सैन्य साजो-सामान और अत्याधुनिक तकनीक की शक्ति किसी भी मुल्क के लिए तभी सार्थक सिद्ध होती है, जब उसके नागरिकों के भीतर नैतिक मर्यादा और राष्ट्रबोध का गहरा भाव मौजूद हो. नई दिल्ली स्थित राष्ट्र मंदिर विश्व रामायण आश्रम में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 9 अक्टूबर को देश के सांस्कृतिक मूल्यों, समाज की दिशा और राष्ट्रीय सुरक्षा के अंतर्संबंधों पर विस्तार से अपने विचार रखे. उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक हथियारों अथवा कृत्रिम मेधा यानी एआई के विस्तार के साथ-साथ नैतिक मर्यादा और राष्ट्रीय चेतना का होना अत्यंत आवश्यक है.
शौर्य, मर्यादा और पितृपक्ष में बलिदानियों का स्मरण
पितृपक्ष के धार्मिक संदर्भ का उल्लेख करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि तर्पण के समय लोगों को केवल अपने कुल के पूर्वजों को ही नमन नहीं करना चाहिए. समाज का यह पुनीत कर्तव्य बनता है कि वह सरहद और देश की हिफाजत के लिए प्राण न्योछावर करने वाले वीर बलिदानियों का भी समान आदर के साथ स्मरण करे. उन्होंने रेखांकित किया कि जो मुल्क अपनी ऐतिहासिक जड़ों से निरंतर जुड़ा रहता है, उसका पतन कभी नहीं होता. जो कौम अपने अमर शहीदों के त्याग को संजोकर रखती है, वह विकास के पथ पर सदैव आगे बढ़ती रहती है.
रक्षा मंत्री ने शक्ति और संयम के संतुलन को भारत की मूल पहचान बताया. उनका कहना था कि यदि किसी देश के पास उन्नत मिसाइलें हों किंतु आचरण में संयम और मर्यादा का अभाव हो, तो ऐसी सामरिक शक्ति अधूरी रह जाती है. इसी प्रकार यदि राष्ट्र अत्याधुनिक तकनीक और एआई में महारत हासिल कर ले लेकिन नागरिकों में राष्ट्रीय चेतना न जागे, तो उस प्रगति को भी मुकम्मल नहीं माना जा सकता. यही सांस्कृतिक विशेषता और आत्मिक संतुलन भारत के असली सामर्थ्य की बुनियाद है.
सभ्यता के नियम और मन के कलुष का प्रभाव
व्यक्तिगत आचरण और सामाजिक उत्तरदायित्व पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी श्रेष्ठ इंसान की पहचान यह होती है कि वह केवल अपनी संकीर्ण जरूरतों के लिए नहीं जीता. सच्चा बड़प्पन समाज के प्रति जीवन समर्पित करने और दूसरों के सुख-दुख में सहभागी बनने से आता है. उन्होंने प्राचीन धर्मशास्त्रों, पुराणों से लेकर आधुनिक दौर के संविधान और भारतीय न्याय संहिता का उदाहरण दिया. उनका मानना था कि ये सभी ग्रंथ और कानूनी व्यवस्थाएं जनमानस की अंतरात्मा को शुद्ध करने का कार्य करती हैं. ये नियम समाज को उचित और अनुचित का अंतर समझाते हैं, उसे एक सही दिशा दिखाते हैं और सभ्यता के ऊंचे मानकों पर बनाए रखते हैं.
राजनाथ सिंह ने सामाजिक एकजुटता के संदर्भ में कहा कि जब मन में विकृति या कलुष भर जाता है, तभी राष्ट्र विरोधी नारों जैसी प्रवृत्तियां जन्म लेती हैं. इसके विपरीत जब नागरिक चेतना और मानस शुद्ध होता है, तब व्यक्ति देश को ही अपना सर्वस्व मानकर समर्पित हो जाता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि वास्तविक सामर्थ्य केवल दबंगई अथवा ताकत दिखाने में नहीं होता, बल्कि सहनशीलता, व्यापक उदारता और समाज के हर तबके को साथ लेकर चलने की क्षमता में निहित होता है. महान व्यक्तियों की सबसे बड़ी पहचान यही होती है कि वे कठिन से कठिन हालात में भी अपनी सहृदयता का त्याग नहीं करते, भले ही कोई उनके धैर्य की परीक्षा ले रहा हो या उनकी उदारता का अनुचित लाभ उठाने का प्रयास करे.
सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण और आर्थिक प्रगति
देश की आंतरिक क्षमता के विकास पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रयास केवल वैचारिक चेतना तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राष्ट्र को हर मोर्चे पर सुदृढ़ किया जा रहा है. देश की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत आधार पर खड़ी हो रही है, जबकि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र नए प्रतिमान स्थापित कर रहे हैं. इसके समानांतर देश की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने के ठोस कदम उठाए गए हैं.
उन्होंने सांस्कृतिक पुनरोद्धार के प्रमुख कार्यों का उल्लेख करते हुए बताया कि सरकार के प्रयासों से उज्जैन में स्थित बाबा महाकाल के भव्य कॉरिडोर का निर्माण पूरा हुआ. इसके साथ ही दुनिया की प्राचीनतम ज्ञाननगरी काशी में बाबा विश्वनाथ धाम के परिसर का व्यापक कायाकल्प किया गया. अयोध्या में रामलला के मंदिर निर्माण की प्रतीक्षा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि देश के जनमानस में रचे-बसे रामचंद्र जी को अपने ही धाम में स्थान पाने के लिए सदियों का इंतजार करना पड़ा और अनगिनत पीढ़ियां इसी प्रतीक्षा में बीत गईं, किंतु आज अयोध्या में राममंदिर अपनी पूर्ण भव्यता के साथ खड़ा है.
टेरिटोरियल आर्मी के योगदान को नमन
इस संबोधन के साथ ही रक्षा मंत्री ने शुक्रवार को टेरिटोरियल आर्मी के स्थापना दिवस के अवसर पर सेवारत जवानों, पूर्व सैनिकों और उनके परिजनों को बधाई दी. उन्होंने कहा कि टेरिटोरियल आर्मी वास्तव में 'नागरिक भी, सैनिक भी' के अनूठे सिद्धांत का उत्कृष्ट उदाहरण पेश करती है. यह बल आम नागरिकों के उस अटूट संकल्प को दर्शाता है जिसके तहत वे असाधारण निष्ठा के साथ मातृभूमि की रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं.
राजनाथ सिंह ने बताया कि सीमाओं की पहरेदारी से लेकर प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत कार्यों और आधारभूत राष्ट्र निर्माण तक, टेरिटोरियल आर्मी के जवानों ने बहादुरी, समर्पण तथा निस्वार्थ सेवा की शानदार परंपराओं को निभाया है. उन्होंने सुरक्षित, सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में इस बल के अमूल्य योगदान की सराहना करते हुए उनकी निष्ठा को सलाम किया.


















