अमेरिकी प्रशासन द्वारा आठ प्रमुख टेक्नोलॉजी कंपनियों को पीईआरएम (परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन) कार्यक्रम से निलंबित किए जाने के फैसले के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तल्खी बढ़ गई है. भारत ने इस कदम पर बेहद सख्त विरोध दर्ज कराते हुए स्पष्ट किया है कि ऐसी पाबंदियां दोनों देशों की साझा महत्वाकांक्षाओं, साझेदारी और आपसी सहयोग को आगे बढ़ाने में कतई मददगार साबित नहीं होंगी. तकनीकी क्षेत्र के बड़े वैश्विक संस्थानों पर अचानक की गई इस प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर नई दिल्ली ने अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की है.
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया
विवाद का दायरा केवल तकनीकी कंपनियों पर लगी पाबंदियों तक सीमित नहीं रहा. भारत ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस द्वारा भारतीय पेशेवरों को लेकर दिए गए बयानों पर भी बहुत गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है. नई दिल्ली ने इस तरह की टिप्पणियों को बेहद अपमानजनक करार दिया है. साथ ही कड़े शब्दों में संदेश दिया है कि वैश्विक स्तर पर अपनी कार्यकुशलता साबित करने वाले भारतीय हुनर और पेशेवरों के योगदान को लेकर ऐसी भाषा किसी भी रूप में स्वीकार नहीं की जाएगी.
द्विपक्षीय और रणनीतिक रिश्तों के नाजुक मोड़ पर नया तनाव
भारत की तरफ से यह कड़ा राजनयिक रुख ऐसे समय सामने आया है जब दोनों देश तकनीक, व्यापार और रणनीतिक मोर्चे पर अपनी साझेदारी को एक नई ऊंचाई देने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं. जब दोनों पक्ष आपसी सहयोग के विस्तार की रूपरेखा तय कर रहे थे, ठीक उसी वक्त वॉशिंगटन की इस कार्रवाई और अमेरिकी शीर्ष नेतृत्व की असंसदीय भाषा ने द्विपक्षीय संबंधों में एक नई कड़वाहट पैदा कर दी है. इस टकराव ने दोनों देशों के बीच भविष्य के तकनीकी और आर्थिक तालमेल को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.



















