हिंदी सिनेमा के इतिहास में संगीत से जुड़े कई ऐसे किस्से हैं जो आज भी लोगों को हैरान कर देते हैं। ऐसा ही एक दिलचस्प वाकया एक बेहद लोकप्रिय धुन से जुड़ा है, जिसका जादू दशकों बाद भी श्रोताओं के सिर चढ़कर बोलता है। संगीतकार एसडी बर्मन द्वारा रचित इस धुन पर आगे चलकर कई अलग-अलग फिल्मों में एक से बढ़कर एक गीत तैयार किए गए। इन गानों ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए आयाम गढ़े और कुछ को प्रतिष्ठित फिल्मफेयर अवॉर्ड से भी नवाजा गया। इस पूरी कहानी की शुरुआत साल 1951 में आई फिल्म 'नौजवान' से हुई थी, जिसके बाद इस धुन ने संगीत जगत में अपनी एक अलग ही छाप छोड़ दी।
होटल में हुई थी इस अद्भुत धुन की रचना
इस अमर धुन के जन्म के पीछे की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, संगीतकार एसडी बर्मन ने एक होटल में बज रहे पियानो से प्रेरणा लेकर इस धुन को गढ़ा था। वह धुन मूल रूप से 1920 के एक स्पैनिश गीत से प्रेरित थी। एसडी बर्मन को वह धुन इतनी भाई कि उन्होंने उस पर एक पूरा गाना तैयार करने का फैसला कर लिया। इस सिलसिले में जब गीतकार साहिर लुधियानवी उनसे मिलने पहुंचे, तो उन्होंने बिना किसी पूर्व नियुक्ति के सीधे होटल के कमरे का दरवाजा खटखटाया। उनकी इस बेबाकी से एसडी बर्मन एक पल के लिए हैरान रह गए थे, लेकिन जब उन्होंने धुन सुनाई, तो साहिर ने बिना एक पल गंवाए मात्र साढ़े तीन मिनट में उस पर पूरा गीत लिख डाला।
फिल्म नौजवान से हुई थी गानों की शुरुआत
साहिर लुधियानवी द्वारा उस धुन पर लिखा गया पहला गाना 'ठंडी हवाएं, लहराके आएं' था, जिसे मशहूर गायिका लता मंगेशकर ने अपनी सुरीली आवाज से सजाया था। यह फिल्म 'नौजवान' का हिस्सा था, जिसका निर्देशन महेश कौल ने किया था। इस फिल्म में प्रेमनाथ और नलिनी जयवंत मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। यह गाना रिलीज होते ही दर्शकों के बीच छा गया और एसडी बर्मन के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। उन्हें यह समझने में देर नहीं लगी कि साहिर शब्दों के बेताज बादशाह हैं। इस तरह एक होटल के कमरे में शुरू हुआ सफर आगे चलकर कई और बेहतरीन गानों की नींव बन गया।
मदन मोहन और रोशन का संगीत सफर
समय के साथ अन्य संगीतकारों ने भी इस जादुई धुन से प्रेरणा ली और अपने अंदाज में नए गीत रचे। संगीतकार रोशन ने इसी तर्ज पर 'रहे ना रहे हम' और 'तेरा दिल कहां है' जैसे सदाबहार गाने बनाए। इसके अलावा, संगीतकार मदन मोहन ने भी निर्देशक मोहन कुमार की फिल्म 'आपकी परछाइयां' (1964) के लिए इसी धुन का इस्तेमाल करते हुए एक खूबसूरत गाना तैयार किया। मोहम्मद रफी की आवाज में सजा यह गीत 'यही है तमन्ना, तेरे घर के सामने' आज भी लोगों की जुबान पर रहता है। साल 1966 में रोशन ने फिल्म 'ममता' के लिए 'रहे ना रहें हम, महका करेंगे' गीत को इसी धुन पर ढाला, जिसमें धर्मेंद्र और सुचित्रा सेन की जोड़ी नजर आई थी और यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई थी।
आरडी बर्मन का अनोखा अंदाज
एसडी बर्मन के बेटे आरडी बर्मन उर्फ पंचम दा ने भी अपने पिता की इस विरासत को आगे बढ़ाया और इस धुन में थोड़ा बहुत फेरबदल करके तीन नए सुपरहिट गाने बनाए। उन्होंने सबसे पहले साल 1981 में आई फिल्म 'नरम गरम' के लिए इस धुन का इस्तेमाल किया और 'हमें रास्तों की जरूरत नहीं है' गीत तैयार किया, जिसे आशा भोसले ने अपनी आवाज दी। इसके बाद 1983 में फिल्म 'अगर तुम न होते' का टाइटल ट्रैक इसी तर्ज पर बना, जिसे किशोर कुमार ने गाया और इस के लिए उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कार मिला। फिर साल 1985 में फिल्म 'सागर' के लिए 'सागर किनारे, दिल ये पुकारे' गाना भी इसी धुन से सजाया गया, जो एक बार फिर चार्टबस्टर साबित हुआ और किशोर कुमार को इसके लिए एक और फिल्मफेयर अवॉर्ड दिलाया।



















