केंद्र सरकार देश के युवाओं और छात्र समुदाय के साथ अपनी पहुंच को और गहरा करने के उद्देश्य से एक महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय योजना पर काम कर रही है। 'वन डे, वन यूनिवर्सिटी' नाम की इस विशेष पहल के माध्यम से सरकार का प्रयास है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्य प्रतिदिन देश के किसी एक विश्वविद्यालय परिसर में जाकर वहां के विद्यार्थियों से सीधे संवाद करें। यह कार्यक्रम केवल सरकारी योजनाओं, उपलब्धियों और नीतियों का प्रचार करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका मुख्य ध्येय छात्रों के मन में उठ रहे प्रश्नों, उनकी वास्तविक चिंताओं, स्थानीय समस्याओं और नवोन्मेषी सुझावों को सीधे तौर पर सुनना है। केंद्र सरकार के मंत्री परिसरों में मौजूद रहकर देश के ज्वलंत विषयों पर चर्चा करेंगे तथा वर्तमान युवा पीढ़ी के समक्ष आ रही व्यावहारिक चुनौतियों की जमीनी जानकारी एकत्र करेंगे।
रोजगार और परीक्षा प्रणाली जैसे मुद्दों पर होगी सीधी चर्चा
प्रस्तावित योजना की रूपरेखा के अनुसार केंद्रीय मंत्रियों के दौरों के दौरान शैक्षणिक वातावरण, रोजगार के अवसरों, कौशल विकास, राष्ट्र निर्माण तथा वर्तमान परीक्षा प्रणालियों से जुड़े विषयों पर मुख्य रूप से बातचीत होगी। प्रशासनिक व्यवस्था यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि शासन की पहुंच केवल दिल्ली के शास्त्री भवन या विभिन्न मंत्रालयों के बंद कमरों तक ही सीमित न रहे। मंत्रियों को सीधे जमीनी स्तर पर शैक्षणिक परिसरों के माहौल में भेजा जाएगा, जिससे दूरदराज के क्षेत्रों में अध्ययनरत छात्रों को भी सरकार के उच्च प्रतिनिधियों के सामने बिना किसी माध्यम के अपनी बात रखने का अवसर प्राप्त हो सकेगा।
प्रह्लाद जोशी और मनसुख मांडविया को सौंपी गई मुख्य जिम्मेदारी
इस व्यापक अभियान को व्यवस्थित रूप से लागू करने के लिए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी तथा युवा मामले एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया को समन्वय और नियोजन का दायित्व सौंपा गया है। ये दोनों मंत्री देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों, राज्य प्रशासनों तथा अन्य केंद्रीय मंत्रियों के साथ लगातार संपर्क स्थापित कर इस कार्यक्रम की पूरी कार्ययोजना को अंतिम रूप दे रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में भी इस 'वन डे, वन यूनिवर्सिटी' प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा की गई थी, जिसमें मंत्रियों की भूमिका और परिसरों में संवाद के प्रारूप पर विचार-विमर्श हुआ।
नीट विवाद और छात्र असंतोष के बाद बड़ा कदम
सरकार का यह नया कदम हाल के दिनों में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) विवाद और देश भर में परीक्षा संचालन व्यवस्था को लेकर उभरे छात्र असंतोष के बीच सामने आया है। परीक्षा में गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित देश के कई बड़े शहरों में छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन किए थे। बीते 20 जुलाई को दिल्ली में विरोध दर्ज करा रहे प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा काफी गरमाया था और इस विषय पर विपक्षी दलों ने सरकार के रुख की तीखी आलोचना की थी।
पुलिस कार्रवाई और छात्रों की नाराजगी का असर संसद के मानसून सत्र में भी देखने को मिला, जहां विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को लगातार घेरा। इन्हीं घटनाक्रमों के बीच 25 जुलाई को तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था। परीक्षा व्यवस्था को लेकर बने तनावपूर्ण वातावरण के बाद सरकार द्वारा सीधे विश्वविद्यालयों के दरवाजे तक पहुंचने के इस फैसले को छात्र समुदाय के साथ खोए हुए भरोसे को पुनर्स्थापित करने और निरंतर संवाद की राह खोलने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
1300 से अधिक विश्वविद्यालयों तक पहुंचेगा अभियान
यदि यह 'वन डे, वन यूनिवर्सिटी' मॉडल पूर्ण पैमाने पर देश भर में क्रियान्वित किया जाता है तो आने वाले महीनों में केंद्रीय मंत्रियों की दैनिक कैंपस विजिट का एक बड़ा दौर देखने को मिलेगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में भारत में कुल मिलाकर लगभग 1,300 विश्वविद्यालय संचालित हो रहे हैं। इनमें 57 केंद्रीय विश्वविद्यालय और 522 राज्य स्तरीय विश्वविद्यालय शामिल हैं। इसके अतिरिक्त देश में बड़ी संख्या में डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटीज और निजी विश्वविद्यालय भी कार्यरत हैं, जहां लाखों युवा उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इस विशाल दायरे को देखते हुए सरकार का यह संवाद अभियान व्यापक स्तर पर देश के युवाओं को कवर करेगा।



















