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शशि थरूर के सवालों पर संसद में सरकार का जवाब, नेट परीक्षा देने वाले केवल 6 प्रतिशत छात्र ही बनते हैं सहायक प्रोफेसरशिक्षा
21 जुल॰ 2026, 11:40 pm (53 दिन पहले)· 0

शशि थरूर के सवालों पर संसद में सरकार का जवाब, नेट परीक्षा देने वाले केवल 6 प्रतिशत छात्र ही बनते हैं सहायक प्रोफेसर

शिक्षा मंत्रालय ने संसद में बताया है कि नेट परीक्षा देने वाले केवल 6 प्रतिशत छात्र ही सहायक प्राध्यापक पद के लिए योग्य होते हैं और हर साल 11,750 को जेआरएफ मिलता है। इस जवाब पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने नाराजगी जताते हुए कहा कि फेलोशिप की राशि और संख्या बढ़ाने पर सरकार ने कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया है।

हाल ही में संपन्न हुए संसदीय सत्र के दौरान विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) में सफलता दर और शोधार्थियों को मिलने वाली आर्थिक सहायता के मुद्दे पर विस्तृत चर्चा देखने को मिली। केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने संसद में आधिकारिक आंकड़े पेश करते हुए बताया कि इस अहम परीक्षा में बैठने वाले छात्रों का एक बहुत ही छोटा हिस्सा शिक्षण पदों के लिए अपनी जगह बना पाता है। सोमवार को सदन में पेश किए गए एक लिखित उत्तर के अनुसार, देश भर के विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक पद के लिए नेट परीक्षा देने वाले कुल उम्मीदवारों में से महज छह प्रतिशत ही योग्य साबित होते हैं। यह महत्वपूर्ण जानकारी कांग्रेस पार्टी के सांसद शशि थरूर द्वारा पूछे गए कई लिखित सवालों के जवाब में सामने आई है, जिन्होंने फेलोशिप के भविष्य और परीक्षा के आंकड़ों को लेकर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा था।

कांग्रेस सांसद द्वारा उठाए गए मुख्य सवाल

संसद में शशि थरूर ने शोध करने वाले छात्रों की आर्थिक सुरक्षा और उन्हें मिलने वाली सुविधाओं पर केंद्रित कई अहम सवाल खड़े किए। उनकी सबसे प्रमुख मांग यह थी कि सरकार पिछले कुछ वर्षों में नेट परीक्षा पास करने वाले सफल उम्मीदवारों के सटीक आंकड़े सार्वजनिक करे। इसके अलावा, कांग्रेस नेता यह भी जानना चाहते थे कि क्या शिक्षा मंत्रालय के पास जूनियर रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ) की संख्या में इजाफा करने की कोई सक्रिय योजना है। उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि क्या इन अकादमिक अनुदानों से जुड़े मौजूदा पात्रता नियमों में किसी तरह का बदलाव करने पर विचार किया जा रहा है। उनके सवालों का एक बड़ा हिस्सा 'नॉन-नेट फेलोशिप' की रुकी हुई राशि पर केंद्रित था। थरूर ने विशेष रूप से यह जानना चाहा कि क्या मंत्रालय का ध्यान इस तथ्य पर गया है कि इस फेलोशिप के तहत मिलने वाला मासिक वजीफा साल 2006 से 8,000 रुपये पर ही अटका हुआ है, और पिछले कई दशकों में बढ़ती महंगाई के बावजूद इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है।

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शिक्षा मंत्रालय का आधिकारिक स्पष्टीकरण

केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने अपने आधिकारिक जवाब में फेलोशिप देने की मौजूदा व्यवस्था का पूरा खाका पेश किया। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग मुख्य रूप से नेट परीक्षा के परिणामों को ही जूनियर रिसर्च फेलोशिप देने का आधार मानता है। परीक्षा में सफलता के आंकड़ों का जिक्र करते हुए मजूमदार ने स्पष्ट किया कि पास होने वाले छात्रों की संख्या काफी कम है। मंत्री ने अपने जवाब में कहा, 'नेट परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों में से 6 प्रतिशत ही सहायक प्राध्यापक के लिए योग्य होते हैं।' उन्होंने आगे बताया कि इन्हीं गिने-चुने पात्र उम्मीदवारों में से यूजीसी हर साल ठीक 11,750 छात्रों का चयन कर उन्हें प्रतिष्ठित जेआरएफ प्रदान करता है।

शोध कार्यों के लिए मिलने वाली वित्तीय सहायता के बारे में और जानकारी देते हुए मजूमदार ने कहा कि पीएचडी करने वाले छात्रों को केवल यूजीसी से ही मदद नहीं मिलती है। उन्होंने बताया कि सरकार के कई अन्य मंत्रालय और स्वतंत्र संस्थान भी शोधार्थियों को अपनी तरफ से अलग-अलग फेलोशिप देते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में सभी को समान अवसर देने के मकसद से सरकार ने कुछ विशेष वर्गों के लिए भी फेलोशिप कार्यक्रम शुरू किए हैं। इसका लाभ अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्रों को मिलता है। इसके साथ ही, उच्च शिक्षा हासिल कर रहे दिव्यांग छात्रों और परिवार की इकलौती बेटियों के लिए भी विशेष आर्थिक सहायता की व्यवस्था की गई है।

मजूमदार ने यह भी बताया कि पीएचडी के छात्र विश्वविद्यालयों द्वारा मंजूर किए गए और विभिन्न एजेंसियों द्वारा वित्त पोषित शोध प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनकर भी आर्थिक मदद पा सकते हैं। इस बात को स्वीकार करते हुए कि कई छात्र बिना किसी सरकारी मदद के पीएचडी में दाखिला लेते हैं, मंत्री ने नॉन-नेट फेलोशिप की अहमियत समझाई। उन्होंने कहा कि यूजीसी ने यह योजना इसलिए शुरू की थी ताकि जिन छात्रों के पास फंडिंग का कोई दूसरा विकल्प नहीं है, उन्हें अपने शोध कार्य के दौरान कम से कम एक बुनियादी आंशिक आर्थिक सहायता मिल सके।

जवाबों पर असंतोष और सीधे उत्तर न मिलने का आरोप

सरकार द्वारा दिया गया यह लिखित जवाब कांग्रेस सांसद को रास नहीं आया और उन्होंने सार्वजनिक तौर पर अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर की। मंगलवार को एक्स (X) पर एक पोस्ट लिखते हुए थरूर ने मंत्रालय की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार ने उनके विशिष्ट सवालों के सीधे और स्पष्ट जवाब देने के बजाय केवल गोलमोल बातें की हैं। थरूर ने इस बात पर जोर दिया कि मंत्रालय के जवाब में केवल मौजूदा यूजीसी फेलोशिप व्यवस्था की सामान्य जानकारी परोसी गई है, जबकि उन्होंने जो सटीक विवरण मांगा था, वह नदारद है। उनकी सबसे बड़ी शिकायत यह थी कि नेट परीक्षा पास करने वाले और जेआरएफ हासिल करने वाले उम्मीदवारों के वर्षवार आंकड़े सरकार ने बिल्कुल भी साझा नहीं किए।

थरूर ने आगे कहा कि सरकार ने योग्य उम्मीदवारों की बढ़ती संख्या और उपलब्ध फेलोशिप की सीमित संख्या के बीच लगातार बढ़ रही खाई के महत्वपूर्ण मुद्दे को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया है। उन्होंने बताया कि जेआरएफ की सीटें बढ़ाने या पात्रता नियमों में संशोधन करने की मंत्रालय की योजना को लेकर पूछे गए उनके सवालों पर सरकार ने पूरी तरह से चुप्पी साध ली। साल 2006 से 8,000 रुपये पर अटकी हुई नॉन-नेट फेलोशिप का मुद्दा सांसद के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बना रहा। उन्होंने निराशा जताते हुए कहा कि इस राशि को न बढ़ाने के पीछे सरकार ने कोई ठोस कारण नहीं बताया और न ही भविष्य के लिए कोई रूपरेखा पेश की। इस वित्तीय बाधा को दूर करने के अपने पुराने प्रयासों की याद दिलाते हुए, थरूर ने जनता को बताया कि उन्होंने साल 2023 में लोकसभा के शून्यकाल के दौरान भी ठीक यही मुद्दा उठाया था। अंत में उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि सरकार ने जूनियर रिसर्च फेलोशिप कार्यक्रम में सुधार करने या इसे बेहतर बनाने को लेकर अभी तक कोई समयसीमा तय नहीं की है और न ही कोई पक्का आश्वासन दिया है।

सवाल-जवाब

नेट परीक्षा के जरिए कितने प्रतिशत उम्मीदवार सहायक प्राध्यापक के लिए योग्य होते हैं?
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, नेट परीक्षा में शामिल होने वाले केवल 6 प्रतिशत उम्मीदवार ही सहायक प्राध्यापक पद के लिए योग्य माने जाते हैं।
हर साल कितने छात्रों को जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) दी जाती है?
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) नेट परीक्षा के आधार पर हर साल 11,750 पात्र उम्मीदवारों को जूनियर रिसर्च फेलोशिप प्रदान करता है।
शशि थरूर ने सरकार के जवाब पर असंतोष क्यों जताया?
थरूर असंतुष्ट थे क्योंकि सरकार ने वर्षवार आंकड़े देने के बजाय केवल सामान्य जानकारी दी, और यह नहीं बताया कि जेआरएफ की संख्या या 8,000 रुपये की नॉन-नेट फेलोशिप बढ़ाई जाएगी या नहीं।
यूजीसी नॉन-नेट फेलोशिप की राशि में आखिरी बार बदलाव कब हुआ था?
नॉन-नेट फेलोशिप की राशि साल 2006 से प्रति माह 8,000 रुपये पर ही रुकी हुई है और इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।
क्या विशेष वर्गों के लिए अलग से कोई फेलोशिप उपलब्ध है?
हां, सरकार एससी, एसटी, ओबीसी वर्ग के शोधार्थियों के साथ-साथ दिव्यांग छात्रों और एकल बालिकाओं के लिए भी विशेष फेलोशिप प्रदान करती है।
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