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मलयालम सिनेमा और रंगमंच की दिग्गज अदाकारा सावित्री श्रीधरन का 78 वर्ष की आयु में निधनमनोरंजन
24 सित॰ 2026, 10:50 am (1 दिन पहले)· 1

मलयालम सिनेमा और रंगमंच की दिग्गज अदाकारा सावित्री श्रीधरन का 78 वर्ष की आयु में निधन

पांच दशकों तक थिएटर मंच पर राज करने वाली और फिल्म सुदानी फ्रॉम नाइजीरिया से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाली वरिष्ठ अभिनेत्री सावित्री श्रीधरन का कोझिकोड में निधन हो गया।

मलयालम कला जगत की प्रतिष्ठित अभिनेत्री और अनुभवी रंगमंच कलाकार सावित्री श्रीधरन का कोझिकोड स्थित उनके आवास पर 23 सितंबर को निधन हो गया। वह 78 वर्ष की थीं। अपने पांच दशक लंबे कलात्मक सफर के दौरान उन्होंने मंच पर अनगिनत यादगार भूमिकाएं निभाईं और बाद के दौर में सिनेमा के पर्दे पर भी अपनी संवेदनशील अदाकारी से दर्शकों के दिलों में अमिट छाप छोड़ी। उनके निधन से दक्षिण भारतीय मनोरंजन जगत, विशेषकर मलयालम थिएटर और सिनेमा में शोक की लहर दौड़ गई है।

रंगमंच से शुरू हुआ पांच दशकों का शानदार सफर

सावित्री श्रीधरन का कलात्मक आधार मुख्य रूप से रंगमंच ही रहा, जहां उन्होंने लगभग पचास साल समर्पित भाव से काम किया। उनके नाट्य जीवन का औपचारिक आरंभ नाटक ‘करुथा वेलिचम’ के मंचन से हुआ था। इसके बाद करीब दो दशकों तक उन्होंने शौकिया यानी एमेच्योर थिएटर में काम करते हुए अपने अभिनय कौशल को तराशा। साल 1984 में उन्होंने पेशेवर रंगमंच की दुनिया में कदम रखा, जब वह केटी मोहम्मद के प्रतिष्ठित कलिंगा थिएटर से जुड़ीं और उनके नाटक ‘इथु भूमियानु’ में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

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इसके बाद के वर्षों में सावित्री श्रीधरन कई ऐतिहासिक और चर्चित नाटकों की केंद्रीय धुरी बनी रहीं। इनमें ‘काफिर’, ‘सृष्टि’, ‘दीपस्तंभम महाश्चर्यम’, ‘अचनुम बप्पायुम’, ‘साक्षात्कारम’, ‘कुचेलवृत्तम’ और ‘समन्वयम’ जैसे बेहद लोकप्रिय नाटक शामिल हैं। थिएटर जगत में उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें कई बार राज्य स्तरीय प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। मंच पर उनकी संवाद अदायगी और जीवंत अभिनय को दर्शक लंबे समय तक याद रखेंगे।

सिनेमा की दुनिया में देर से मिली व्यापक ख्याति

फिल्मों में सावित्री श्रीधरन की शुरुआत काफी पहले हो चुकी थी। उन्होंने साल 1991 में प्रख्यात लेखक व निर्देशक एमटी वासुदेवन नायर की फिल्म ‘कडवु’ के साथ बड़े पर्दे पर पहली बार कदम रखा था। हालांकि, उनका पहला प्यार हमेशा रंगमंच ही बना रहा, जिसके चलते उन्होंने फिल्मों से एक लंबा अंतराल ले लिया और सिनेमा से दूरी बनाए रखी। मंच पर अपनी सक्रियता जारी रखते हुए उन्होंने कई सालों बाद दोबारा सिल्वर स्क्रीन का रुख किया।

‘सुदानी फ्रॉम नाइजीरिया’ और राष्ट्रीय पहचान

उनके अभिनय करियर का सबसे निर्णायक और ऐतिहासिक मोड़ साल 2018 में आया, जब उन्होंने निर्देशक जकारिया मोहम्मद की स्पोर्ट्स-ड्रामा फिल्म ‘सुदानी फ्रॉम नाइजीरिया’ में अभिनय किया। इस फिल्म में उनके द्वारा निभाया गया जमीला का किरदार देश भर के सिनेप्रेमियों के दिलों को छू गया। एक ममतामयी मां के इस यथार्थवादी चित्रण के लिए उन्हें केरल स्टेट फिल्म अवॉर्ड में बेस्ट कैरेक्टर एक्ट्रेस का प्रतिष्ठित सम्मान हासिल हुआ। इतना ही नहीं, उनकी बेहतरीन अदाकारी को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में भी विशेष उल्लेख यानी स्पेशल मेंशन से नवाजा गया।

इस ऐतिहासिक सफलता के बाद उन्होंने सिनेमा में अपनी सक्रियता बढ़ाई और कई महत्वपूर्ण फिल्मों में चरित्र भूमिकाएं निभाईं। इनमें ‘डाकिनी’, ‘मेरा नाम शाजी’, ‘वायरस’, ‘इट्टीमानी: मेड इन चाइना’, ‘पड़ा’ और ‘पप्पन’ जैसी फिल्में शामिल हैं। बड़े पर्दे पर उनकी अंतिम उपस्थिति फिल्म ‘वयसेथ्रयायी मुप्पथी’ में दर्ज की गई थी।

सिनेमा जगत ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

सावित्री श्रीधरन के देहांत के समाचार के बाद कला जगत के तमाम कलाकारों ने शोक संवेदनाएं व्यक्त की हैं। फिल्म ‘सुदानी फ्रॉम नाइजीरिया’ के निर्देशक जकारिया और प्रमुख अभिनेता सौबिन शाहिर ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी इस वरिष्ठ सह-कलाकार को भावुक विदाई दी और उनके साथ काम करने के अनुभवों को साझा करते हुए दुख जताया। रंगमंच की इस सशक्त आवाज के चले जाने से भारतीय अभिनय जगत ने एक ऐसी नैसर्गिक प्रतिभा को खो दिया है, जिसने सादगी और गहराई के साथ कला की सेवा की।

सवाल-जवाब

सावित्री श्रीधरन कौन थीं?
सावित्री श्रीधरन मलयालम सिनेमा और रंगमंच की मशहूर अभिनेत्री थीं, जिन्होंने लगभग पांच दशकों तक थिएटर में काम किया और राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त की।
उनका निधन कब और कहां हुआ?
उनका निधन 23 सितंबर को 78 वर्ष की आयु में कोझिकोड स्थित उनके आवास पर हुआ।
सावित्री श्रीधरन को सिनेमा में सबसे ज्यादा पहचान किस फिल्म से मिली?
उन्हें साल 2018 में आई निर्देशक जकारिया की फिल्म ‘सुदानी फ्रॉम नाइजीरिया’ में जमीला के किरदार से देश भर में व्यापक पहचान मिली।
‘सुदानी फ्रॉम नाइजीरिया’ के लिए उन्हें कौन से पुरस्कार मिले?
इस फिल्म के लिए उन्हें केरल स्टेट फिल्म अवॉर्ड में बेस्ट कैरेक्टर एक्ट्रेस का खिताब और नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में स्पेशल मेंशन मिला था।
उन्होंने पेशेवर रंगमंच की शुरुआत किस नाटक से की थी?
उन्होंने 1984 में केटी मोहम्मद के कालींगा थिएटर के नाटक ‘इथु भूमियानु’ से अपने पेशेवर थिएटर करियर की शुरुआत की थी।
सावित्री श्रीधरन की पहली और आखिरी फिल्म कौन सी थी?
उन्होंने 1991 में फिल्म ‘कडवु’ से डेब्यू किया था और उनकी आखिरी फिल्म ‘वयसेथ्रयायी मुप्पथी’ रही।
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