुए हैं। सुजीत घोष और हाउ यानची की सह-अध्यक्षता में हुई इस बैठक में केवल विदेश मंत्रालय ही नहीं, बल्कि रक्षा, गृह और आव्रजन विभागों के अधिकारी भी शामिल रहे। इससे यह स्पष्ट होता है कि सीमा प्रबंधन का दायरा व्यापक है और इसमें विभिन्न सरकारी विभागों का समन्वय शामिल है। 36वीं WMCC बैठक ने यह संकेत दिया है कि जटिल मतभेदों के बावजूद बातचीत के रास्ते खुले रखना दोनों देशों के हित में है।

सवाल-जवाब

नई दिल्ली में कौन सी बैठक आयोजित की गई थी?
6 अगस्त को नई दिल्ली में भारत और चीन के बीच 36वीं सीमा परामर्श और समन्वय कार्य तंत्र (WMCC) की बैठक आयोजित हुई।
इस बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई किसने की?
भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (पूर्वी एशिया) सुजीत घोष ने किया।
चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किसने किया?
चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वहां के विदेश मंत्रालय के सीमा और समुद्री मामलों के विभाग की महानिदेशक हाउ यानची ने किया।
क्या बैठक में सीमा पार नदियों का मुद्दा उठाया गया?
हां, भारत ने सीमा पार नदियों से संबंधित विशेषज्ञ स्तर के तंत्र की बैठक जल्द बुलाने और तकनीकी डेटा साझा करने का मुद्दा उठाया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR