उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के अंतर्गत आने वाले काफलीगैर तहसील क्षेत्र में डिग्री कॉलेज निर्माण की मांग को लेकर जन आक्रोश बढ़ता जा रहा है। लंबे समय से चल रही इस मांग पर शासन की ओर से शासनादेश जारी न होने के कारण स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। क्षेत्रवासियों ने स्पष्ट शब्दों में अल्टीमेटम दिया है कि यदि 7 सितंबर 2026 तक काफलीगैर महाविद्यालय की स्थापना संबंधी शासकीय स्वीकृति जारी नहीं की गई, तो वे उग्र धरना-प्रदर्शन और आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। इस संबंध में प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर जल्द से जल्द कार्रवाई की गुहार लगाई गई है।
30 से 40 किलोमीटर दूर जाने को मजबूर छात्र
काफलीगैर तहसील क्षेत्र के तहत लगभग 13 से 14 ग्राम पंचायतें आती हैं, जहां बड़ी संख्या में युवा आबादी निवास करती है। इन ग्रामीण इलाकों के अधिकांश छात्र-छात्राएं 12वीं तक की पढ़ाई तो स्थानीय स्तर पर उपलब्ध विद्यालयों से पूरी कर लेते हैं, लेकिन इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए उनके सामने गंभीर संकट खड़ा हो जाता है। क्षेत्र में एक भी डिग्री कॉलेज न होने की वजह से विद्यार्थियों को स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर की कक्षाओं के लिए बागेश्वर या अल्मोड़ा का रुख करना पड़ता है। काफलीगैर से बागेश्वर की दूरी लगभग 30 किलोमीटर है, जबकि अल्मोड़ा करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित है। रोजाना 30 से 40 किलोमीटर की कठिन पहाड़ी यात्रा तय करना छात्रों के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद कष्टदायक साबित हो रहा है।
आर्थिक तंगी से छूट रही ग्रामीण बेटियों की पढ़ाई
पहाड़ी क्षेत्र की विषम परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के कारण कई परिवारों की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। गरीब परिवारों के लिए बच्चों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने हेतु बागेश्वर या अल्मोड़ा भेजना काफी खर्चीला साबित होता है। दूसरे शहरों में कमरा किराए पर लेने, भोजन की व्यवस्था करने और प्रतिदिन आने-जाने का परिवहन खर्च उठाना सामान्य परिवारों के बस के बाहर हो जाता है। इसका सबसे बुरा असर ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों पर पड़ रहा है। आर्थिक मजबूरी के चलते कई अभिभावक अपनी बेटियों को 12वीं के बाद आगे पढ़ाने में असमर्थ हो जाते हैं, जिससे होनहार छात्राओं को बीच में ही अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ती है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि अगर गांव के पास ही डिग्री कॉलेज खुल जाता है, तो बेटियों को घर पर रहकर पढ़ाई जारी रखने का अवसर मिलेगा।
भूमि दान के बाद भी अटका शासनादेश
डिग्री कॉलेज के निर्माण में प्रशासनिक देरी को लेकर क्षेत्रीय जनता में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। ज्येष्ठ प्रमुख मनीष कुमार का कहना है कि प्रस्तावित महाविद्यालय की स्थापना के लिए स्थानीय भूमि दाताओं ने अनुकरणीय पहल करते हुए अपनी कीमती भूमि की विधिवत रजिस्ट्री महाविद्यालय के नाम कर दी है। इसके बावजूद शासन स्तर से औपचारिक शासनादेश जारी करने में अनपेक्षित देरी की जा रही है। पूर्व में भी शासन और प्रशासन की ओर से कई बार समय सीमा तय की गई थी और आश्वासन दिए गए थे, लेकिन तय सीमा बीत जाने के बाद भी कागजी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है। इससे युवाओं और ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब देने लगा है।
7 सितंबर की समय सीमा और प्रशासनिक आश्वासन
सामाजिक कार्यकर्ता ठाकुर सिंह ने बताया कि काफलीगैर में महाविद्यालय की मांग क्षेत्र के उज्ज्वल भविष्य और युवाओं के अधिकारों से जुड़ी है। क्षेत्रीय लोगों ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है ताकि शासन स्तर से आवश्यक स्वीकृतियां जल्द मिल सकें। ज्ञापन के जरिए चेतावनी दी गई है कि 7 सितंबर 2026 तक यदि मांग पूरी नहीं हुई तो व्यापक स्तर पर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया जाएगा। वहीं, इस पूरे मामले पर जिलाधिकारी अपूर्वा पांडे ने आश्वासन दिया है कि ग्रामीणों की समस्या के समाधान के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे और डिग्री कॉलेज की स्थापना को लेकर शासन के साथ वार्ता की जाएगी।



















