राजधानी दिल्ली में प्रस्तावित 'लहरा दो तिरंगा' मार्च के आयोजन से ठीक पहले प्रशासन ने कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके को उनके एक सहयोगी के घर से हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई के बाद उन्हें निवारक हिरासत (प्रिवेंटिव अरेस्ट) में रखा गया है और उन पर शांति व्यवस्था भंग करने तथा माहौल बिगाड़ने की आशंका से जुड़े आरोप लगाए गए हैं।
वकील ने उठाए सवाल और मांगा जवाब
पार्टी की कानूनी प्रमुख और अधिवक्ता रत्ना सिंह ने इस प्रशासनिक कार्रवाई पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट लिखकर दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। रत्ना सिंह का कहना है कि दिपके को कहां ले जाया गया है, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी उनके वकीलों को नहीं दी गई है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें अज्ञात स्थान पर रखा गया है और उनकी लीगल टीम को अब तक उनसे मिलने की अनुमति भी नहीं मिल सकी है।
अदालत में पेशी और बॉन्ड उल्लंघन का मामला
दिल्ली पुलिस ने इस संबंध में बताया कि हिरासत में लिए जाने के 24 घंटों के भीतर मामले को अदालत के समक्ष लाया जाएगा। निर्धारित योजना के अनुसार, मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन स्थित एसईएम कोर्ट में यह पेशी होनी है। पुलिस का कहना है कि उन पर शांति भंग करने के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसके अतिरिक्त यह बात भी सामने आई है कि दिपके ने पिछली बार रिहाई के दौरान तय किए गए बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन किया है। पूर्व में उन्हें इसी शर्त पर रिहा किया गया था, इसलिए नियमों के उल्लंघन के चलते इस बार उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भी भेजा जा सकता है।
आईसा नेता की रिहाई
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आईसा) की नेता नेहा बोरा को भी शुरू में कार्रवाई के दायरे में लिया गया था। हालांकि बाद में पुलिस ने नेहा बोरा को रिहा कर दिया। पहले पुलिस का विचार दोनों को एक साथ विशेष अदालत में पेश करने का था, लेकिन बाद में प्रक्रियात्मक बदलाव देखने को मिले और उन्हें छोड़ दिया गया।




















