देश भर में 22 सितंबर को मौसमी परिस्थितियों में एक बड़ा बदलाव साफ तौर पर उभरता नजर आ रहा है। उत्तर-पश्चिम भारत के बड़े भूभाग, विशेषकर दिल्ली और हरियाणा जैसे मैदानी इलाकों में आसमान बिल्कुल खुला रहेगा और वहां मॉनसून का प्रभाव लगभग सिमट चुका है। दूसरी ओर देश के पूर्वी, मध्य तथा दक्षिणी हिस्सों में मॉनसूनी गतिविधियों में तेजी दर्ज की जाएगी। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार कई राज्यों में तेज आंधी, बादलों की गड़गड़ाहट और आकाशीय बिजली चमकने के साथ जोरदार बारिश दर्ज हो सकती है। बिहार और झारखंड समेत कुछ अन्य राज्यों में मूसलाधार पानी गिरने की वजह से जलभराव और बाढ़ जैसी विकट परिस्थितियां भी बन सकती हैं। मंगलवार के परिदृश्य को देखते हुए विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में मौसम के अलग-अलग रूप दिखाई देंगे।
आधिकारिक पूर्वानुमान के मुताबिक उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकतर अंचलों में दिनभर धूप खिली रहेगी। सुबह से लेकर शाम तक तेज धूप रहने की वजह से वातावरण में मौजूद नमी छंटेगी और हल्की गर्माहट का अहसास होगा। इसके ठीक विपरीत मध्य, पूर्वी और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में मानसूनी धारा अचानक सक्रिय हो रही है, जिससे इन क्षेत्रों में व्यापक वर्षा का नया दौर शुरू होने जा रहा है। दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा के इलाकों में मॉनसून की वापसी का असर दिखेगा और मौसम शुष्क बना रहेगा।
उत्तर-पश्चिम भारत में वर्षा का रुकना और मॉनसून की वापसी
उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों में 22 सितंबर को बारिश की गुंजाइश न के बराबर रहने वाली है। अगर पहाड़ी राज्यों की बात करें तो हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पर्वतीय इलाकों में 21 से 25 सितंबर की अवधि में छिटपुट या हल्की फुल्की बौछारें देखने को मिल सकती हैं, लेकिन 22 सितंबर के दिन कोई विशेष मौसमी हलचल नहीं दिखाई देगी।
मॉनसून अब उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानों से तेजी से रुखसत हो रहा है। यही वजह है कि पंजाब, चंडीगढ़, हरियाणा और दिल्ली में 26 और 27 सितंबर तक केवल कहीं-कहीं बहुत हल्की बूंदाबांदी का अनुमान है, जिसके बाद मानसूनी फुहारों का सिलसिला पूरी तरह थम जाएगा। मैदानी इलाकों में विदाई की इस प्रक्रिया से आसमान साफ रहेगा।
उत्तर प्रदेश के संदर्भ में देखें तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इलाकों में 24 से 27 सितंबर के मध्य हल्की फुल्की बारिश हो सकती है, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों में 23, 24 और 27 सितंबर को हल्की बौछारें पड़ने की उम्मीद जताई गई है। पूर्वी राजस्थान में 21 और 22 सितंबर को केवल इक्का-दुक्का जगहों पर छिटपुट बारिश संभव है। उत्तराखंड में 22 सितंबर को वातावरण पूरी तरह शांत रहेगा, हालांकि 26 और 27 सितंबर को वहां व्यापक पैमाने पर बारिश देखने को मिल सकती है।
मैदानी शहरों में तापमान और मौसम का मिजाज
तापमान की दृष्टि से देखें तो उत्तर-पश्चिम के शहरों में फिलहाल अत्यधिक गर्मी से राहत बनी रहेगी। दिल्ली में 22 सितंबर को अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज होने का अनुमान है। दिन में आसमान साफ रहने के बावजूद धूप के साथ तापमान सामान्य दायरे में बना रहेगा और बारिश की कोई चेतावनी नहीं है।
राजस्थान के जयपुर में भी दिन का अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रहेगा। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अधिकतम तापमान 34 डिग्री और न्यूनतम पारा 26 डिग्री सेल्सियस के करीब रहने की संभावना है। वहीं हिमाचल प्रदेश के शिमला में अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज हो सकता है। उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी भागों में दिन में गर्माहट और रात के समय सुहावनी ठंडक का अनुभव होगा, क्योंकि मॉनसून की वापसी की रेखा लगातार आगे बढ़ रही है।
मध्य भारत में बादलों का डेरा और तेज हवाएं
मध्य भारत के कई हिस्सों में 22 सितंबर को मानसूनी हलचल सक्रिय रहेगी। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 21 से 27 सितंबर तक बादलों की आवाजाही के बीच छिटपुट वर्षा देखने को मिल सकती है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 21 और 22 सितंबर को हल्की बारिश दर्ज की जा सकती है। महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में 21 सितंबर को छिटपुट पानी गिरा है, जबकि छत्तीसगढ़ में 21 से 27 सितंबर के पूरे सप्ताह व्यापक बारिश का अनुमान व्यक्त किया गया है।
छत्तीसगढ़ और आसपास के इलाकों में तेज हवाओं और बिजली कड़कने के साथ बौछारें पड़ेंगी। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 23 और 24 सितंबर को तथा छत्तीसगढ़ और विदर्भ में 24 सितंबर को तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है। कुछ सीमित स्थानों पर भारी वर्षा का अलर्ट भी जारी किया गया है।
पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश का दौर
पूर्वी भारत के राज्यों में 22 सितंबर से बारिश की गतिविधियों में काफी तीव्रता आएगी। झारखंड, ओडिशा और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 21 से 27 सितंबर तक काफी व्यापक वर्षा का पूर्वानुमान है। लगातार पानी गिरने से स्थानीय स्तर पर जनजीवन प्रभावित हो सकता है।
गंगीय पश्चिम बंगाल में 22 से 27 सितंबर के दौरान लगातार अच्छी मानसूनी बारिश दर्ज होगी, जबकि बिहार में 24 से 27 सितंबर तक बारिश का दौर जोर पकड़ेगा। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के क्षेत्रों में 21 और 22 सितंबर को हल्की और छिटपुट वर्षा संभव है। इन समूचे पूर्वी अंचलों में गरज-चमक, आकाशीय बिजली गिरने और तेज झोंके वाली हवाओं की चेतावनी दी गई है। ओडिशा में विशेष रूप से 23 और 24 सितंबर को आंधी-तूफान (थंडरस्क्वॉल) की प्रबल संभावना जताई गई है।
पूर्वोत्तर भारत की बात करें तो अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 21 से 27 सितंबर के दौरान छिटपुट बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। असम और मेघालय में 23 से 25 सितंबर के बीच मौसम अधिक आक्रामक रहेगा और व्यापक वर्षा के साथ बिजली गिरने और बादलों के गरजने का पूर्वानुमान है।
पश्चिमी और दक्षिणी प्रायद्वीप में मूसलाधार वर्षा और समुद्री चेतावनी
पश्चिमी भारत के तटीय अंचल कोंकण और गोवा में 22 से 24 सितंबर तक काफी व्यापक वर्षा की संभावना है। मध्य महाराष्ट्र में 22 और 23 सितंबर को बारिश का दौर रहेगा, जबकि मराठवाड़ा क्षेत्र में 23 सितंबर को वर्षा दर्ज की जा सकती है। गुजरात राज्य के मैदानी इलाकों तथा सौराष्ट्र-कच्छ में छिटपुट बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चलने के आसार हैं।
दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में 22 सितंबर को बारिश की गतिविधियां सबसे अधिक उग्र रूप में रहेंगी। तटीय कर्नाटक, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक और केरल में 21 से 25 सितंबर तक व्यापक वर्षा होने की प्रबल संभावना है। लक्षद्वीप और तेलंगाना में 21 से 26 सितंबर तक वर्षा का दौर खिंचेगा। दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक में 21 से 24 सितंबर तक तथा तटीय आंध्र प्रदेश में 22 से 25 सितंबर तक भारी से बहुत भारी वर्षा की चेतावनी दी गई है। तटीय आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में 23 से 25 सितंबर के दौरान आंधी-तूफान की आशंका जताई गई है, जहां तेज सतही हवाएं चलेंगी।
समुद्री क्षेत्रों में भी मौसमी उथल-पुथल देखने को मिलेगी। बंगाल की खाड़ी में हवाओं की रफ्तार काफी तेज रहने वाली है। 22 सितंबर को मध्य बंगाल की खाड़ी में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तूफानी हवाएं चलने की चेतावनी है, जबकि आसपास के नजदीकी समुद्री इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। ऐसे में मछुआरों और तटीय निवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।


















