डीपफेक पर भड़कीं मृणाल ठाकुर, यशस्वी जायसवाल से डेटिंग की अफवाहों को किया खारिजउदयनिधि स्टालिन के बयान पर घमासान, तृषा कृष्णन प्रकरण के बीच गायिका चिन्मयी श्रीपदा ने क्या कहावायलेंट नाइट 2 रिव्यू (2026): डेविड हार्बर और क्रिस्टन बेल की खूनी क्रिसमस वापसी का ट्रेलर जारीबिटकॉइन प्रीमियम इंडेक्स में रिकॉर्ड गिरावट, अमेरिकी बाजार में सुस्त पड़ी मांगकोटा में पुलिस से बचने को चंबल नदी में कूदे दो तस्कर, डूबने से मौत और कार से डोडा चूरा मिलाकच्चे तेल में भारी गिरावट के पीछे छिपी है एक बड़ी चेतावनी, विश्लेषकों ने दिए संकेतफुकेट से दिल्ली आ रही फ्लाइट में मची चीख-पुकार, टर्बुलेंस के झटकों से गोद से छिटक कर दूर जा गिरा बच्चामोहम्मद शमी ने विराट कोहली और अनुष्का शर्मा का किया समर्थन, वृंदावन यात्रा पर आलोचकों को दिया करारा जवाबकर्क राशिफल 5 अगस्त: सूर्य-गुरु की युति से मजबूत होगा आत्मविश्वास, जानिए क्या कहता है चंद्रमासमय रैना के शो में मिला था मालदीव ट्रिप का तोहफा, हनीमून वीडियो पर आया रितेश देशमुख का रिएक्शन
एक ही जादुई धुन पर बने कई सुपरहिट गाने, संगीत की दुनिया का अनोखा किस्सामनोरंजन
4 अग॰ 2026, 5:35 pm (6 घंटे पहले)· 0

एक ही जादुई धुन पर बने कई सुपरहिट गाने, संगीत की दुनिया का अनोखा किस्सा

संगीतकार एसडी बर्मन की बनाई एक अनूठी धुन ने हिंदी सिनेमा को कई यादगार गीत दिए। इस एक ही धुन से प्रेरित होकर अलग-अलग फिल्मों में कई गाने बने, जिनमें से कुछ को फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिले।

हिंदी सिनेमा के इतिहास में संगीत से जुड़े कई ऐसे किस्से हैं जो आज भी लोगों को हैरान कर देते हैं। ऐसा ही एक दिलचस्प वाकया एक बेहद लोकप्रिय धुन से जुड़ा है, जिसका जादू दशकों बाद भी श्रोताओं के सिर चढ़कर बोलता है। संगीतकार एसडी बर्मन द्वारा रचित इस धुन पर आगे चलकर कई अलग-अलग फिल्मों में एक से बढ़कर एक गीत तैयार किए गए। इन गानों ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए आयाम गढ़े और कुछ को प्रतिष्ठित फिल्मफेयर अवॉर्ड से भी नवाजा गया। इस पूरी कहानी की शुरुआत साल 1951 में आई फिल्म 'नौजवान' से हुई थी, जिसके बाद इस धुन ने संगीत जगत में अपनी एक अलग ही छाप छोड़ दी।

होटल में हुई थी इस अद्भुत धुन की रचना

इस अमर धुन के जन्म के पीछे की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, संगीतकार एसडी बर्मन ने एक होटल में बज रहे पियानो से प्रेरणा लेकर इस धुन को गढ़ा था। वह धुन मूल रूप से 1920 के एक स्पैनिश गीत से प्रेरित थी। एसडी बर्मन को वह धुन इतनी भाई कि उन्होंने उस पर एक पूरा गाना तैयार करने का फैसला कर लिया। इस सिलसिले में जब गीतकार साहिर लुधियानवी उनसे मिलने पहुंचे, तो उन्होंने बिना किसी पूर्व नियुक्ति के सीधे होटल के कमरे का दरवाजा खटखटाया। उनकी इस बेबाकी से एसडी बर्मन एक पल के लिए हैरान रह गए थे, लेकिन जब उन्होंने धुन सुनाई, तो साहिर ने बिना एक पल गंवाए मात्र साढ़े तीन मिनट में उस पर पूरा गीत लिख डाला।

ये भी पढ़ें

फिल्म नौजवान से हुई थी गानों की शुरुआत

साहिर लुधियानवी द्वारा उस धुन पर लिखा गया पहला गाना 'ठंडी हवाएं, लहराके आएं' था, जिसे मशहूर गायिका लता मंगेशकर ने अपनी सुरीली आवाज से सजाया था। यह फिल्म 'नौजवान' का हिस्सा था, जिसका निर्देशन महेश कौल ने किया था। इस फिल्म में प्रेमनाथ और नलिनी जयवंत मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। यह गाना रिलीज होते ही दर्शकों के बीच छा गया और एसडी बर्मन के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। उन्हें यह समझने में देर नहीं लगी कि साहिर शब्दों के बेताज बादशाह हैं। इस तरह एक होटल के कमरे में शुरू हुआ सफर आगे चलकर कई और बेहतरीन गानों की नींव बन गया।

मदन मोहन और रोशन का संगीत सफर

समय के साथ अन्य संगीतकारों ने भी इस जादुई धुन से प्रेरणा ली और अपने अंदाज में नए गीत रचे। संगीतकार रोशन ने इसी तर्ज पर 'रहे ना रहे हम' और 'तेरा दिल कहां है' जैसे सदाबहार गाने बनाए। इसके अलावा, संगीतकार मदन मोहन ने भी निर्देशक मोहन कुमार की फिल्म 'आपकी परछाइयां' (1964) के लिए इसी धुन का इस्तेमाल करते हुए एक खूबसूरत गाना तैयार किया। मोहम्मद रफी की आवाज में सजा यह गीत 'यही है तमन्ना, तेरे घर के सामने' आज भी लोगों की जुबान पर रहता है। साल 1966 में रोशन ने फिल्म 'ममता' के लिए 'रहे ना रहें हम, महका करेंगे' गीत को इसी धुन पर ढाला, जिसमें धर्मेंद्र और सुचित्रा सेन की जोड़ी नजर आई थी और यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई थी।

आरडी बर्मन का अनोखा अंदाज

एसडी बर्मन के बेटे आरडी बर्मन उर्फ पंचम दा ने भी अपने पिता की इस विरासत को आगे बढ़ाया और इस धुन में थोड़ा बहुत फेरबदल करके तीन नए सुपरहिट गाने बनाए। उन्होंने सबसे पहले साल 1981 में आई फिल्म 'नरम गरम' के लिए इस धुन का इस्तेमाल किया और 'हमें रास्तों की जरूरत नहीं है' गीत तैयार किया, जिसे आशा भोसले ने अपनी आवाज दी। इसके बाद 1983 में फिल्म 'अगर तुम न होते' का टाइटल ट्रैक इसी तर्ज पर बना, जिसे किशोर कुमार ने गाया और इस के लिए उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कार मिला। फिर साल 1985 में फिल्म 'सागर' के लिए 'सागर किनारे, दिल ये पुकारे' गाना भी इसी धुन से सजाया गया, जो एक बार फिर चार्टबस्टर साबित हुआ और किशोर कुमार को इसके लिए एक और फिल्मफेयर अवॉर्ड दिलाया।

सवाल-जवाब

यह प्रसिद्ध धुन सबसे पहले किस फिल्म में सुनाई दी थी?
यह धुन सबसे पहले 1951 में रिलीज हुई फिल्म 'नौजवान' में सुनाई दी थी।
इस कालजयी धुन की रचना किसने की थी?
इस धुन की रचना संगीतकार एसडी बर्मन ने की थी।
इस धुन पर पहला गाना किसने लिखा था?
इस धुन पर पहला गीत 'ठंडी हवाएं, लहराके आएं' गीतकार साहिर लुधियानवी ने लिखा था।
आरडी बर्मन ने इस धुन का इस्तेमाल किन फिल्मों में किया था?
आरडी बर्मन ने इस धुन से प्रेरित होकर 'नरम गरम', 'अगर तुम न होते' और 'सागर' जैसी फिल्मों में गाने बनाए थे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR