शनि-राहु की करीबी दोस्ती से 31 दिसंबर तक इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मतभीलवाड़ा में सरसों बोने से पहले किसान इन नई किस्मों की जानकारी जरूर लेंउत्तराखंड के नैनीताल में दूषित पानी से फैला पीलिया और टाइफाइड, अस्पतालों में बढ़े मरीज और बोतलबंद पानी की मांगवृषभ, कर्क समेत 4 राशियों पर वक्री शनि मेहरबान, दिसंबर तक मिलेगा तगड़ा फायदादिल्ली विधानसभा अध्यक्ष के ईमेल पर बम की धमकी से मचा हड़कंप, पुलिस जांच जारीमस्जिद, इमामबाड़ा और 16 कुएं: सुल्तानपुर के कस्बा इलाके में छिपी है साढ़े आठ सौ साल पुरानी विरासतपीएफआरडीए अब एनपीएस में तय पेंशन देने पर कर रहा विचार, कर्मचारियों की पुरानी शिकायत हो सकती है दूरजयपुर नगर निगम चुनाव के दूसरे चरण से पहले वार्ड 69 में बीसलपुर पानी और बुनियादी सुविधाओं पर जनता का कड़ा रुखस्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आर्थिक रूप से मजबूत हो रहीं नैनीताल की महिलाएंजमशेदपुर की दांगी मार्डी बनीं राजस्थान लीग की टॉप स्कोरर, दैनिक मजदूर की बेटी अब भारतीय फुटबॉल टीम पर साधे नजर
जयपुर नगर निगम चुनाव के दूसरे चरण से पहले वार्ड 69 में बीसलपुर पानी और बुनियादी सुविधाओं पर जनता का कड़ा रुखराजस्थान
8 सित॰ 2026, 2:18 pm (1 घंटे पहले)· 2

जयपुर नगर निगम चुनाव के दूसरे चरण से पहले वार्ड 69 में बीसलपुर पानी और बुनियादी सुविधाओं पर जनता का कड़ा रुख

राजस्थान में नगर निगम चुनाव के तहत 9 और 11 सितंबर को मतदान होना है। जयपुर के वार्ड 69 में बीसलपुर पानी, खराब सीवर, टूटी गलियों और नियमन जैसे ज्वलंत मुद्दों को लेकर स्थानीय मतदाता प्रत्याशियों से सीधे सवाल पूछ रहे हैं।

राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनाव का प्रचार अभियान अपने चरम पर पहुंच गया है। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में मतदान की प्रक्रिया दो अलग-अलग चरणों में आयोजित की जा रही है। पहले चरण के अंतर्गत 9 सितंबर को वोट डाले जाएंगे, जबकि राज्य की राजधानी जयपुर में दूसरे चरण के तहत 11 सितंबर को मतदान प्रक्रिया संपन्न होगी। चुनाव की तारीखें नजदीक आते ही प्रत्याशियों ने घर-घर जाकर जनसंपर्क तेज कर दिया है। हालांकि, जयपुर के वार्ड 69 में चुनावी फिजा बाकी इलाकों से काफी अलग नजर आ रही है। यहां मतदाता केवल राजनीतिक दलों के भाषणों और लोक-लुभावन घोषणाओं को सुनने तक सीमित नहीं हैं। इसके विपरीत, स्थानीय नागरिक पिछले पांच सालों के कामकाज का हिसाब-किताब मांगते हुए नेताओं के सामने नागरिक समस्याओं की लंबी फेहरिस्त रख रहे हैं। स्वच्छ पेयजल, जलनिकासी, पक्की सड़कें, सीवरेज व्यवस्था, सरकारी स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं, मकानों के पट्टे और आवारा पशुओं से सुरक्षा जैसे बुनियादी मुद्दे इस बार चुनाव का सबसे मुख्य एजेंडा बन चुके हैं।

परिसीमन के बाद नया वार्ड 69 और पुरानी नागरिक समस्याएं

स्थानीय नागरिकों के अनुसार, पांच वर्ष पूर्व हुए चुनावों में भी इन्हीं बुनियादी सुविधाओं को जल्द से जल्द दुरुस्त करने के बड़े-बड़े दावे किए गए थे। हालांकि, धरातल पर स्थितियां आज भी जस की तस बनी हुई हैं। जयपुर के आगरा रोड से सटे विजयनगर, जयंती नगर और रानी सती नगर जैसे घनी आबादी वाले रिहायशी इलाके पिछले परिसीमन के दौरान पुनर्गठित होकर वार्ड 69 का हिस्सा बने हैं। इससे पहले यह पूरा क्षेत्र वार्ड 123 के अंतर्गत आता था। स्थानीय लोगों का स्पष्ट कहना है कि परिसीमन की वजह से वार्ड का नंबर और भौगोलिक दायरा तो बदल गया, लेकिन नागरिक सुविधाओं की बदहाली में कोई खास सुधार नहीं आया। यही वजह है कि इस बार मतदाता केवल मौखिक आश्वासनों से संतुष्ट होने के मूड में नहीं हैं। वे चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशियों से ठोस समयसीमा और स्पष्ट कार्ययोजना की मांग कर रहे हैं कि जीतने के बाद इन लंबे समय से अटकी समस्याओं को कब और किस तरह हल किया जाएगा।

ये भी पढ़ें

पेयजल का गहरा संकट और टैंकरों पर भारी निर्भरता

वार्ड 69 में रहने वाले परिवारों के लिए पीने का पानी सबसे गंभीर और संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। इलाके के बाशिंदों ने बताया कि पिछले निकाय चुनाव के दौरान सभी घरों तक बीसलपुर परियोजना से मीठा पेयजल पहुंचाने की गारंटी दी गई थी। हालांकि, पांच साल बीत जाने के बावजूद कई इलाकों और कॉलोनियों में नियमित जलापूर्ति की पाइपलाइन तक नहीं बिछाई जा सकी है। नतीजतन, सैकड़ों परिवारों को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए निजी पानी के टैंकरों पर पूरी तरह निर्भर रहना पड़ रहा है। इलाके में एक पानी का टैंकर मंगवाने के लिए लोगों को 500 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक की भारी-भरकम राशि चुकानी पड़ती है। सीमित आय वाले मध्यमवर्गीय और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए पानी पर होने वाला यह अतिरिक्त खर्च उनके महीने के बजट को बुरी तरह बिगाड़ देता है। इसके अलावा, जिन स्थानों पर भूजल का उपयोग किया जा रहा है, वहां पानी में फ्लोराइड की मात्रा अत्यधिक होने के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। पानी की यह गंभीर किल्लत अब केवल एक असुविधा नहीं, बल्कि स्थानीय निवासियों के दैनिक जीवन और सेहत से जुड़ा एक बड़ा संकट बन गई है।

बदहाल निकासी, दूषित पानी का जमाव और सीवरेज की कमी

पेयजल संकट के साथ-साथ इलाके में गंदे पानी का भराव और जलनिकासी की उचित व्यवस्था न होना भी लोगों के गुस्से की बड़ी वजह है। मुख्य मार्गों और मोहल्लों की गलियों में नाले-नालियों के सही रखरखाव के अभाव में जगह-जगह दूषित जल का ठहराव बना रहता है। मानसून के दौरान बारिश होने पर स्थितियां और भी ज्यादा विकराल रूप ले लेती हैं। जलभराव के कारण मुख्य रास्तों पर भारी कीचड़ और गंदगी जमा हो जाती है, जिससे रोजाना स्कूल जाने वाले छोटे-छोटे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। गंदे पानी के लंबे समय तक एक जगह ठहरे रहने से क्षेत्र में मच्छरों का प्रकोप अत्यधिक बढ़ गया है, जिससे डेंगू और मलेरिया जैसी संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा लगातार बना रहता है। निवासियों का कहना है कि जयपुर को स्मार्ट और विकसित शहर के रूप में प्रचारित किया जाता है, लेकिन उनके वार्ड में बुनियादी नागरिक सुविधाओं का ऐसा अभाव प्रशासनिक अनदेखी को उजागर करता है।

इसके साथ ही वार्ड में एक सुदृढ़ और व्यापक सीवरेज नेटवर्क का निर्माण भी लंबे समय से पेंडिंग पड़ा हुआ है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, सीवर लाइन बिछाने को लेकर कई बार योजना और परियोजना की चर्चाएं तो हुईं, लेकिन धरातल पर किसी ठोस परियोजना का क्रियान्वयन नहीं हो सका। सीवरेज की उचित व्यवस्था न होने के कारण घरों का गंदा पानी सड़कों पर बहता है, जिससे स्वच्छता अभियान के सभी दावे हवा में उड़ते दिखाई देते हैं। इस बार के चुनाव में मतदाता प्रत्याशियों के सामने सीवरेज लाइन बिछाने की स्पष्ट योजना प्रस्तुत करने की मांग मजबूती से रख रहे हैं।

मुख्य मार्गों की चकाचौंध के बीच अंदरूनी गलियों की अनदेखी

सड़क अवसंरचना को लेकर भी क्षेत्र की जनता में गहरा असंतोष व्याप्त है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम द्वारा केवल मुख्य मार्ग या प्रमुख चौराहों पर पैचवर्क और डामरीकरण का काम करके विकास का दिखावा कर दिया जाता है। इसके विपरीत, रिहायशी कॉलोनियों के अंदर स्थित गलियों की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जाता। कई अंदरूनी गलियों में सड़कें पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं और बड़े-बड़े गड्ढे हादसों को न्योता दे रहे हैं। मोहल्लेवासियों का मानना है कि वास्तविक विकास तभी माना जाएगा जब इसका लाभ उन संकरी गलियों तक पहुंचे, जहां आम नागरिक रोज पैदल और वाहनों से आवागमन करते हैं।

जनसंख्या वृद्धि के बीच शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का अकाल

वार्ड 69 में बुनियादी सुविधाओं के अभाव के साथ-साथ सामाजिक अवसंरचना की कमी भी एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनी हुई है। क्षेत्र की आबादी में पिछले वर्षों के दौरान तेजी से वृद्धि हुई है, लेकिन उस अनुपात में सार्वजनिक सुविधाओं का विस्तार नहीं हो पाया। स्थानीय नागरिकों की लंबे समय से मांग है कि क्षेत्र में एक नया सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय खोला जाए ताकि गरीब परिवारों के बच्चों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। इसके अलावा, छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं के पोषण तथा देखभाल के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों की संख्या बढ़ाना बेहद जरूरी है। स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर इलाके में प्राथमिक उपचार केंद्र या अर्बन प्राइमरी हेल्थ सेंटर की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है। वर्तमान में सामान्य इलाज के लिए भी लोगों को काफी दूर स्थित अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।

मकानों के नियमन और स्थायी पट्टों का अनसुलझा मुद्दा

आवास सुरक्षा के दृष्टिकोण से वार्ड के निवासियों के लिए मकानों का नियमन और स्थायी पट्टे प्राप्त करना प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर है। आगरा रोड से सटी कई कॉलोनियों के बाशिंदे वर्षों से अपने निर्मित मकानों के वैधानिक पट्टे हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर पट्टा वितरण शिविर लगाने के दावे किए गए, लेकिन कागजी जटिलताओं और प्रशासनिक ढिलाई के चलते एक बड़ी आबादी आज भी अपने ही घरों के कानूनी पट्टों से वंचित है। इस कारण लोगों को न तो अपने मकानों पर बैंक लोन मिल पाता है और न ही वे बिना किसी कानूनी डर के पुनर्निर्माण करा पाते हैं। इस चुनाव में मतदाता उम्मीदवारों से लिखित या स्पष्ट आश्वासन मांग रहे हैं कि बोर्ड बनने के बाद उनके पट्टों की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाएगा।

पार्क की जगह बना साप्ताहिक बाजार, खेल सुविधाओं का अभाव

वार्ड में बच्चों के खेलकूद और बुजुर्गों के टहलने के लिए आरक्षित सार्वजनिक स्थानों की दुर्दशा ने भी निवासियों को निराश किया है। पिछले चुनाव के समय जिस भूखंड को आधुनिक खेल मैदान और हरित पार्क के रूप में विकसित करने का वादा किया गया था, वहां केवल एक चारदीवारी बनाकर छोड़ दिया गया। पार्क के भीतर न तो हरियाली विकसित की गई और न ही बच्चों के लिए झूले अथवा वाकिंग ट्रैक बनाए गए। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अब इस सुरक्षित जगह का उपयोग साप्ताहिक हाट-बाजार और अन्य वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। खेल मैदान न होने के कारण युवाओं को सड़कों या खुली जगहों पर खेलने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

आवारा कुत्तों का आतंक और नशे की बढ़ती लत से सुरक्षा की चिंता

वार्ड के विभिन्न मोहल्लों में आवारा और आक्रामक कुत्तों का बढ़ता जमावड़ा भी आम जनजीवन को प्रभावित कर रहा है। सुबह और देर शाम के समय बच्चों तथा बुजुर्गों का घर से बाहर निकलना असुरक्षित हो गया है। कई बार आक्रामक कुत्तों के हमलों में स्थानीय निवासी घायल भी हो चुके हैं, लेकिन नगर निगम के पशु प्रबंधन दस्ते द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसके साथ ही, इलाके के सुनसान कोनों और पार्कों की चारदीवारी के आसपास नशेड़ियों का जमावड़ा रहने से सामाजिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि वार्ड में स्ट्रीट लाइटें दुरुस्त की जाएं, पुलिस गश्त बढ़ाई जाए और नशे के अवैध कारोबार पर सख्त नकेल कसी जाए ताकि महिलाएं और बच्चे बिना किसी खौफ के आ-जा सकें। इन तमाम जलते सवालों के बीच, 11 सितंबर को होने वाला मतदान यह तय करेगा कि वार्ड 69 की जनता किस प्रत्याशी के दावों और कार्ययोजना पर अपना विश्वास जताती है।

सवाल-जवाब

जयपुर नगर निगम चुनाव में मतदान कब होगा?
जयपुर में निकाय चुनाव के दूसरे चरण के तहत 11 सितंबर को मतदान आयोजित किया जाएगा, जबकि पहले चरण का मतदान 9 सितंबर को होगा।
जयपुर का वार्ड 69 किन इलाकों से मिलकर बना है?
परिसीमन के बाद आगरा रोड स्थित विजयनगर, जयंती नगर और रानी सती नगर जैसे रिहायशी इलाके वार्ड 69 में शामिल हुए हैं, जो पहले वार्ड 123 का हिस्सा थे।
वार्ड 69 के लोग बीसलपुर पानी योजना को लेकर क्यों परेशान हैं?
पांच साल पहले बीसलपुर से पेयजल लाइन बिछाने का वादा किया गया था, लेकिन कई कॉलोनियों में काम न होने से लोगों को 500 से 1000 रुपये में पानी का टैंकर खरीदना पड़ता है।
इलाके में सीवर और जलभराव की क्या स्थिति है?
क्षेत्र में सीवर लाइन न होने से गंदा पानी सड़कों पर जमा होता है, जिससे बारिश के समय जलभराव और मच्छरों का प्रकोप बढ़ता है।
वार्ड 69 में सार्वजनिक पार्क की क्या समस्या है?
पार्क के लिए तय जमीन पर केवल चारदीवारी बनाई गई है, लेकिन खेल मैदान या हरियाली विकसित न करके वहां सप्ताह में हाट-बाजार लगाया जा रहा है।
पट्टों और मकानों के नियमन को लेकर निवासियों की क्या मांग है?
स्थानीय लोग अपने निर्मित मकानों का नियमन कराकर स्थायी पट्टे देने की मांग कर रहे हैं ताकि उन्हें संपत्ति का कानूनी अधिकार मिल सके।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR