पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में राजनीतिक टकराव चरम पर पहुंच गया है, जहां प्रांतीय सरकार को बर्खास्त करते हुए आपातकाल और गवर्नर राज लागू कर दिया गया है। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने रविवार को संघीय मंत्रिमंडल की औपचारिक सिफारिश पर मुहर लगाते हुए यह असाधारण कदम उठाया। इमरान खान के नेतृत्व वाली पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के इस्लामाबाद कूच और विरोध प्रदर्शनों के बीच लिए गए इस फैसले ने देश के भीतर गंभीर संवैधानिक संकट खड़ा कर दिया है।
केंद्र के सीधे नियंत्रण से बड़े सुरक्षा संकट की आशंका
प्रांत में चुनी हुई सरकार को हटाकर केंद्र का प्रत्यक्ष नियंत्रण स्थापित करने की कोशिशों के बाद आंतरिक सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। एक संवेदनशील खुफिया रिपोर्ट में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि इस प्रशासनिक फेरबदल से बड़े पैमाने पर जनआक्रोश भड़क सकता है, जो अंततः गृहयुद्ध जैसे हालात और गंभीर अशांति का रूप ले सकता है। अफगानिस्तान सीमा से लगे इस संवेदनशील इलाके में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर पहले से ही तनाव बना हुआ था।
विपक्षी दल ने फैसले को बताया गंभीर भूल
इमरान खान की पार्टी ने खैबर पख्तूनख्वा की सरकार को भंग किए जाने और आपातकाल थोपने के कदम को एक भारी राजनीतिक भूल करार दिया है। पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों का लॉन्ग मार्च राजधानी की ओर बढ़ रहा था, जिसके दौरान कई नेताओं ने किसी भी दबाव के आगे न झुकने का संकल्प जताया था। प्रांतीय प्रशासन पर इस सीधी कार्रवाई के बाद पूरे पाकिस्तान में राजनीतिक स्थिरता पर गहरे सवाल खड़े हो गए हैं।


















