बेटे के जन्म के कुछ महीनों बाद अभिनेत्री करिश्मा तन्ना ने मातृत्व के सबसे संवेदनशील और अनदेखे पहलू पर अपनी बात रखी है। अपने बच्चे वेद के आने से जीवन में आई खुशियों के बीच उन्होंने प्रसव के बाद महिलाओं के सामने आने वाले मानसिक और शारीरिक तनाव यानी पोस्टपार्टम डिप्रेशन की हकीकत बयां की। उनका कहना है कि शिशु को दुनिया में लाना जितना सुखद अहसास है, उसके बाद का समय उतना ही जटिल और मुश्किलों से भरा सफर साबित होता है।
प्रसव के बाद मानसिक उतार-चढ़ाव की तैयारी
करिश्मा तन्ना ने बताया कि अस्पताल जाने और बच्चे के जन्म से पहले ही उन्होंने खुद को मानसिक रूप से इस स्थिति के लिए तैयार करना शुरू कर दिया था। उन्हें इस बात की पूरी जानकारी थी कि डिलीवरी के बाद अवसाद और भारी तनाव से गुजरना पूरी तरह सामान्य और वास्तविक प्रक्रिया है। करिश्मा के मुताबिक, कोई इंसान मानसिक रूप से कितना भी सशक्त क्यों न हो, यह मानसिक स्थिति हर किसी को प्रभावित करती है। इस भावनात्मक तूफान पर किसी का सीधा नियंत्रण नहीं होता और लगभग हर नई मां को इस कठिन अनुभव से गुजरना पड़ता है।
हार्मोनल बदलाव और अचानक आंसू छलकने का दर्द
डिलीवरी के बाद शरीर और दिमाग में आने वाले परिवर्तनों का जिक्र करते हुए अभिनेत्री ने कहा कि प्रसव के तुरंत बाद शरीर में कई बड़े हार्मोनल उतार-चढ़ाव होते हैं। कभी मन में अचानक अत्यधिक खुशी महसूस होती है, तो अगले ही पल मनोदशा एकदम उदास हो जाती है। इस दौर में कई बार ऐसा भी वक्त आता है जब बिना किसी स्पष्ट वजह के छोटी-छोटी बातों पर आंखों से आंसू बहने लगते हैं। शरीर पर टांके लगे होने और तेज शारीरिक दर्द के बावजूद एक मां को अपने नन्हें बच्चे की हर जरूरत का ध्यान रखना पड़ता है, जो किसी भी दृष्टिकोण से आसान काम नहीं है।
नई माताओं को गिल्ट ट्रिप से बचने की सलाह
इस पूरे अनुभव से गुजरने के बाद करिश्मा ने अन्य सभी नई माताओं को एक बेहद अहम संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि इस नाजुक दौर में महिलाओं को कभी भी अपने फैसलों को लेकर खुद को कमतर नहीं आंकना चाहिए और न ही किसी तरह के अपराधबोध में घिरना चाहिए। एक मां अपने बच्चे की परवरिश के लिए जो भी प्रयास कर रही होती है, वह पूरी तरह से सही और पर्याप्त होता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब मां खुद अंदर से खुश और शांत रहेगी, तभी वह अपने शिशु को भी खुशहाल माहौल दे सकेगी, इसलिए खुद की क्षमताओं पर विश्वास रखना बेहद जरूरी है।
मातृत्व में छिपी असली ताकत और सुपरपावर का अहसास
बच्चे के जन्म के बाद करिश्मा के अनुसार ताकत की परिभाषा उनके लिए पूरी तरह बदल गई है। उन्होंने साझा किया कि प्रसव के दौरान एक महिला जिस असहनीय दर्द और शारीरिक प्रक्रिया से गुजरती है, वही असल मायने में इंसानी ताकत का सबसे बड़ा प्रमाण है। उनका मानना है कि यदि कोई महिला जीवन देने की इस पूरी कठिन प्रक्रिया को सहन करने का हौसला रखती है, तो वास्तव में उसके भीतर एक असाधारण शक्ति यानी सुपरपावर मौजूद है।
बेटे के नाम के पीछे की सांस्कृतिक सोच
करिश्मा और उनके पति वरुण बंगेरा ने अपने लाडले का नाम वेद तन्ना बंगेरा रखा है। इस नाम के चयन पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि वे दोनों अपने बच्चे का नाम भारतीय संस्कृति और जड़ों से गहराई से जुड़ा हुआ रखना चाहते थे। उनकी इच्छा थी कि बच्चे का नाम संस्कृत भाषा का ऐसा शब्द हो जिसका अर्थ बेहद प्रभावशाली और गहरा हो। काफी विचार-विमर्श करने के बाद उन्होंने वेद नाम को अंतिम रूप दिया।
जरूरतमंद माताओं की मदद का संकल्प
जीवन के इस नए पड़ाव ने करिश्मा के दुनिया को देखने के नजरिए को भी विस्तार दिया है। उन्होंने कहा कि वे ईश्वर की आभारी हैं कि उनके पास हर जरूरी चिकित्सा सुविधा और हर प्रकार की सहूलियत मौजूद है। हालांकि, इस स्थिति में आने के बाद उनका ध्यान लगातार उन वंचित और गरीब माताओं की तरफ जाता है, जिनके पास प्रसव के बाद बुनियादी मदद और देखभाल का कोई सहारा नहीं होता। करिश्मा ने इच्छा जताई कि वे अब ऐसी जरूरतमंद माताओं और उनके नवजात शिशुओं की भलाई के लिए आगे आकर ठोस मदद करना चाहती हैं।



















