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ऋषिकेश में ऑटो चालकों की मनमानी से स्थानीय नागरिक परेशान, नियमित सिटी बस सेवा शुरू करने की उठी मांगउत्तराखंड
11 अक्तू॰ 2026, 3:12 pm (2 घंटे पहले)· 0

ऋषिकेश में ऑटो चालकों की मनमानी से स्थानीय नागरिक परेशान, नियमित सिटी बस सेवा शुरू करने की उठी मांग

ऋषिकेश में पर्यटन सीजन और वीकेंड्स पर ऑटो चालकों के मनमाने किराए तथा स्थानीय सवारियों को बैठाने से इनकार करने के कारण निवासियों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे निपटने के लिए अब नगर में इंटरसिटी बस सेवा और बेहतर पार्किंग की मांग तेज हो गई है।

उत्तराखंड का तीर्थ और पर्यटन केंद्र ऋषिकेश साल भर लाखों पर्यटकों को आकर्षित करता है, लेकिन इस निरंतर आमद से शहर के स्थायी निवासियों की रोजमर्रा की यात्रा बेहद कठिन हो गई है। बाजार, दफ्तर, कॉलेज या अस्पताल आने-जाने के लिए स्थानीय लोग मुख्य रूप से ऑटो रिक्शा और विक्रम जैसे सीमित सार्वजनिक साधनों पर आश्रित रहते हैं। पर्यटन सीजन के चरम पर और सप्ताहांत के दौरान यह निर्भरता गंभीर परेशानी का सबब बन जाती है, क्योंकि कई ऑटो चालक स्थानीय यात्रियों को बैठाने से साफ मना कर देते हैं या फिर केवल महंगी बुकिंग पर ही चलने की जिद करते हैं। जिन नागरिकों को दिन में कई बार किसी जरूरी काम से निकलना पड़ता है, उनके लिए यात्रा का खर्च और मानसिक तनाव दोनों लगातार बढ़ रहे हैं।

सीमित साधनों के बीच दैनिक यात्रियों पर आर्थिक बोझ

शहर के निवासियों का कहना है कि किफायती और व्यवस्थित इंटरसिटी बस सेवा न होने के कारण सार्वजनिक परिवहन का पूरा तंत्र ऑटो चालकों के हाथ में सिमट गया है। जब चालक मनमाना किराया वसूलते हैं या अकेली स्थानीय सवारी लेने से बचते हैं, तो लोगों के पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचता। छात्रों, कर्मचारियों और सामान्य नागरिकों को एक ही सफर पूरा करने के लिए बार-बार वाहन बदलने पड़ते हैं, जिससे उनका समय और बजट दोनों बिगड़ते हैं। नगरवासियों का स्पष्ट मत है कि यदि प्रशासन शहर के प्रमुख हिस्सों को जोड़ने वाली सुगम बस सेवा शुरू करे, तो उन्हें इस रोजमर्रा की असुविधा और आर्थिक दोहन से बड़ी राहत मिल सकेगी।

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छात्रों, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों की आवाजाही पर गहरा प्रभाव

ज्ञानशु का कहना है कि स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थानों में जाने वाले छात्र-छात्राएं प्रतिदिन ऑटो और विक्रम के सहारे यात्रा करते हैं। उनके अनुसार, यदि नगर के प्रमुख रिहायशी और शैक्षणिक इलाकों को जोड़ने वाली व्यवस्थित बस सेवा उपलब्ध करा दी जाए, तो आवागमन की यह प्रक्रिया कहीं अधिक सुरक्षित और सुगम हो जाएगी। यह सुविधा सिर्फ युवा वर्ग तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बुजुर्गों और महिलाओं को भी दैनिक कामकाज के लिए बाजार या अस्पताल पहुंचने में इससे सीधी मदद मिलेगी। सप्ताहांत और छुट्टियों में बाहरी सैलानियों की भारी भीड़ को देखते हुए ऐसी बस सेवा पर्यटकों और स्थानीय निवासियों दोनों के सफर को आसान बना सकती है।

पर्यटन सीजन में अनियंत्रित किराए और पार्किंग की समस्या

पिछले छह से सात वर्षों से शहर में रह रहे रवि बताते हैं कि यहां महज एक-दो नहीं, बल्कि कई मार्गों पर इंटरसिटी बसों के संचालन की सख्त जरूरत है। पर्यटन के व्यस्त दो से तीन महीनों के दौरान एक छोर से दूसरे छोर जाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है, क्योंकि चालक पर्यटकों से अधिक किराया आसानी से वसूल लेते हैं और उसी अनुपात में स्थानीय लोगों से भी अत्यधिक पैसों की मांग करने लगते हैं। रोहित इस समस्या के सुनियोजित समाधान पर जोर देते हुए कहते हैं कि पर्यटन सीजन में सार्वजनिक बसों की उपयोगिता तभी सार्थक होगी जब योजनाबद्ध व्यवस्था बनाई जाए। उनका सुझाव है कि नेपाली फार्म में एक व्यवस्थित पार्किंग स्थल बनाया जाना सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। जब तक स्थायी पार्किंग नहीं बनती, तब तक बसों का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाएगा। हरिद्वार से आने वाले टूरिस्ट ऑटो नेपाली फार्म में ही रुकें और वहां से यात्री इंटरसिटी बसों का सहारा लेकर शहर में प्रवेश करें, जिससे भीतरी सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव घटेगा और यात्रियों को भी सहूलियत होगी।

चार दशकों से जारी दुश्वारियां और स्थाई समाधान की गुहार

शहर में लगभग चालीस वर्षों से निवास कर रहे डॉ. राजकुमार का कहना है कि नगर में परिवहन के सीमित विकल्पों के कारण सामान्य आवागमन हमेशा से एक कठिन परीक्षा बना हुआ है। कई मोहल्लों और इलाकों तक पहुंचने के लिए लोगों को पूरी तरह से ऑटो और विक्रम पर ही निर्भर रहना पड़ता है। अक्सर जरूरत के समय वाहन आसानी से उपलब्ध नहीं होते, और लंबी दूरी तय करने के लिए यात्रियों को बीच रास्ते में बार-बार साधन बदलने पड़ते हैं। इस प्रक्रिया में समय का भारी नुकसान होता है और आने-जाने का कुल खर्च भी अप्रत्याशित रूप से बढ़ जाता है। नौकरीपेशा लोगों, बाजार जाने वाले परिवारों और आपात स्थिति में अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ती है। उनका मानना है कि यदि शासन स्तर पर शहर के भीतर नियमित समय सारिणी के अनुसार सिटी बस सेवा का परिचालन प्रारंभ किया जाए, तो दशकों पुरानी इस समस्या का स्थाई निराकरण हो सकता है।

सवाल-जवाब

ऋषिकेश के स्थानीय लोग यात्रा के लिए किन साधनों पर सबसे ज्यादा निर्भर हैं?
ऋषिकेश के निवासी रोजाना बाजार, दफ्तर, अस्पताल और कॉलेज आने-जाने के लिए मुख्य रूप से ऑटो रिक्शा और विक्रम पर निर्भर रहते हैं।
पर्यटन सीजन और वीकेंड्स पर स्थानीय नागरिकों को क्या परेशानी होती है?
पर्यटन सीजन और सप्ताहांत पर ऑटो चालक अक्सर स्थानीय सवारियों को बैठाने से मना कर देते हैं और केवल पर्यटकों से मनमाना किराया लेकर बुकिंग पर चलते हैं।
यातायात की समस्या को दूर करने के लिए नागरिकों ने क्या मांग रखी है?
नागरिकों ने शहर के प्रमुख इलाकों को आपस में जोड़ने वाली नियमित इंटरसिटी बस सेवा शुरू करने की मांग की है।
नेपाली फार्म पर पार्किंग बनाने का क्या सुझाव दिया गया है?
स्थानीय लोगों का सुझाव है कि नेपाली फार्म में पार्किंग बनाई जाए ताकि हरिद्वार से आने वाले टूरिस्ट वहीं रुकें और वहां से इंटरसिटी बस लेकर शहर में आएं, जिससे जाम कम हो सके।
डॉ. राजकुमार ने परिवहन समस्या के बारे में क्या बताया?
चालीस वर्षों से शहर में रह रहे डॉ. राजकुमार ने बताया कि वाहन आसानी से नहीं मिलते और दूरी तय करने के लिए बार-बार सवारी बदलनी पड़ती है, जिससे समय और धन दोनों का नुकसान होता है।
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टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·23 मिनट पहले

तीर्थस्थलों पर ऑटो वालों की मनमानी अब आम बात हो गई है, प्रशासन इस पर लगाम क्यों नहीं कसता? जब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक जनता यूँही परेशान होती रहेगी।

Ravikash Gupta@ravikash·22 मिनट पहले

अर्जुन, बिल्कुल सही कहा आपने। जैसे शेयर बाज़ार में बिना नियम के सब कुछ ऑपरेटर के हाथ में चला जाता है, यहाँ भी पूरा ट्रांसपोर्ट सिस्टम ऑटो वालों की मर्जी पर चल रहा है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·44 मिनट पहले

ऑटो वालों की ये मनमानी आम बात हो गई है, प्रशासन को इन पर लगाम कसनी ही होगी। शहर में सिटी बसें चल जाएं तो कम से कम रोज़ सफर करने वालों को राहत मिल जाएगी और जबरन वसूली बंद होगी।

Rohan Verma@rohan-verma·43 मिनट पहले

करण भाई, बिल्कुल सही कहा। अकेले ऋषिकेश ही नहीं, कई जगहों पर ऑटो वालों की दादागिरी आम हो गई है, प्रशासन को तुरंत बस चलानी चाहिए।

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