पाकिस्तान के लाहौर शहर में 14 से 15 अक्टूबर की दरमियानी रात एक दर्दनाक और भीषण सड़क हादसा पेश आया, जिसमें कुख्यात आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के ऑपरेशनल कमांडर मुहम्मद आसिम की मौत हो गई। भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने वाले इस आतंकवादी के खात्मे की इस घटना ने सुरक्षा हलकों में खासी चर्चा पैदा कर दी है। इस भयानक हादसे में केवल मुहम्मद आसिम की ही जान नहीं गई, बल्कि उसकी पत्नी हुमा आसिम और उनके बेटे तल्हा आसिम की भी मौके पर ही मौत हो गई। एक तेज रफ्तार ट्रेलर और परिवार की कार के बीच हुई इस भिड़ंत ने एक ही झटके में पूरे परिवार को तबाह कर दिया। टक्कर इतनी जबर्दस्त थी कि कार पूरी तरह से क्षतिग्रस्त होकर उस भारी-भरकम वाहन के नीचे जा घुसी, जिससे बचाव दलों को भी राहत कार्य में भारी मशक्कत का सामना करना पड़ा।
लाहौर के गढ़ी शहू इलाके में पेश आया हादसा
यह दुर्घटना लाहौर के गढ़ी शहू इलाके के अंतर्गत आने वाली अल्लामा इकबाल रोड पर हुई। जब पीड़ित परिवार अपनी कार से किसी काम से जा रहा था, तभी पीछे से आ रहे एक अनियंत्रित ट्रेलर ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भयंकर थी कि कार बुरी तरह से ट्रेलर के पिछले हिस्से के नीचे फंस गई और अंदर बैठे लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्थानीय प्रशासन और बचाव कर्मियों को गैस कटर या अन्य उपकरणों की मदद से कार के मलबे को काटना पड़ा, तब जाकर तीनों शवों को बाहर निकाला जा सका। इस पूरी दुर्घटना में परिवार का एक बेटा मुहम्मद बिन आसिम चमत्कारिक रूप से जीवित बचने में सफल रहा, जिसने बाद में पुलिस थाने में इस दुर्घटना की औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
लापरवाही और तेज रफ्तार पर पुलिस की कार्रवाई
जीवित बचे बेटे मुहम्मद बिन आसिम की ओर से दी गई शिकायत के आधार पर स्थानीय पुलिस ने तुरंत प्रभाव से मामला दर्ज कर लिया है और कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। दर्ज की गई एफआईआर के मुताबिक, जिस समय यह टक्कर हुई, उस वक्त ट्रेलर का चालक वाहन को अत्यधिक लापरवाही और असावधानी पूर्वक तेज रफ्तार में चला रहा था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे इस मामले के हर पहलू की गहराई से जांच कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह महज एक सड़क दुर्घटना थी या इसके पीछे कोई और वजह थी। फरार या आरोपी चालक की तलाश और दुर्घटना से जुड़े अन्य तकनीकी पहलुओं की पड़ताल अभी जारी है ताकि अदालत में पुख्ता सबूत पेश किए जा सकें।
आतंकी गतिविधियों में मुहम्मद आसिम की भूमिका
मारे गए मुहम्मद आसिम की पहचान पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के ऑपरेशनल कमांडर के तौर पर की गई है। उसका मुख्य काम इस संगठन के विभिन्न सदस्यों और ऑपरेशनों के लिए वित्तीय सहायता जुटाना, धन का प्रबंधन करना और साजो-सामान संबंधी लॉजिस्टिक्स को संभालना था। आतंकवादी संगठनों के सुचारू संचालन और भारत के खिलाफ नापाक मंसूबों को अमलीजामा पहनाने के लिए इस तरह की आर्थिक फंडिंग और साजो-सामान की रीढ़ बेहद अहम मानी जाती है। आसिम इसी मनी मैनेजमेंट और रिसोर्स प्लानिंग के जरिए भारत विरोधी साजिशों के पहिए को घुमाने में मदद कर रहा था, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की नजरों में वह लंबे समय से एक अहम मोहरा बना हुआ था।
जैश-ए-मोहम्मद का खौफनाक इतिहास
जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना साल 2000 में मसूद अजहर द्वारा की गई थी और यह पूरी तरह से पाकिस्तान की जमीन से संचालित होने वाला एक खूंखार आतंकी संगठन है। भारत के खिलाफ इसके शत्रुतापूर्ण रवैये के कारण अमेरिका सहित दुनिया के कई प्रमुख देशों ने इसे आधिकारिक तौर पर एक आतंकवादी संगठन घोषित कर रखा है। इस संगठन का नाम भारत की धरती पर, विशेष तौर पर जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में हुए कई बड़े और दहला देने वाले हमलों से जुड़ा रहा है। फरवरी 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए उस कुख्यात आत्मघाती हमले की जिम्मेदारी इसी जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। उस भीषण हमले में केंद्रीय रिजर्व सुरक्षा बल यानी सीआरपीएफ के 40 वीर जवान शहीद हो गए थे, जिसके बाद भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोनों पड़ोसी देशों के बीच कूटनीतिक और सैन्य तनाव अत्यधिक बढ़ गया था।


















