नब्बे के दशक की उस सदाबहार और ब्लॉकबस्टर फिल्म की चर्चा अक्सर होती है जो सिनेमाघरों के पर्दे से उतरने का नाम ही नहीं ले रही थी। इस क्लासिक सिनेमा ने बॉक्स ऑफिस पर कमाई के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए थे और इसके निर्माण से जुड़े तमाम अनसुने किस्से आज भी सिने प्रेमियों के बीच खासे लोकप्रिय हैं। आज हम आपको इसी ऐतिहासिक फिल्म के एक बेहद खास और लोकप्रिय गाने के पीछे की संघर्षपूर्ण कहानी से रूबरू कराने जा रहे हैं, जिसे सुनने के बाद आप हैरान रह जाएंगे।
शाहरुख खान और काजोल की आइकॉनिक फिल्म
हम जिस फिल्म की बात कर रहे हैं वह और किसी की नहीं बल्कि निर्देशक आदित्य चोपड़ा के निर्देशन में बनी दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे है। यशराज बैनर के तले बनी यह फिल्म भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे प्रतिष्ठित और क्लासिक फिल्मों में गिनी जाती है। परदे पर शाहरुख खान और काजोल की जोड़ी और उनकी प्रेम कहानी को दर्शकों ने जितना अपार स्नेह दिया, उतना ही दीवाना इस फिल्म के संगीत का भी लोग बने। उस दौर में इस फिल्म के गानों का जो जादू लोगों के सिर चढ़कर बोला था, उसका असर आज भी पूरी तरह से कायम है।
जब डायरेक्टर ने ठुकरा दिए थे चौबीस प्रयास
यश चोपड़ा द्वारा निर्मित दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे के सभी गानों को दर्शकों का अभूतपूर्व और शानदार रिस्पांस मिला था। फिल्म के गानों के सिलसिले में सबसे पहले 'मेरे ख्वाबों में जो आए' गाने को रिकॉर्ड किया गया था। निर्देशक आदित्य चोपड़ा ने इस गाने को अपनी फिल्म के लिए सबसे पहले तैयार करवाया था, लेकिन उन्होंने इस ट्रैक को एक या दो बार नहीं बल्कि पूरे चौबीस बार सिरे से खारिज कर दिया था। जी हां, यह बिल्कुल सच है कि आदित्य चोपड़ा को मनमुताबिक परफेक्शन पाने के लिए इस धुन और शब्दों के साथ लंबी मशक्कत करनी पड़ी थी।
गीतकार और निर्देशक के बीच लंबी जुगलबंदी
इस खूबसूरत गीत के बोल जाने-माने गीतकार आनंद बक्शी ने रचे थे, लेकिन निर्देशक आदित्य चोपड़ा को इसके शब्दों में वह खास जादू और भावना महसूस नहीं हो रही थी जो वे अपनी इस फिल्म के जरिए परदे पर उतारना चाहते थे। अपनी सोच के मुताबिक बात न बनने पर आदित्य ने आनंद बक्शी द्वारा लिखे गए बोलों को लगातार चौबीस बार नामंजूर कर दिया। हालांकि निर्देशक ने धैर्य का परिचय देते हुए बार-बार सुधार करवाया और अंततः चौबीसवीं बार में जाकर उन्हें वह रचना पसंद आई जिसकी उन्हें तलाश थी।
जतिन-ललित के संगीत ने रचा इतिहास
'मेरे ख्वाबों में जो आए' गीत के बोल भले ही आनंद बक्शी की कलम से निकले थे, लेकिन इसे अमर बनाने में जतिन-ललित के बेहतरीन संगीत और लता मंगेशकर की जादुई आवाज का बहुत बड़ा योगदान रहा। दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे का यह गाना आज भी दर्शकों के दिलों में बसा हुआ है और लोग इसे बड़े चाव से सुनते हैं। इसके शब्दों ने परदे पर एक अनोखा और जादुई प्रभाव छोड़ा था जो फिल्म की पटकथा में बिल्कुल सटीक बैठता है और पात्रों के जज्बातों को बेहद खूबसूरती से बयां करता है।



















