दैनिक जीवन की बेहद सामान्य लगने वाली चीजों से जीवन दर्शन तलाशना हमेशा से अमिताभ बच्चन की खासियत रही है। अभिनेता नियमित रूप से इंटरनेट और अपने व्यक्तिगत ब्लॉग पर प्रशंसकों के साथ अपने विचार साझा करते रहते हैं। इस बार उन्होंने हर रोज इस्तेमाल होने वाली लिफ्ट के तकनीकी तंत्र का सहारा लेकर यह समझाया कि जब परिस्थितियां चारों तरफ से प्रतिकूल लगने लगें, तब इंसान को किस तरह अपनी हिम्मत और निरंतरता बनाए रखनी चाहिए। उनका मानना है कि जटिल से जटिल अड़चनों को सुलझाने के लिए कभी-कभार सिर्फ एक नन्हा सा कदम उठाना ही पर्याप्त साबित होता है।
लिफ्ट के सेंसर और मानव संघर्ष का अनूठा तालमेल
अमिताभ बच्चन ने अपने लेख में समझाया कि कुछ बदलाव खामोशी से घटित हो जाते हैं, कुछ बातों के जरिए सामने आते हैं, जबकि कुछ मामलों में भरपूर जोर-आजमाइश की जरूरत पड़ती है, मगर परिणाम अंततः सामने जरूर आता है। इसी क्रम में उन्होंने आधुनिक लिफ्ट के दरवाजों की कार्यप्रणाली का जिक्र किया। जब कोई व्यक्ति लिफ्ट के भीतर कदम रखने में थोड़ा विलंब कर देता है, तो उसके सेंसर तय समय सीमा के बाद कपाट को अपने आप बंद करने लगते हैं। ऐसे नाजुक क्षण में यदि कोई व्यक्ति केवल एक उंगली भी उस रास्ते के बीच अड़ा दे, तो दरवाजा रुक जाता है और तुरंत पुनः पीछे हट जाता है।
इसी तकनीकी बनावट की तुलना वास्तविक जिंदगी की बाधाओं से करते हुए उन्होंने निरंतर प्रयास पर जोर दिया। उनका संदेश है कि हालात कितने भी कठोर क्यों न दिखाई दें, कोई न कोई रास्ता हमेशा खुला रहता है। जिस तरह मामूली सी उंगली का अवरोध विशाल लोहे के दरवाजे को दोबारा खुलने पर मजबूर कर देता है, ठीक वैसे ही व्यक्तिगत संकटों में इंसान का छोटा सा प्रयत्न भी बंद भाग्य को खोलने की ताकत रखता है। बिना हाथ-पैर हिलाए किसी अनुकूल परिणाम की उम्मीद बांधना व्यर्थ है, इसलिए व्यक्ति को हर हाल में अपनी कोशिश जारी रखनी चाहिए।
टेलीविजन पर जारी है क्विज शो का सफर
अपनी वैचारिक लेखनी के इतर अमिताभ बच्चन इस समय छोटे पर्दे पर गेम रियलिटी शो 'कौन बनेगा करोड़पति 18' की मेजबानी में व्यस्त हैं। इस लोकप्रिय क्विज कार्यक्रम की शुरुआत पहली बार सन 2000 में हुई थी, जिसके बाद इसने भारतीय मनोरंजन जगत में एक अद्वितीय मुकाम हासिल कर लिया। मूल रूप से यह कार्यक्रम चर्चित ब्रिटिश शो 'हू वांट्स टू बी अ मिलियनेयर?' का आधिकारिक हिंदी संस्करण है, जिसे भारतीय दर्शकों के मिजाज के अनुरूप ढाला गया है।
इस मंच पर आने वाले प्रतिभागियों को ज्ञान के बल पर करोड़पति बनने का सुनहरा अवसर मिलता है। खेल का प्रारूप ब्रिटिश कार्यक्रम की रूपरेखा पर ही आधारित है, जहां हॉटसीट पर बैठे दावेदार के सामने बहुविकल्पीय सवाल रखे जाते हैं। प्रत्येक प्रश्न के उत्तर स्वरूप चार विकल्प मौजूद रहते हैं, जिनमें से प्रतिभागी को एक सही उत्तर का चयन करना पड़ता है। किसी सवाल पर उलझन होने की स्थिति में उनके पास लाइफलाइन का सहारा लेने का भी विकल्प रहता है, जिसकी बदौलत वे आगे का सफर तय करते हैं।



















