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रांची की अम्लीय मिट्टी में जान कैसे डालें? बिरसा यूनिवर्सिटी के मिट्टी विशेषज्ञ ने बताए दो आसान घरेलू नुस्खेDIY
15 जून 2026, 12:56 pm (89 दिन पहले)· 0

रांची की अम्लीय मिट्टी में जान कैसे डालें? बिरसा यूनिवर्सिटी के मिट्टी विशेषज्ञ ने बताए दो आसान घरेलू नुस्खे

बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के मिट्टी विभाग के एचओडी डॉ. डीके साही के मुताबिक रांची की मिट्टी ज्यादातर अम्लीय और कम पीएच वाली है, जिसे संतुलित करने के लिए दो सस्ते देसी तरीके अपनाकर खाद की खपत घटाई और पैदावार बढ़ाई जा सकती है।

झारखंड की राजधानी रांची और इसके आसपास खेती करने वाले किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यहां की मिट्टी का स्वभाव है। बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के सॉयल डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. डीके साही बताते हैं कि इस इलाके की ज्यादातर मिट्टी अम्लीय है और इसका पीएच लेवल काफी नीचे रहता है। यही वजह है कि फसल को मनचाहा पोषण नहीं मिल पाता और इसे संतुलित करने की जरूरत पड़ती है।

समस्या की असली जड़ क्या है

डॉ. साही समझाते हैं कि अम्लीय मिट्टी में फास्फोरस फसल की जड़ों के पास जाकर जमा हो जाता है। नतीजा यह होता है कि पौधा मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों को ठीक से सोख ही नहीं पाता और मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी जस की तस रह जाती है। यानी खाद डालने के बावजूद उसका पूरा फायदा फसल तक नहीं पहुंचता।

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रांची की मिट्टी का पीएच लेवल आमतौर पर 4.5 से 6.8 के बीच रहता है। कई जगहों पर तो यह 3 से 4 के बीच तक गिर जाता है, जो खेती के लिहाज से बेहद कम है। ऐसे में अगर किसान सही तरीका अपनाएं तो मिट्टी की गुणवत्ता में साफ सुधार देखा जा सकता है।

बैक्टीरिया का कमाल

इसका एक कारगर हल है पीएसबी यानी 'फास्फेट घुलनशील बैक्टीरिया'। इसे मिट्टी में मिलाते ही जमा हुआ फास्फोरस तुरंत घुलकर मिट्टी में मिल जाता है। इससे एक साथ दो फायदे होते हैं — मिट्टी की उर्वरक शक्ति बढ़ती है और पीएच लेवल भी संतुलित होने लगता है।

पहला देसी नुस्खा: अंडे और अजीनोमोटो का घोल

डॉ. साही एक बेहद सस्ता घरेलू तरीका बताते हैं। इसके लिए कुछ अंडे लीजिए, उन्हें फोड़कर उसका घोल बना लीजिए और फिर उसमें अजीनोमोटो मिला दीजिए। अब इसमें 2 लीटर पानी डालिए और सबको अच्छी तरह मिला लीजिए। इस मिश्रण को ढक्कन से एकदम टाइट बंद करके 10 से 15 दिन के लिए छोड़ देना है। 15 दिन बाद यह बढ़िया तरीके से तैयार हो जाएगा। तैयार घोल को फसल की जड़ों में डालना है, लेकिन ध्यान रहे — बहुत ज्यादा नहीं, बस थोड़ा-थोड़ा।

दूसरा नुस्खा: किचन वेस्ट से बनी जैविक खाद

दूसरे तरीके में घर के किचन वेस्ट, गोबर खाद और केंचुआ खाद — इन सभी को आपस में मिला लीजिए और कम से कम एक महीने के लिए छोड़ दीजिए, ताकि यह पूरी तरह सड़ जाए। जब मिश्रण अच्छी तरह सड़ जाए तो इसमें फास्फोरस का पाउडर मिलाना है। यह सफेद रंग का पाउडर बाजार में आसानी से मिल जाता है। दोनों को मिलाकर फसल की जड़ों में थोड़ा-थोड़ा करके डाला जा सकता है।

किसान को क्या फायदा मिलेगा

इन दोनों तरीकों से मिट्टी की उर्वरक शक्ति को काफी हद तक बढ़ाया जा सकता है। सबसे बड़ा फायदा यह है कि खाद की जरूरत 20 से 30% तक घट जाती है। इतना ही नहीं, फसल की पैदावार 15 से 20% तक बढ़ी हुई देखने को मिल सकती है। साथ ही फसल में कीड़े लगने की आशंका भी कम हो जाती है। यही वजह है कि डॉ. साही खासतौर पर रांची और आसपास के किसानों को ये उपाय जरूर अपनाने की सलाह देते हैं।

सवाल-जवाब

रांची की मिट्टी की मुख्य समस्या क्या है?
रांची की ज्यादातर मिट्टी अम्लीय है और इसका पीएच लेवल काफी कम रहता है, जिससे फसल पोषक तत्व ठीक से नहीं सोख पाती।
रांची की मिट्टी का पीएच लेवल कितना होता है?
यह आमतौर पर 4.5 से 6.8 के बीच रहता है और कुछ जगहों पर 3 से 4 तक गिर सकता है।
अंडे वाला देसी घोल कैसे बनाते हैं?
कुछ अंडे फोड़कर घोल बनाएं, उसमें अजीनोमोटो और 2 लीटर पानी मिलाएं, ढक्कन टाइट बंद करके 10-15 दिन छोड़ दें और तैयार होने पर जड़ों में थोड़ा-थोड़ा डालें।
इन तरीकों से किसान को कितना फायदा होगा?
खाद की खपत 20 से 30% तक घटती है, फसल की पैदावार 15 से 20% तक बढ़ सकती है और कीड़े लगने की आशंका कम हो जाती है।
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