फिल्म आदिपुरुष के संवाद लेखक मनोज मुंतशिर ने आखिरकार इस विवादित प्रोजेक्ट पर अपने काम को लेकर गहरा पछतावा और दुख व्यक्त किया है। फिल्म की रिलीज के बाद देश भर में भड़के भारी गुस्से के तीन साल बाद, मुंतशिर ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि इस ऐतिहासिक फिल्म के लिए कुछ संवाद लिखना उनके जीवन की एक बहुत बड़ी भूल थी। लेखक को फिल्म में इस्तेमाल की गई अनौपचारिक और बोलचाल की भाषा के लिए लगातार आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था, जिसमें कपड़े और तेल से जुड़े एक खास संवाद ने दर्शकों की भावनाओं को सबसे ज्यादा आहत किया था।
गलती की सार्वजनिक स्वीकारोक्ति
टाइम्स नाऊ को दिए एक साक्षात्कार में मनोज मुंतशिर ने इस पूरे विवाद पर खुलकर बात की और अपना गहरा खेद प्रकट किया। उन्होंने माना कि जब शुरुआत में यह विवाद शुरू हुआ, तो वह जनता के गुस्से की गंभीरता को भांप नहीं पाए थे और उन्होंने इस मामले को बहुत हल्के में लिया था। लेकिन लगभग दो दिनों के बाद उन्हें यह अहसास हुआ कि स्थिति कितनी गंभीर हो चुकी है और लोगों की भावनाएं कितनी गहराई से आहत हुई हैं। मुंतशिर ने स्वीकार किया, "आदिपुरुष मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती थी।" उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म की रिलीज के बाद अपने काम का बचाव करने की कोशिश करना उनसे हुई एक और बड़ी भूल थी। इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी गहरी शर्मिंदगी व्यक्त करते हुए लेखक ने पूरे देश की जनता से हाथ जोड़कर क्षमा मांगी।
संवादों पर उठा था भारी विवाद
निर्देशक ओम राउत के निर्देशन में बनी यह बड़े बजट की फिल्म जून 2023 में सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई थी। यद्यपि फिल्म की कहानी महान भारतीय पौराणिक महाकाव्य रामायण से प्रेरित थी, लेकिन रिलीज होते ही इसे देशव्यापी विरोध का सामना करना पड़ा। दर्शकों ने फिल्म में पूजनीय पात्रों के चित्रण पर गंभीर सवाल उठाए, विशेष रूप से भगवान हनुमान और रावण के रूप-रंग और प्रस्तुतीकरण की तीखी आलोचना की गई। समीक्षकों और दर्शकों का आरोप था कि निर्माताओं ने इस ऐतिहासिक गाथा के तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया है।
सोशल मीडिया पर फिल्म के संवादों को लेकर जबरदस्त गुस्सा देखा गया, जहां 'कपड़ा तेरे बाप का...' जैसे संवादों की जमकर भर्त्सना की गई। हालांकि विवाद को बढ़ता देख निर्माताओं ने बाद में कुछ संवादों को बदल भी दिया था, लेकिन इसके बावजूद लोगों का गुस्सा शांत नहीं हुआ और फिल्म को लेकर विवाद लंबे समय तक बना रहा।
कानूनी कार्रवाई और कलाकारों की प्रतिक्रिया
इस विवाद की गूंज देश की सबसे बड़ी अदालत तक भी सुनाई दी। सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर मांग की गई थी कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) द्वारा फिल्म आदिपुरुष को दिए गए सेंसर सर्टिफिकेट को रद्द कर दिया जाए। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और इस याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया।
इस बीच, फिल्म के मुख्य कलाकारों ने भी समय-समय पर इस विवाद पर अपनी राय साझा की। फिल्म में प्रभास और सैफ अली खान के साथ माता सीता की भूमिका निभाने वाली अभिनेत्री कृति सेनन ने पहले इस विवाद पर दुख जताया था। उन्होंने कहा था कि जब किसी फिल्म को इस स्तर पर आलोचना का सामना करना पड़ता है, तो उससे जुड़े कलाकारों को मानसिक रूप से बहुत ठेस पहुंचती है। कृति ने स्पष्ट किया कि किसी की आस्था या भावनाओं को ठेस पहुंचाना कभी भी फिल्म बनाने का उद्देश्य नहीं होता और ऐसे कठिन अनुभवों से भविष्य के लिए सीख लेना आवश्यक है।


















