घर या बालकनी में लगे पौधों की पत्तियां जब पीली पड़ने लगती हैं या पौधे सूखने लगते हैं, तो इसका मुख्य कारण सिंचाई की कमी या मिट्टी में जरूरी पोषक तत्वों का अभाव हो सकता है। पौधों को तुरंत पोषण देने और उनकी ग्रोथ को बेहतर बनाने के लिए ऑर्गेनिक लिक्विड फर्टिलाइजर एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है। यूट्यूब चैनल गेटमायदिहार्वेस्ट पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, सही तरीके और सही मात्रा में इन प्राकृतिक तरल खादों का इस्तेमाल करके बेजान पौधों में दोबारा हरियाली वापस लाई जा सकती है। रसोई में आसानी से उपलब्ध सामग्री से तैयार ये लिक्विड फर्टिलाइजर पौधों की जड़ों और कोशिकाओं को मजबूत बनाते हैं।
प्याज और लहसुन के छिलकों का पौष्टिक पानी
रसोई में रोजाना इस्तेमाल होने वाले प्याज और लहसुन के छिलके पौधों के लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकते हैं। प्याज और लहसुन के छिलकों को पानी में भिगोकर तैयार किया गया यह तरल एक बेहतरीन ऑर्गेनिक लिक्विड फर्टिलाइजर का काम करता है। इस पानी में नाइट्रोजन, पोटैशियम और सल्फर जैसे अति आवश्यक पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। ये पोषक तत्व पौधों की कोशिकाओं को अंदर से मजबूती प्रदान करते हैं। विशेष रूप से गुड़हल के पौधे में इस लिक्विड फर्टिलाइजर का इस्तेमाल करने पर बेहद शानदार और सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं।
उबले हुए आलू का बचा हुआ पानी
आलू उबालने के बाद अक्सर बचे हुए पानी को बेकार समझकर फेंक दिया जाता है, लेकिन यह पानी पौधों के लिए पोषक तत्वों का खजाना होता है। आलू के इस पानी में पोटैशियम, मैग्नीशियम और फास्फोरस की भरपूर मात्रा होती है, जो पौधों के स्वस्थ विकास और उनकी कोशिकाओं को मजबूत बनाने में मदद करती है। इस तरल खाद का इस्तेमाल हर तरह के इनडोर और आउटडोर प्लांट्स के लिए किया जा सकता है। हालांकि, इसे पौधों में डालते समय एक महत्वपूर्ण सावधानी बरतनी जरूरी है। अगर आलू उबालते वक्त पानी में नमक मिलाया गया था, तो उस पानी का इस्तेमाल पौधों के लिए बिल्कुल भी न करें, क्योंकि नमक पौधों को नुकसान पहुंचा सकता है।
दाल और चावल की धुलाई का पानी
दाल और चावल को पकाने से पहले धोने के बाद निकलने वाले पानी को फेंकने के बजाय पौधों में डालना बेहद फायदेमंद होता है। इस पानी में विटामिन्स, मिनरल्स और स्टार्च प्रचुर मात्रा में मौजूद होते हैं। यह एक पूरी तरह से नेचुरल लिक्विड फर्टिलाइजर है जो पौधों की तेजी से ग्रोथ में मदद करता है। इसके नियमित उपयोग से गमले की मिट्टी की उपजाऊ क्षमता में वृद्धि होती है और मिट्टी का स्वास्थ्य सुधरता है, जिससे पौधे तेजी से नए पत्ते और टहनियां निकालने लगते हैं।
पनीर बनाने के बाद बचा हुआ व्हे
दूध से पनीर बनाने की प्रक्रिया के बाद जो पानी बच जाता है, जिसे तकनीकी भाषा में व्हे कहा जाता है, वह पौधों के लिए एक शक्तिशाली ऑर्गेनिक लिक्विड के रूप में काम करता है। पनीर के इस पानी में प्रोटीन, कैल्शियम और कई तरह के महत्वपूर्ण खनिज तत्व पाए जाते हैं। ये पोषक तत्व पौधों की जड़ों को गहराई से पोषण देते हैं और उन्हें मजबूत बनाते हैं। जड़ों की मजबूती से पौधे मिट्टी से अन्य पोषक तत्वों को बेहतर तरीके से सोख पाते हैं, जिससे पौधा हरा-भरा और स्वस्थ बना रहता है।
केले के छिलके से बना प्राकृतिक फर्टिलाइजर
केले के छिलके का पानी पौधों के लिए सबसे असरदार और प्राकृतिक लिक्विड फर्टिलाइजरों में से एक है। इसमें पोटैशियम, मैग्नीशियम और फास्फोरस उच्च मात्रा में पाए जाते हैं। इसे तैयार करने का तरीका बेहद आसान है। सबसे पहले केले के छिलकों को अच्छी तरह धूप में सुखा लें और फिर उन्हें पीसकर पाउडर बना लें। इस तैयार पाउडर को पानी में अच्छी तरह मिलाकर पौधों में डालें। इससे पौधों को जरूरी पोषण मिलता है और उनकी पत्तियां फिर से चमकदार तथा हरी-भरी हो जाती हैं।



















