बॉलीवुड एक्ट्रेस बिपाशा बसु ने अपने फिटनेस सप्लीमेंट को लेकर एक गंभीर चिंता जाहिर की है, जिससे सोशल मीडिया पर काफी हलचल मच गई है. बिपाशा ने 10 सितंबर को अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल पर एक वीडियो स्टोरी साझा की थी. इस वीडियो में उन्होंने दिखाया कि हाल ही में खरीदे और नए खोले गए आइसोयोर प्रोटीन पाउडर के डिब्बे में कीड़े जैसी छोटी-छोटी चीजें रेंगती दिख रही थीं. इस अप्रत्याशित अनुभव के बाद उन्होंने महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) कमिश्नर तुकाराम मुंढे को ऑनलाइन टैग करते हुए मामले में हस्तक्षेप और मदद की अपील की थी. इस शिकायत पर संज्ञान लेते हुए न्यूट्रिशन सप्लीमेंट बनाने वाली संबंधित कंपनी ने आधिकारिक बयान जारी किया है.
ब्रांड ने शुरू की प्रामाणिकता और गुणवत्ता की जांच
ग्लेनबिया परफॉर्मेंस न्यूट्रिशन (जीपीएन) इंडिया के जनरल मैनेजर सुमित माथुर ने बताया कि पूरे मामले की जानकारी मिलते ही उनकी टीम ने बिना किसी देरी के सीधे बिपाशा बसु से संपर्क स्थापित किया है. आइसोयोर की विशेषज्ञ टीम ने एक्ट्रेस के पास मौजूद उस विशेष प्रोटीन पाउडर कंटेनर की विस्तृत जांच शुरू कर दी है. इस प्रक्रिया के तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि क्या संबंधित डिब्बा ब्रांड का मूल उत्पाद है या फिर कहीं नकली माल तो बाजार में नहीं पहुंच गया. इसके अलावा सप्लीमेंट की कुल गुणवत्ता और पैकेजिंग की स्थिति का भी सूक्ष्मता से परीक्षण किया जा रहा है. कंपनी के प्रवक्ता ने दोहराया कि उनके लिए ग्राहकों का स्वास्थ्य, सुरक्षा और उत्पाद का उच्च मानक ही सर्वोच्च प्राथमिकता है.
नकली उत्पादों से सावधान रहने और क्यूआर कोड जांचने की सलाह
न्यूट्रिशन कंपनी ने उपभोक्ताओं को बाजार में मौजूद मिलावटी और नकली खाद्य पदार्थों के प्रति भी सतर्क किया है. सुमित माथुर के अनुसार, कंपनी के जिम्मेदार अधिकारी नकली सप्लीमेंट्स की रोकथाम के लिए निरंतर निगरानी रखते हैं. आइसोयोर ने ग्राहकों से पुरजोर आग्रह किया है कि वे ऐसे स्वास्थ्य वर्धक उत्पाद हमेशा अधिकृत रिटेल स्टोर्स या आधिकारिक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से ही खरीदें. इसके अलावा किसी भी सप्लीमेंट को इस्तेमाल करने से पहले डिब्बे पर मुद्रित क्यूआर कोड को अपने स्मार्टफोन से स्कैन करके उसकी प्रामाणिकता की पुष्टि अवश्य कर लें. बिपाशा बसु ने 10 सितंबर को इंस्टाग्राम वीडियो में नए डिब्बे में कीट पतंगे होने का आरोप लगाकर सीधे राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन आयुक्त तुकाराम मुंढे से सख्त निगरानी की मांग रखी थी.
महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा को लेकर चल रहा सघन जांच अभियान
यह पूरा विवाद ऐसे वक्त में गहराया है जब महाराष्ट्र का खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग राज्य भर में खानपान की शुद्धता और स्वच्छता मानकों को लेकर एक व्यापक निरीक्षण अभियान संचालित कर रहा है. आंकड़ों के अनुसार, जून से अगस्त 2026 की समयावधि के दौरान एफडीए की टीमों ने कुल 37,604 विभिन्न नमूनों का संग्रह किया था. इनमें अकेले खाद्य उत्पादों के 34,584 नमूने शामिल थे, जिनमें से 32,604 नमूनों की प्रयोगशाला में विस्तृत जांच पूरी की जा चुकी है. इसके साथ ही बीते 100 दिनों के भीतर लगभग 12,000 अलग-अलग खाद्य प्रतिष्ठानों, दुकानों और गोदामों का औचक निरीक्षण किया गया. तय नियमों, सफाई और सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन पाए जाने पर कई प्रतिष्ठानों के कारोबारी लाइसेंस निलंबित कर दिए गए और आवश्यक सुधार के लिए वैधानिक नोटिस भी थमाए गए हैं.
















