फिल्म ‘देवरा’ के लोकप्रिय ट्रैक ‘चुट्टमल्ले’ को लेकर सोशल मीडिया पर सामने आए एक फर्जी एआई वीडियो ने फिल्म जगत में तीखी बहस छेड़ दी है। जूनियर एनटीआर और जाह्नवी कपूर अभिनीत इस फिल्म के दृश्य में जाह्नवी कपूर का आपत्तिजनक डिजिटल रूप गढ़ा गया था, जिसे अभिनेत्री ने खुद एक बेहद शर्मनाक वाकया करार दिया। इस मसले पर चिरंजीवी, विजय देवरकोंडा और जूनियर एनटीआर जैसे बड़े कलाकारों ने भी खुलकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया था। अब इसी पूरे घटनाक्रम पर फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा ने एक अलग दृष्टिकोण सामने रखते हुए सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी है।
सेलिब्रिटीज की प्रतिक्रियाओं से सामग्री का अनचाहा प्रसार
दिग्गज फिल्म निर्देशक राम गोपाल वर्मा ने 4 अक्टूबर को अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट साझा करते हुए पूरे विवाद पर अपनी बात रखी। उन्होंने बिना किसी विशिष्ट व्यक्ति का नाम लिए यह रेखांकित किया कि जाने-माने चेहरों द्वारा इस मुद्दे को बार-बार उठाने से संबंधित आपत्तिजनक लिंक को उल्टा बहुत ज्यादा प्रचार मिल गया। उनका तर्क है कि जब बड़े सितारे ऐसी हरकतों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हैं, तो बड़ी संख्या में आम यूजर्स का ध्यान उसी विवादित लिंक और सामग्री की तरफ खिंच जाता है, जिससे उसकी चर्चा जरूरत से ज्यादा बढ़ जाती है।
अपराधी को पकड़ने पर ध्यान देने की जरूरत
‘रंगीला’ जैसी चर्चित फिल्मों का निर्देशन कर चुके राम गोपाल वर्मा ने सोशल मीडिया पर तर्क दिया कि हस्तियों के बयानों की वजह से वह आपत्तिजनक लिंक करोड़ों लोगों तक पहुंच सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस पूरे प्रकरण में अक्लमंदी भरा तरीका यह होना चाहिए था कि सारा ध्यान उस साजिशकर्ता या अपराधी को पकड़ने पर लगाया जाता जिसने यह कृत्य किया है। उनके अनुसार, लगातार सार्वजनिक पोस्ट डालने से पीड़ित की पहचान और उस भ्रामक कंटेंट को गैर-जरूरी तवज्जो मिलती है, जबकि असली कोशिश उस व्यक्ति को कानून के दायरे में लाने की होनी चाहिए जिसने यह गलत सामग्री बनाई और इंटरनेट पर प्रसारित की।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रसार पर दिया बयान
इस पूरे मामले को लेकर राम गोपाल वर्मा ने 5 अक्टूबर को एक और टिप्पणी साझा की। आधुनिक तकनीक के प्रभाव पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने एक्स पर लिखा,
"When you can’t WIN, you should JOIN ….. If you fight A I, it will ERASE you out of EXISTENCE 😔"उनका कहना था कि यदि आप लड़कर जीत नहीं सकते तो उसमें शामिल हो जाना चाहिए, क्योंकि एआई से टकराने की जिद में अस्तित्व ही मिट सकता है। अपने इस विचार से उन्होंने यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि डिजिटल युग में इस तरह की तकनीकों से पारंपरिक तरीके से निपटने के बजाय व्यावहारिक रणनीतियां अपनाना ज्यादा जरूरी है।



















