प्रसिद्ध पार्श्व गायक सोनू निगम ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा यानी नीट प्रदर्शन से जुड़े सवाल पर दिए गए अपने जवाब और सोशल मीडिया पर हो रही आलोचना पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान छात्रों के आंदोलन पर टिप्पणी करने से इनकार करने के बाद उठे विवाद के जवाब में गायक ने कहा कि किसी आयोजन की गरिमा बनाए रखना बुनियादी शिष्टाचार है। इसके साथ ही उन्होंने जनहित से जुड़े मुद्दों पर अपने पुराने रिकॉर्ड और सिद्धांतों का भी हवाला दिया।
वायरल वीडियो और सोशल मीडिया पर आलोचना
पूरा मामला मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम से शुरू हुआ था, जहां पत्रकारों ने सोनू निगम से देश भर में चल रहे नीट छात्र प्रदर्शनों पर उनकी राय पूछी थी। उस दौरान विषय से अलग पूछे गए सवाल पर प्रतिक्रिया देते हुए गायक ने नाराजगी जताई और "अब बस हो गया" कहकर बातचीत को विराम दे दिया था। इस बातचीत की एक संक्षिप्त वीडियो क्लिप जल्द ही इंटरनेट पर प्रसारित हो गई।
वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के एक वर्ग ने सोनू निगम को निशाने पर ले लिया। लोगों ने सवाल उठाया कि जब हजारों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा इतना गंभीर मुद्दा चर्चा में है और कई अन्य कलाकार व मशहूर हस्तियां छात्रों के समर्थन में आगे आई हैं, तब एक लोकप्रिय कलाकार इस विषय पर मौन क्यों साधे हुए हैं। ऑनलाइन मंचों पर उनकी इस प्रतिक्रिया को लेकर काफी तीखी बहस छिड़ गई थी।
कार्यक्रम की मर्यादा और पंकज उधास को श्रद्धांजलि
अपनी चुप्पी पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए सोनू निगम ने बताया कि उस कार्यक्रम में टिप्पणी न करने के पीछे एक ठोस वजह थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस कार्यक्रम में उनसे यह सवाल पूछा गया था, वह वास्तव में दिवंगत गजल गायक पंकज उधास की स्मृति में आयोजित एक श्रद्धांजलि सभा थी। सोनू निगम के अनुसार, ऐसे गंभीर और भावुक अवसर पर किसी राजनीतिक या गैर-संबंधित विवादित मुद्दे पर चर्चा करना उस महान कलाकार की यादों के प्रति अनुचित होता।
अपने करीब तीस साल के लंबे संगीत करियर का उल्लेख करते हुए गायक ने कहा कि मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस और मीडिया वार्ताओं के दौरान उन्होंने यह सीखा है कि बातचीत को उसी मूल विषय तक सीमित रखना चाहिए जिसके लिए वह आयोजन रखा गया है। सार्वजनिक मंच पर विषय से भटकना आयोजकों और कार्यक्रम के उद्देश्य दोनों का अनादर माना जाता है।
पिता से किया वादा और पहले उठाए गए मुद्दे
सोनू निगम ने अपने व्यक्तिगत सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उन्होंने अपने पिता से एक खास वादा किया है। इस वादे के मुताबिक, वह किसी भी ऐसे विषय पर सार्वजनिक मंचों पर विचार व्यक्त नहीं करेंगे जिसके बारे में उनके पास पर्याप्त और प्रामाणिक जानकारी न हो। नीट परीक्षा मामले की बारीकियों की पूरी जानकारी न होने के कारण उन्होंने चुप रहना ही उचित समझा।
खुद पर लग रहे लगातार मौन रहने के आरोपों को खारिज करते हुए सोनू निगम ने कहा कि वह ऐसे कलाकार नहीं हैं जो हर मुद्दे पर चुप रहते हों। उन्होंने बताया कि वह अपने फोन पर सोशल मीडिया ऐप्स का इस्तेमाल भी नहीं करते हैं, लेकिन अपने जीवन में कई महत्वपूर्ण विषयों पर हमेशा निडर होकर अपनी बात रखी है। उदाहरण के रूप में उन्होंने धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर उठाई गई अपनी आपत्ति और संगीतकारों के रॉयल्टी अधिकारों की लड़ाई का उल्लेख किया।
गायक ने कहा कि उन्होंने अतीत में अकेले खड़े होकर व्यवस्था में सुधार लाने के लिए आवाज उठाई है। उन्होंने आगे कहा कि अब समय आ गया है कि समाज के अन्य लोग भी साहस दिखाएं, अपनी बात रखें और देखें कि वे प्रणाली में क्या सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।



















