किचन वेस्ट से तैयार करें पौधों के लिए ताकतवर लिक्विड खाद, चावल के पानी में मिलाएं ये तीन चीजेंऐप्पल का नया लाइनअप: कौन सा आईफोन खरीदना समझदारी है और किन मॉडलों से दूरी बनाना बेहतरबजट रसोई में कैफे का अहसास, 3,000 रुपये के अंदर मिल रहे ये कॉफी और टी मेकर्ससनातन परंपरा में शिखा बांधने के पीछे क्या हैं आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और मानसिक रहस्यसाउंडबॉक्स राइडर पार्टी स्पीकर रिव्यू: बेहतरीन मजबूती और दमदार आवाज के साथ क्या 600 डॉलर खर्च करना सही फैसला है1.80 करोड़ की लागत से बनी हनुमान अंश ने 41 दिनों में बटोरे 300 करोड़, 3 महिला निर्माताओं का चमका सिताराडिजिटल मक्खी के दिमाग से लेखकों जैसे नए विचार गढ़ने का अनोखा प्रयोगचीन में आईफोन पर जल्द मिलेगा आधिकारिक भूकंप अलर्ट, सुरक्षा प्रणाली जोड़ने के लिए ऐपल से संपर्क जारीबेसन के पकौड़े तलने के बाद नहीं पड़ेंगे नरम, बैटर में मिलाएं एक खास सामग्रीजयपुर में कैश लोड करते समय बैंक ऑफ इंडिया के एटीएम से 42 लाख रुपये लूटे, पूरे शहर में नाकेबंदी
माधुरी दीक्षित और जैकी श्रॉफ का सदाबहार गीत: जब एक मासूम सवाल ने बना दिया इतिहासमनोरंजन
19 सित॰ 2026, 5:01 pm (2 घंटे पहले)· 1

माधुरी दीक्षित और जैकी श्रॉफ का सदाबहार गीत: जब एक मासूम सवाल ने बना दिया इतिहास

वर्ष 1992 की फिल्म 'संगीत' का लोकप्रिय गीत 'ओ रब्बा कोई तो बताए' आज भी अपनी मखमली गायकी, मार्मिक बोल और शानदार नृत्य प्रस्तुति के लिए श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करता है।

भारतीय सिनेमा के 1990 के दशक को सुरीले गीतों और भावपूर्ण धुनों का स्वर्णिम दौर माना जाता है। इसी कालखंड में एक ऐसा नगमा सामने आया जिसकी शुरुआती पंक्तियों में ही प्रेम की परिभाषा को लेकर एक निश्छल जिज्ञासा व्यक्त की गई थी। पार्श्व गायन की दुनिया के दो बड़े नाम, अनुराधा पौडवाल और सुरेश वाडकर, जब इस रचना के लिए एक साथ आए तो उन्होंने सुरों का एक ऐसा सम्मोहन रचा जिसने सुनने वालों को बरबस बांध लिया। पर्दे पर माधुरी दीक्षित के भावपूर्ण नृत्य कौशल और जैकी श्रॉफ के साथ उनकी बेमिसाल केमिस्ट्री ने इस पूरे दृश्य को जीवंत कर दिया। दशकों का समय बीत जाने के बाद भी जब कभी उस दौर की अमर रचनाओं की चर्चा छिड़ती है, तो इस विशिष्ट रचना का स्मरण अनायास ही हो आता है।

फिल्म संगीत का यादगार ताना-बाना और कलाकार

साल 1992 में सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई फीचर फिल्म 'संगीत' में दर्शकों को माधुरी दीक्षित और जैकी श्रॉफ की एक बिल्कुल अलग अंदाज की जोड़ी देखने को मिली थी। इस फिल्म का शीर्षक गीत 'ओ रब्बा कोई तो बताए प्यार होता है क्या' आज भी क्लासिक मेलोडी पसंद करने वाले श्रोताओं के दिलों में बेहद महफूज है। यह रचना केवल एक साधारण प्रेम गीत नहीं है, बल्कि इसमें दिल की कसक, विरह की तड़प और चाहत की गहराई का अत्यंत नाजुक चित्रण मिलता है।

ये भी पढ़ें

कलात्मक दृष्टिकोण से इस फिल्म में माधुरी दीक्षित ने दोहरी भूमिका निभाकर अपने अभिनय का लोहा मनवाया था। उन्होंने कहानी में मां निर्मला के साथ-साथ उसकी दृष्टिहीन पुत्री संगीता का चुनौतीपूर्ण किरदार भी निभाया। वहीं दूसरी ओर, अभिनेता जैकी श्रॉफ सेतुराम नामक एक राजस्थानी लोक गायक के रूप में दर्शकों के सम्मुख प्रस्तुत हुए थे। इस पूरे कथानक की धुरी एक अनाथ तथा आंखों की रोशनी से महरूम युवती संगीता के इर्द-गिर्द बुनी गई थी, जिसका सबसे बड़ा सपना सुर-साधना के जरिए अपनी पहचान बनाना और अपनी खोई हुई जैविक मां की तलाश पूरी करना था।

दिग्गज फनकारों का अनूठा रचनात्मक संगम

दक्षिण भारतीय सिनेमा के विख्यात फिल्मकार के. विश्वनाथ के कुशल निर्देशन की छाया में इस परियोजना को आकार दिया गया था। फिल्म का संपूर्ण ताना-बाना चूंकि स्वर और लय पर टिका था, इसलिए इसकी संगीत रचना की जिम्मेदारी उस दौर में सफलता के शिखर पर चल रही जोड़ी आनंद-मिलिंद को सौंपी गई। गीत के अत्यंत मर्मस्पर्शी शब्दों को मशहूर कलमकार संतोष आनंद ने तराशा था। आनंद-मिलिंद की सुमधुर तानों, संतोष आनंद की भावनात्मक लेखनी और गायकों के मखमली कंठ के सटीक तालमेल ने इस गीत को सदाबहार रोमांटिक धरोहर में बदल दिया।

गुलशन कुमार द्वारा प्रस्तुत की गई इस फिल्म की पूरी आत्मा वास्तव में इसके सुरम्य गीतों में ही समाई हुई थी। प्रेम की मासूमियत को बयां करने वाले मुख्य गीत के अतिरिक्त एलबम के कई अन्य ट्रैक्स ने भी उस जमाने में श्रोताओं को काफी आकर्षित किया। इनमें 'सात सुरों के तार बन गए', 'जो गीत नहीं जन्मा', 'चली आइयो राधे रानी' और 'मैं कंगना खनकाऊं' जैसे गीत प्रमुख रहे। व्यावसायिक दृष्टि से यद्यपि फिल्म टिकट खिड़की पर मध्यम दर्जे की कमाई ही दर्ज करा सकी, परंतु माधुरी दीक्षित के संवेदनशील अभिनय और अमर धुनों ने इसे संगीत प्रेमियों की स्मृति में हमेशा के लिए अमिट बना दिया।

सवाल-जवाब

फिल्म 'संगीत' किस वर्ष रिलीज हुई थी और इसके निर्देशक कौन थे?
यह फिल्म वर्ष 1992 में सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई थी और इसका निर्देशन जाने-माने फिल्मकार के. विश्वनाथ ने किया था।
गाने 'ओ रब्बा कोई तो बताए' को किन गायकों ने अपनी आवाज दी थी?
इस खूबसूरत गीत को मशहूर गायिका अनुराधा पौडवाल और गायक सुरेश वाडकर ने गाया था।
फिल्म 'संगीत' में माधुरी दीक्षित और जैकी श्रॉफ के क्या किरदार थे?
माधुरी दीक्षित ने मां निर्मला और दृष्टिहीन बेटी संगीता का दोहरा रोल निभाया था, जबकि जैकी श्रॉफ राजस्थानी लोक गायक सेतुराम बने थे।
इस फिल्म का संगीत और गीत किन फनकारों ने तैयार किया था?
फिल्म के गानों का संगीत आनंद-मिलिंद की जोड़ी ने दिया था और इसके बोल संतोष आनंद ने लिखे थे।
फिल्म 'संगीत' के अन्य प्रमुख गाने कौन से थे?
इस फिल्म के अन्य चर्चित गानों में 'सात सुरों के तार बन गए', 'जो गीत नहीं जन्मा', 'चली आइयो राधे रानी' और 'मैं कंगना खनकाऊं' शामिल थे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp