राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस वर्ष के मानसूनी सीजन का दौर अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। मौसम विभाग ने बुधवार को आधिकारिक पुष्टि करते हुए जानकारी दी कि दक्षिण-पश्चिम मानसून दिल्ली से पूरी तरह विदा हो चुका है। आमतौर पर राजधानी से इसके हटने की सामान्य तारीख 25 सितंबर निर्धारित है, लेकिन इस बार हवाओं के बदलते रुख और बारिश थमने के चलते यह दो दिन पहले ही लौट गया। इसके साथ ही दिल्ली और आसपास के इलाकों में मानसूनी फुहारों का सिलसिला समाप्त हो गया है।
देरी से दस्तक देने के बाद वक्त से पहले विदा
इस मानसूनी सत्र का सफर काफी दिलचस्प रहा। आमतौर पर दिल्ली में मानसूनी हवाओं का आगमन 27 जून के आसपास होता है, लेकिन इस साल मानसूनी बादलों ने करीब पांच दिन की देरी से यानी 2 जुलाई को राजधानी में प्रवेश किया था। भले ही शुरुआत में बादलों के आने में विलंब हुआ, लेकिन वापसी का समय आने पर इसने सामान्य समय से पहले ही विदाई ले ली। वर्ष 1971 से 2019 के दीर्घावधि आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार दिल्ली से मानसून हटने की सामान्य तारीख 25 सितंबर मानी जाती है। बीते साल की बात करें तो राष्ट्रीय राजधानी से मानसून की रवानगी 24 सितंबर को दर्ज की गई थी।
पड़ोसी राज्यों से भी हटी मानसूनी हवाएं
मौसम वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि बुधवार को मानसून की वापसी केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रही। पूरी राष्ट्रीय राजधानी और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के साथ-साथ पंजाब, हरियाणा तथा राजस्थान के अधिकांश इलाकों से भी दक्षिण-पश्चिम मानसूनी हवाएं पीछे हट चुकी हैं। इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश और गुजरात के भी कुछ हिस्सों से मानसूनी हवाओं की विदाई दर्ज की गई है। इस बदलाव का सीधा अर्थ यह है कि अब इन सभी क्षेत्रों में मानसूनी बारिश की गतिविधियां पूरी तरह बंद हो जाएंगी और मौसम शुष्क होने लगेगा।
सफदरजंग में सामान्य से 16 प्रतिशत अधिक वर्षा
बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस बार राजधानी में पर्याप्त पानी बरसा है। 1 जून से 23 सितंबर के दौरान सफदरजंग वेधशाला में कुल 728.6 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि इस समयावधि का सामान्य औसत 629.7 मिमी रहता है। यह आंकड़ा सामान्य से 16 प्रतिशत अधिक रहा और इसे मौसम विभाग के पैमानों पर सामान्य वर्षा की श्रेणी में रखा गया है।
इतिहास के पन्नों में सबसे जल्दी और देर से वापसी के रिकॉर्ड
राजधानी से मानसूनी हवाओं की वापसी का रिकॉर्ड काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। वर्ष 1961 के बाद के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली से मानसून की सबसे जल्दी रवानगी 1982 में देखी गई थी, जब 3 सितंबर को ही मानसून विदा हो गया था। दूसरी तरफ सबसे देर से वापसी का ऐतिहासिक रिकॉर्ड वर्ष 2013 में बना था, जब मानसूनी हवाएं 17 अक्टूबर तक सक्रिय रही थीं और उसके बाद ही वापस लौटी थीं।

















