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कपूर खानदान में पिता कभी क्यों नहीं करते बेटों की तारीफ, रणबीर कपूर ने सुनाया अनसुना पारिवारिक किस्सामनोरंजन
4 नव॰ 2026, 2:23 pm (1 घंटे पहले)· 0

कपूर खानदान में पिता कभी क्यों नहीं करते बेटों की तारीफ, रणबीर कपूर ने सुनाया अनसुना पारिवारिक किस्सा

रणबीर कपूर ने बताया कि उनके परिवार में पीढ़ियों से पिताओं द्वारा बेटों की सीधी तारीफ न करने का नियम रहा है, जिसके पीछे जमीन से जुड़े रहने और सीखने की गहरी सीख छिपी है।

भारतीय सिनेमा के सबसे सम्मानित परिवारों में गिने जाने वाले कपूर खानदान के भीतर पीढ़ियों से एक अनूठी परंपरा चली आ रही है। इस परिवार में पिता कभी भी अपने बेटों के पेशेवर काम की खुलकर प्रशंसा नहीं करते। अभिनेता रणबीर कपूर ने इस खास पारिवारिक नियम और इसके पीछे के गहरे फलसफे पर रोशनी डाली है। उनके अनुसार, इस तौर-तरीके का मकसद अहंकार को दूर रखना और अगली पीढ़ी को लगातार अपने हुनर को तराशने के लिए प्रेरित करना रहा है, ताकि कामयाबी मिलने के बाद भी कोई आत्मसंतोष का शिकार न बने।

कौन बनेगा करोड़पति के मंच पर रणबीर ने साझा की बात

टेलीविजन के लोकप्रिय गेम शो कौन बनेगा करोड़पति में शामिल होने के दौरान रणबीर कपूर ने शो के संचालक और मेगास्टार अमिताभ बच्चन के साथ यह अनकहा वाकया साझा किया। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि यह किस्सा उन्होंने अपने दादा राज कपूर की किताब में पढ़ा था। राज कपूर भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े नामों में शुमार हो चुके थे, लेकिन उनके भीतर भी अपने पिता से मान्यता पाने की स्वाभाविक इच्छा मौजूद थी। इसी संदर्भ में उन्होंने अपने पिता पृथ्वीराज कपूर के सामने अपने दिल का एक सवाल रखा था।

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जब राज कपूर ने पृथ्वीराज कपूर से पूछा सीधा सवाल

रणबीर के मुताबिक, एक दौर ऐसा आया जब राज कपूर बतौर अभिनेता और फिल्मकार बेहद कामयाब हो चुके थे और उनके काम की हर तरफ चर्चा हो रही थी। उस समय राज कपूर ने अपने पिता पृथ्वीराज कपूर से पूछा कि जब उनका बेटा फिल्मों में इतना उम्दा काम कर रहा है और एक बड़ा स्टार बन चुका है, तो वे कभी उनकी तारीफ क्यों नहीं करते। राज कपूर की शिकायत थी कि उनके पिता कभी उनकी पीठ थपथपाकर उन्हें शाबाशी तक नहीं देते। इस सवाल के जरिए उन्होंने अपने पिता के कठोर रुख को समझने की कोशिश की थी।

रस्सी पर करतब दिखाने वाले बच्चे की प्रेरक कहानी

राज कपूर के इस सवाल पर पृथ्वीराज कपूर ने उन्हें सीधे जवाब देने के बजाय एक छोटी सी कहानी सुनाई। उन्होंने बताया कि सड़क किनारे एक नन्हा बालक रस्सी पर संतुलन बनाकर खतरनाक और हैरतअंगेज करतब दिखाया करता था। उस मासूम का संतुलन और कौशल देखने के लिए रोज सड़क पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो जाती थी। जब भी उसका तमाशा खत्म होता, दर्शक जोर-जोर से तालियां बजाते, उसकी कला की जमकर तारीफ करते और उसे इनाम के तौर पर पैसे देते थे।

हर बार करतब पूरा होने के बाद वह बच्चा सीधे अपने पिता के पास दौड़कर जाता और बड़ी उम्मीद से पूछता कि उसका आज का प्रदर्शन कैसा रहा। लेकिन पिता हर बार पूरी गंभीरता से बस एक ही बात दोहराते थे कि कसर रह गई। बाहर के लोगों से बेहिसाब वाहवाही और प्यार मिलने के बावजूद पिता हमेशा उसे यही समझाते थे कि अभी उसके खेल में सुधार की काफी गुंजाइश बाकी है।

कमी निकालने की वजह पर पिता का गहरा फलसफा

लगातार कई वर्षों तक ऐसा ही चलता रहा। हर दिन भीड़ तारीफ करती और हर दिन पिता यही कहते कि अभी कसर बाकी है। आखिरकार एक दिन तंग आकर उस बच्चे ने अपने पिता से पूछ ही लिया कि जब पूरी दुनिया उसके करतब की इतनी सराहना करती है और उसे बेहतरीन बताती है, तो वे हमेशा उसमें कोई न कोई कमी ही क्यों निकालते हैं।

इस पर बच्चे के पिता ने एक ऐसी सीख दी जो जिंदगी भर के लिए सबक बन गई। उन्होंने कहा कि जिस दिन वे उसकी तारीफ करना शुरू कर देंगे, उसी दिन उसका ध्यान और लगन अपने काम से भटक जाएगी। अगर वह तारीफों के जाल में उलझ गया, तो वह अपनी असल मंजिल तक पहुंचने के बजाय केवल लोगों की वाहवाही में खोकर रह जाएगा। रणबीर ने स्पष्ट किया कि कपूर खानदान में भी यही उसूल पीढ़ियों से लागू रहा है, जहां कामयाबी मिलने के बाद भी बच्चों को लगातार पसीना बहाने और अपने काम को निखारने पर जोर देने की सीख दी जाती रही है।

पृथ्वीराज कपूर से शुरू हुई इस परिवार की गौरवशाली विरासत

भारतीय सिनेमा के इतिहास में कपूर परिवार का योगदान बेहद मजबूत रहा है। इस पूरी फिल्मी विरासत की नींव पृथ्वीराज कपूर ने रखी थी, जिन्होंने थिएटर और शुरुआती सिनेमाई दौर में अपना बेमिसाल मुकाम बनाया। उनके बाद उनके तीनों बेटों राज कपूर, शम्मी कपूर और शशि कपूर ने इस मशाल को आगे बढ़ाया। इन तीनों भाइयों ने अपने-अपने विशिष्ट अंदाज से अभिनय की दुनिया में स्वतंत्र पहचान कायम की।

विशेष तौर पर राज कपूर ने अभिनय के साथ-साथ एक दूरदर्शी निर्देशक और निर्माता के तौर पर हिंदी सिनेमा को कई कालजयी फिल्में दीं। इसके बाद अगली पीढ़ी में राज कपूर के बेटों रणधीर कपूर, ऋषि कपूर और राजीव कपूर ने फिल्मों में कदम रखकर अभिनय परंपरा को जीवित रखा। इस विरासत को आगे बढ़ाते हुए करिश्मा कपूर, करीना कपूर खान और खुद रणबीर कपूर ने नई पीढ़ी के शीर्ष कलाकारों के रूप में अपनी अमिट छाप छोड़ी है।

सवाल-जवाब

रणबीर कपूर ने यह पारिवारिक किस्सा कहां साझा किया?
रणबीर कपूर ने यह वाकया टेलीविजन शो कौन बनेगा करोड़पति में अमिताभ बच्चन के साथ बातचीत के दौरान साझा किया।
राज कपूर ने अपने पिता पृथ्वीराज कपूर से क्या शिकायत की थी?
राज कपूर ने पूछा था कि जब वे इतना अच्छा काम कर रहे हैं और बड़े स्टार बन चुके हैं, तो उनके पिता कभी उनकी तारीफ या पीठ क्यों नहीं थपथपाते।
पृथ्वीराज कपूर ने राज कपूर को कौन सी कहानी सुनाई थी?
उन्होंने सड़क किनारे रस्सी पर संतुलन बनाकर करतब दिखाने वाले एक छोटे बच्चे और उसके पिता की कहानी सुनाई थी।
करतब दिखाने वाले बच्चे के पिता हर बार क्या जवाब देते थे?
लोगों की भारी तालियों और तारीफों के बावजूद पिता हर बार यही कहते थे कि कसर रह गई।
पिता ने अपने बेटे की तारीफ न करने की क्या वजह बताई?
पिता ने कहा कि जिस दिन वे तारीफ शुरू कर देंगे, उसी दिन बेटे का ध्यान काम से भटक जाएगा और वह मंजिल तक नहीं पहुंच पाएगा।
कपूर परिवार की फिल्मी विरासत की शुरुआत किसने की थी?
कपूर खानदान की सिनेमाई और थिएटर विरासत की नींव पृथ्वीराज कपूर ने रखी थी।
पृथ्वीराज कपूर के किन बेटों ने इस विरासत को आगे बढ़ाया?
उनके तीनों बेटों राज कपूर, शम्मी कपूर और शशि कपूर ने अभिनय जगत में आकर इस विरासत को आगे बढ़ाया।
राज कपूर के बेटों में कौन-कौन फिल्मों में आए?
राज कपूर के बेटे रणधीर कपूर, ऋषि कपूर और राजीव कपूर ने फिल्मों में कदम रखा था।
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