विदेश में मेडिकल की पढ़ाई का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए केंद्र सरकार ने एक अहम चेतावनी जारी की है। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रेस वार्ता के दौरान उज्बेकिस्तान में पढ़ रहे भारतीय विद्यार्थियों की स्थिति और उनके सामने आ रही चुनौतियों पर विस्तार से बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत सरकार उज्बेकिस्तान के संबंधित प्राधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क बनाए हुए है, ताकि वहां नामांकित छात्रों को मानक और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा मिल सके।
फर्जी एजेंटों और बिचौलियों के जाल से सावधान रहने की हिदायत
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर पहलू अनधिकृत एजेंटों और धोखेबाज तत्वों की बढ़ती सक्रियता को लेकर सामने आया है। भोले-भाले विद्यार्थियों को सुनहरे भविष्य का झांसा देकर फंसाने वाले इन बिचौलियों पर नकेल कसने के लिए कदम उठाए गए हैं। ताशकंद स्थित भारतीय दूतावास और राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) ने मिलकर एक बेहद सख्त एडवाइजरी जारी की है, जिसमें छात्रों को पूरी तरह सतर्क रहने को कहा गया है।
एनएमसी नियमों का पालन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना लक्ष्य
सरकार का प्राथमिक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी छात्र के साथ मेडिकल डिग्री के नाम पर कोई धोखाधड़ी न हो। विदेश में अध्ययनरत भारतीय विद्यार्थियों को उचित क्लीनिकल ट्रेनिंग और मानक शिक्षा मिले, ताकि अपनी पढ़ाई पूरी करके स्वदेश लौटने पर उन्हें एनएमसी के अनिवार्य नियमों और पात्रता मानकों को पूरा करने में किसी प्रकार की कानूनी या अकादमिक बाधा का सामना न करना पड़े। मेडिकल की पढ़ाई के लिए उज्बेकिस्तान जाने का मन बना रहे किसी भी उम्मीदवार के लिए अब आधिकारिक एडवाइजरी की पड़ताल करना अनिवार्य कदम बन चुका है।



















