फिल्ममेकर विवेक अग्निहोत्री की सोशल मीडिया पर साझा की गई एक टिप्पणी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उत्तराखंड स्थित प्रसिद्ध कैंची धाम में 4 अक्टूबर को श्रद्धालुओं की भारी कतार और धक्का-मुक्की का एक दृश्य सोशल मीडिया मंच एक्स पर सामने आया था। इसी फुटेज को दोबारा साझा करते हुए अग्निहोत्री ने सुझाव दिया कि यदि शासन धर्म पर कर लगाना शुरू कर दे, तो देश बेहद कम समय में सबसे धनी राष्ट्र बन सकता है। उनका तर्क था कि ऐसी व्यवस्था बनने पर लोग केवल कर का भुगतान ही नहीं करेंगे, बल्कि चमत्कारों और दैवीय हस्तक्षेप के भरोसे रहने के स्थान पर नवाचार, उत्पादकता, व्यक्तिगत उन्नति और नए विचारों की तरफ ध्यान केंद्रित करने लगेंगे। इस टिप्पणी पर विश्व हिंदू परिषद ने अत्यंत कड़ा रुख अख्तियार करते हुए उनसे सार्वजनिक रूप से क्षमा याचना की मांग की है।
तीर्थ परंपरा और सामाजिक अर्थव्यवस्था पर विश्व हिंदू परिषद का जवाब
विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने इस दृष्टिकोण पर गहरी नाराजगी जाहिर की और धर्म को उत्पादकता के विपरीत दिखाने के प्रयास का कड़ा प्रतिवाद किया। बंसल ने एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सवाल किया कि आस्थावान लोगों की यात्राओं को अंधविश्वास या चमत्कार की प्रतीक्षा क्यों समझा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तीर्थ स्थल सिर्फ पूजा-पाठ के केंद्र नहीं हैं, बल्कि वे देश की आत्मा, सभ्यता, संस्कृति, सामाजिक ताने-बाने और क्षेत्रीय आर्थिकी के अभिन्न हिस्से हैं। बंसल के अनुसार, लाखों श्रद्धालुओं का आवागमन स्थानीय रोजगार और व्यापार को गति देता है, ऐसे में उसे प्रगति की राह में बाधा मानना अनुचित है।
सिनेमा के टैक्स लाभ और बयानों के पीछे के मंतव्य पर उठाए सवाल
संगठन के प्रवक्ता ने फिल्म जगत के दोहरे रवैये पर भी खुलकर टिप्पणी की। उन्होंने ध्यान दिलाया कि सिनेमा उद्योग अक्सर अपनी परियोजनाओं के लिए सरकारों से कर छूट और वित्तीय सहूलियतें मांगता रहता है, मगर जब बात करोड़ों हिंदुओं के पवित्र केंद्रों की आती है तो वहां शुल्क अथवा टैक्स लगाने की वकालत की जाने लगती है। विनोद बंसल ने यह अंदेशा भी जताया कि क्या यह विवादित वक्तव्य किसी आगामी सिनेमाई परियोजना के प्रचार का जरिया है। उन्होंने फिल्म निर्देशक को याद दिलाया कि उसी धार्मिक और राष्ट्रवादी समाज ने उनकी रचनाओं को समर्थन देकर उन्हें लोकप्रियता के शिखर पर पहुंचाया है, इसलिए उसी वर्ग की गहरी आस्था को आहत करना कतई शोभनीय नहीं है।
फिल्ममेकर की पूर्व कृतियां और आगामी योजनाओं की पृष्ठभूमि
उल्लेखनीय है कि निर्देशक की पूर्व रचना द बंगाल फाइल्स पिछले वर्ष पर्दे पर आई थी और उस दौरान भी विभिन्न हलकों में तीखी बहस छिड़ी थी। इसके अतिरिक्त उनकी अगली योजना ऑपरेशन सिंदूर पर आधारित बताई जा रही है। लगातार ज्वलंत मुद्दों पर मुखर रहने वाले निर्देशक इस बार अपने आर्थिक और धार्मिक तर्कों के चलते हिंदू संगठनों के सीधे निशाने पर आ गए हैं, जहां उनके दावों को आस्था का अनादर बताया जा रहा है।
आलोचनाओं के उपरांत निर्देशक की दार्शनिक सफाई
विरोध की लहर उठने के बाद विवेक अग्निहोत्री ने अपनी स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया। उन्होंने मंच पर प्रतिक्रिया देते हुए आग्रह किया कि लोग उन्हें धर्म की व्याख्या सिखाने का प्रयास न करें। उन्होंने कहा कि वह अक्सर विचार करते हैं कि यदि प्राचीन उपनिषदों के रचयिता, महान दार्शनिक या स्वामी विवेकानंद वर्तमान युग में उपस्थित होते, तो इस परिदृश्य पर उनका क्या दृष्टिकोण होता। उन्होंने अंधविश्वास, चमत्कार के दावों, अवैज्ञानिक मान्यताओं और केवल वीडियो रील्स तैयार करने जुटी भीड़ को लेकर तंज कसते हुए कहा कि यदि कोई इन्हीं चीजों को धर्म मानता है तो वह अपने भ्रम में बने रहने के लिए स्वतंत्र है, क्योंकि ऐसे भ्रम का कोई स्थाई उपचार संभव नहीं है।



















