अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में मजबूती दर्ज की गई है। मजबूत अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के बावजूद अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड, अमेरिकी डॉलर और ब्रेंट क्रूड की कीमतों में आई नरमी ने सोने को निचली सतह से संभलने का मौका दिया है। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि पीली धातु की आगे की मजबूती इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिकी रियल यील्ड में जारी राहत कितनी टिकाऊ साबित होती है। इस समय बाजार में सोने की चाल सीधे तौर पर आर्थिक आंकड़ों के बजाय उन आंकड़ों पर बॉन्ड मार्केट की प्रतिक्रिया से तय हो रही है।
बॉन्ड यील्ड और डॉलर में नरमी का मिला सहारा
अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट के चलते बहुमूल्य धातुओं में खरीदारी का नया दौर शुरू हुआ है। 17 अक्टूबर 2026 के ताजा कारोबारी आंकड़ों के अनुसार, सोने का भाव 0.40 प्रतिशत की बढ़त के साथ 4,187 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि पिछला बंद स्तर 4,170 डॉलर प्रति औंस था। हालांकि, यह बढ़त अभी भी पिछले दो हफ्तों के सीमित दायरे के भीतर ही बनी हुई है। यदि लंबी अवधि की बॉन्ड यील्ड और डॉलर में कमजोरी का यह सिलसिला आगे भी जारी रहता है, तो सोने की कीमतों को अतिरिक्त आधार मिल सकता है।
बाजार के भीतर अभी भी अंतर्निहित महंगाई का दबाव काफी ऊंचा बना हुआ है। हाल के दिनों में सरकारी बॉन्ड की यील्ड में आई यह गिरावट बुनियादी तौर पर सुधरती महंगाई की वजह से नहीं, बल्कि मुख्य रूप से जोखिम से बचने की भावना यानी रिस्क अवर्जन के कारण देखी गई है। यही वजह है कि विश्लेषक मौजूदा तेजी को लेकर बहुत अधिक आक्रामक होने के बजाय सतर्कता भरा सकारात्मक नजरिया बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं।
केविन वॉर्श के बयानों से डॉलर पर बढ़ा दबाव
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY), जो प्रमुख वैश्विक मुद्राओं की एक टोकरी के मुकाबले ग्रीनबैक की निगरानी करता है, फिसलकर लगभग दो सप्ताह के निचले स्तर पर आ गया। वाशिंगटन में आयोजित आईएमएफ और विश्व बैंक समूह की वार्षिक बैठकों के दौरान फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श की टिप्पणियों ने ब्याज दरों के परिदृश्य में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया। केविन वॉर्श ने अपने संबोधन में यह स्पष्ट किया कि वह मूल्य स्थिरता बनाए रखने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं, लेकिन उन्होंने भविष्य में ब्याज दरों के बदलाव को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया।
फेडरल रिजर्व चेयरमैन की ओर से दरों को सख्त करने के रास्ते पर किसी निश्चित रुख के अभाव ने डॉलर पर बिकवाली का दबाव बढ़ा दिया। इसका सीधा असर अन्य प्रमुख मुद्रा जोड़ियों पर भी देखने को मिला। शुक्रवार के एशियाई कारोबारी सत्र में AUD/USD की जोड़ी गति पकड़ते हुए 0.6950 की ओर उछल गई। वहीं दूसरी तरफ, USD/JPY की जोड़ी नए बिकवाली के दबाव में आ गई और 158.00 का अहम मनोवैज्ञानिक स्तर नीचे की ओर तोड़ दिया। डॉलर की इस व्यापक कमजोरी का सीधा फायदा सर्राफा बाजार को मिला है।
तकनीकी संकेतक और प्रमुख सपोर्ट-रेजिस्टेंस स्तर
तकनीकी मोर्चे पर सोने का दैनिक रुझान किसी एकतरफा दिशा को नहीं दिखा रहा है। हाल ही में रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) में आई बढ़ोतरी अब धीमी पड़ चुकी है। 14-दिवसीय आरएसआई 44 के स्तर पर दर्ज किया गया है, जो यह दर्शाता है कि बाजार फिलहाल दोतरफा दायरे यानी कंसोलिडेशन में बना रह सकता है। 52-सप्ताह के कारोबार में सोने ने 3,901 डॉलर का निचला और 5,586 डॉलर का उच्चतम स्तर देखा है। दैनिक औसत ट्रू रेंज (ATR) 83.75 पर है, जो बाजार में सामान्य दैनिक उतार-चढ़ाव को दर्शाती है।
मूविंग एवरेज के विश्लेषण में, सोने के लिए तत्काल प्रतिरोध स्तर 4,200 डॉलर (21-दिवसीय डीएमए) पर स्थित है। इसके पार जाने पर 4,240 डॉलर (100-दिवसीय डीएमए) और फिर 4,330 डॉलर (50-दिवसीय डीएमए) पर कड़ा प्रतिरोध देखने को मिलेगा। वर्तमान में 20-दिवसीय ईएमए 4,220 डॉलर, 50-दिवसीय ईएमए 4,288 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 4,438 डॉलर पर बना हुआ है, जबकि 50-दिवसीय और 200-दिवसीय एसएमए क्रमशः 4,375 डॉलर और 4,541 डॉलर पर स्थित हैं। नीचे की तरफ, सोने के लिए पहला मजबूत सपोर्ट 4,100 डॉलर और उसके बाद हालिया निचला स्तर 4,060 डॉलर का बना हुआ है, जो बोलिंजर बैंड के निचले दायरे से भी मेल खाता है।
















