भारतीय सिनेमा के लिए प्रमाणन प्रणाली में तीन दशकों के लंबे अंतराल के बाद व्यापक बदलाव लागू किए गए हैं। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के नवनियुक्त 18 सदस्यों को इन अद्यतन नियमों के तहत फिल्मों के मूल्यांकन का दायित्व सौंपा गया है। इन नए सदस्यों में प्रीति जिंटा, सुनील शेट्टी और पंकज त्रिपाठी जैसी जानी-मानी फिल्मी हस्तियां शामिल हैं। नए दिशा-निर्देशों का मूल उद्देश्य प्रमाणन की प्रक्रिया को आधुनिक सामाजिक प्राथमिकताओं और वर्तमान मानकों के अनुकूल बनाना है, जबकि व्यवस्था के कई बुनियादी सिद्धांतों को पहले की तरह सुरक्षित रखा गया है। नए नियमों का सीधा प्रभाव फिल्म निर्माण से जुड़े रचनात्मक निर्णयों पर पड़ेगा, जहां सामाजिक मूल्यों और संवेदनशील विषयों के चित्रण में अत्यधिक सतर्कता बरतनी होगी।
सर्टिफिकेशन का नया उम्र आधारित ढांचा
दिसंबर 1991 के पुराने नियमों को विस्थापित करते हुए नए प्रावधानों के तहत फिल्मों के वर्गीकरण को अधिक सूक्ष्म बनाया गया है। अब सिनेमाई सामग्री को दर्शकों की उम्र के अनुसार स्पष्ट सीमाओं में बांटा जाएगा। इसके लिए U और A श्रेणियों के अलावा विशेष तौर पर UA 7+, UA 13+, UA 16+ और S जैसी श्रेणियां निर्धारित की गई हैं। बच्चों और किशोर दर्शकों के लिए उम्र के अलग-अलग पड़ावों को ध्यान में रखकर यह विभाजन किया गया है, जिससे अभिभावकों को यह निर्णय लेने में आसानी होगी कि कौन सी सामग्री किस आयु वर्ग के लिए उपयुक्त है।
नशीले पदार्थों और हिंसा के चित्रण पर कड़ाई
मादक पदार्थों के सेवन और अवैध तस्करी के दृश्यों को लेकर नियामक तंत्र ने अपनी नीति अत्यंत सख्त कर दी है। यदि किसी दृश्य में नशीली दवाओं का इस्तेमाल या तस्करी दिखाई जाती है, तो निर्माताओं के लिए उस दृश्य के साथ स्पष्ट कानूनी चेतावनी प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही हिंसा, आपराधिक कृत्यों और समाज-विरोधी आचरण को सही ठहराने वाले दृश्यों की प्रस्तुति पर कड़ी सीमाएं तय की गई हैं। दिशा-निर्देशों में यह स्पष्ट किया गया है कि किसी भी असामाजिक व्यवहार या गैरकानूनी हिंसा को पर्दे पर महिमामंडित या तर्कसंगत सिद्ध करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
संवेदनशील विषयों और सामाजिक संदर्भ का मूल्यांकन
संवेदनशील सामाजिक मुद्दों के फिल्मांकन को लेकर भी स्पष्ट मानक तय किए गए हैं। फिल्मों में बच्चों के साथ अनुचित व्यवहार, मूक जीवों के प्रति क्रूरता और दिव्यांग व्यक्तियों से जुड़े प्रसंगों को बेवजह या गैर-जरूरी तरीके से प्रस्तुत करने पर रोक रहेगी। इसके अतिरिक्त सांप्रदायिक सौहार्द को चोट पहुंचाने वाले अथवा राष्ट्र-विरोधी भावनाओं को भड़काने वाले दृश्यों पर नियामक समिति विशेष निगरानी रखेगी। फिल्मों के दृश्यों का आकलन करते समय बोर्ड सामग्री के समग्र संदर्भ, कहानी की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और समकालीन सामाजिक मानकों का समग्रता से विश्लेषण करेगा।



















