आधुनिक जीवनशैली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का प्रभाव निरंतर गहराता जा रहा है, जिससे कई क्षेत्रों में कार्यशैली बदल रही है। इस तकनीकी उभार के बीच जाने-माने अभिनेता आशीष विद्यार्थी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया है कि किसी भी नए बदलाव के दौर में मन में संशय पैदा होना अस्वाभाविक नहीं है। जब भी कोई नया आविष्कार हमारे स्थापित ढर्रे को चुनौती देता है, तो शुरुआती असहजता पैदा होती है, परंतु असली बुद्धिमानी उस बदलाव के साथ तालमेल बिठाने और स्वयं को अपडेट रखने में ही निहित है।
कंप्यूटर और इंटरनेट के दौर की तरह AI को भी समझना होगा
इतिहास के पन्नों को पलटते हुए आशीष विद्यार्थी ने रेखांकित किया कि जब पहली बार दफ्तरों में कंप्यूटर पहुंचे थे या फिर वर्ल्ड वाइड वेब और इंटरनेट ने दस्तक दी थी, तब भी आम लोगों के बीच गहरी घबराहट देखने को मिली थी। काम के पुराने तरीकों में बड़ा उलटफेर होना तय था, इसलिए लोगों का आशंकित होना पूरी तरह स्वाभाविक था।
“डरना लाजिमी है क्योंकि आप जिस तरह से काम कर रहे थे, उसमें फर्क आएगा.”
उनका मानना है कि नई तकनीक हमेशा एक नया निमंत्रण लेकर आती है। जो पेशेवर या व्यक्ति इस निमंत्रण को स्वीकार करके नए औजारों को अपने दैनिक जीवन में ढाल लेंगे, वे आगे निकल जाएंगे। इसके विपरीत, जो लोग इस परिवर्तन से मुंह मोड़ेंगे या सीखने से परहेज करेंगे, उनके पिछड़ जाने का गंभीर खतरा बना रहेगा। वे स्वयं AI को किसी बाधा के रूप में नहीं, बल्कि मानवीय क्षमताओं और उपलब्धियों के विस्तार का एक सशक्त अवसर मानते हैं।
अदाणी समूह के निवेश और आम जनता के कल्याण पर राय
बातचीत के दौरान अभिनेता ने केवल तकनीकी विकास पर ही नहीं, बल्कि आर्थिक प्रगति पर भी अपने विचार प्रकट किए। पश्चिम बंगाल राज्य में अदाणी समूह की ओर से प्रस्तावित बड़े पूंजी निवेश का स्वागत करते हुए उन्होंने जनकल्याण को सबसे ऊपर रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि औद्योगिक निवेश का अंतिम उद्देश्य स्थानीय नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाना होना चाहिए।
उनका कहना था कि आर्थिक विकास की प्रक्रिया में यदि उद्योगपतियों की संपत्ति बढ़ती है तो उसमें कोई बुराई नहीं है, बशर्ते उस समृद्धि का सीधा लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति और आम जनता तक पहुंचे। रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के रूप में जब निवेश का प्रतिफल आम जनमानस को मिलने लगता है, तभी ऐसे वित्तीय कदम सार्थक साबित होते हैं।
सिनेमाई सफर: खलनायकी से लेकर संवेदनशील किरदारों तक पहचान
आशीष विद्यार्थी का नाम भारतीय सिनेमा जगत में अपनी विशिष्ट अभिनय शैली के लिए आदर के साथ लिया जाता है। उन्होंने हिंदी फिल्म उद्योग के अलावा देश की विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं के सिनेमा में भी अपनी मजबूत छाप छोड़ी है। उन्होंने अपने लंबे करियर में मुख्य रूप से नकारात्मक यानी विलेन के किरदारों में अमिट छाप छोड़ी, साथ ही कई महत्वपूर्ण सहायक भूमिकाओं को भी जीवंत किया।
उनके उल्लेखनीय अभिनय सफर में ‘द्रोहकाल’, ‘बाजी’, ‘जीत’ और ‘घातक’ जैसी चर्चित फिल्में शामिल रही हैं। इसके अलावा उन्होंने ‘कहो ना प्यार है’, ‘वास्तु शास्त्र’, ‘1942: ए लव स्टोरी’ और ‘किस्मत’ जैसी लोकप्रिय कृतियों में भी अपने हुनर का लोहा मनवाया है। सिनेमा में लंबे समय तक प्रासंगिक बने रहने का उनका यह अनुभव ही उन्हें बदलते वक्त और तकनीकों को सहजता से स्वीकार करने की दृष्टि देता है।



















