मशहूर अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के बाद पुणे स्थित उनके पैतृक गांव डोंजे में उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ संपन्न किया गया. गोवा में 8 अक्टूबर को कार्डियक अरेस्ट की वजह से उनका देहांत हुआ था. इस दुखद घड़ी में जब अंतिम विदाई दी जा रही थी, तब फिल्म उद्योग के नामचीन चेहरों की अनुपस्थिति ने सभी का ध्यान खींचा. इसी मुद्दे को लेकर ‘देऊळ बंद 2’ फेम अभिनेता और निर्देशक प्रवीण तरडे ने अपना गहरा आक्रोश प्रकट किया है.
फिल्म जगत की बेरुखी पर प्रवीण तरडे के तीखे बोल
प्रवीण तरडे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अंतिम दर्शन के दौरान जाने-माने सितारों की गैर-हाजिरी बेहद चुभने वाली है. उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि खुद को दोस्त बताने वाले और महकते परफ्यूम लगाकर घूमने वाले सितारे इस मौके पर आखिर कहां चले गए. तरडे का कहना था कि अगर कोई उनसे पूछे कि क्या उन्हें इस गैर-मौजूदगी से कोई समस्या है, तो उनका जवाब पूरी तरह से हां में होगा. उनके मुताबिक, जो लोग जिंदगी भर साथ होने का दावा करते रहे, वे विदाई के वक्त नजर तक नहीं आए.
हजारों किसानों की मौजूदगी बनी असली ताकत
प्रवीण तरडे ने यह भी रेखांकित किया कि बड़ी हस्तियों के न आने से नाना पाटेकर का सामाजिक या सिनेमाई कद किसी भी तरह कम नहीं हो जाता. उन्होंने कहा कि नाना ने अपने काम और सामाजिक योगदान से जो मान-सम्मान कमाया, वह किसी दिखावे का मोहताज नहीं था. उनके अंतिम दर्शन के लिए हजारों की संख्या में किसान पहुंचे थे. तरडे ने भावुक होते हुए कहा कि वहां मौजूद लोगों के बदन से मिट्टी और पसीने की खुशबू आ रही थी, जो परफ्यूम लगाकर घूमने वाले लोगों की तुलना में कहीं अधिक सच्ची और अनमोल थी.
राजकीय विदाई और पहुंचे हुए खास चेहरे
अंतिम संस्कार के दौरान महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे श्रद्धांजलि देने डोंजे पहुंचे थे. इसके अलावा फिल्म जगत से अभिनेता जैकी श्रॉफ और संगीतकार सुरेश वाडकर भी वहां उपस्थित रहे. मुंबई के माहौल पर कटाक्ष करते हुए प्रवीण तरडे ने कहा कि मायानगरी में किसी छोटे-मोटे अभिनेता के गुजर जाने पर भी लोग सफेद लिबास पहनकर कतारों में खड़े दिखाई देते हैं, लेकिन नाना पाटेकर जैसी महान शख्सियत की अंतिम यात्रा में उनकी यह बेरुखी हैरान करने वाली है.



















