फिल्म जगत में कई दशकों से सक्रिय अभिनेता सलमान खान ने अपने लंबे सफर में बेहद विविधता भरे किरदारों को पर्दे पर जिया है। नब्बे के दशक में ‘मैंने प्यार किया’ से एक संवेदनशील रोमांटिक नायक और ‘हम साथ साथ हैं’ में संस्कारी बेटे व प्यारे प्रेमी की छवि स्थापित करने के बाद उन्होंने सदी के बदलाव के साथ अपने अभिनय के दायरे का तेजी से विस्तार किया। साल 2000 के दशक में कदम रखते ही उनके किरदारों के चुनाव में एक नया मोड़ देखने को मिला, जहां उन्होंने विशुद्ध एक्शन और भावनात्मक ड्रामा के साथ बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग वाली कहानियों को चुना। इस पूरे बदलाव के दौरान दर्शकों ने उनके हर नए प्रयोग को भरपूर सराहना दी। उस दौर की कुछ खास फिल्में आज भी डिजिटल स्ट्रीमिंग पर दर्शकों के बीच उतनी ही लोकप्रिय हैं, जिन्हें दर्शक जियो हॉटस्टार पर स्ट्रीम कर सकते हैं।
पारिवारिक रिश्तों की कसौटी पर बागवान का भावुक किरदार
साल 2003 में रिलीज हुई फिल्म ‘बागवान’ ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार सफलता हासिल की थी। निर्देशक रवि चोपड़ा द्वारा निर्देशित इस फिल्म की मुख्य धुरी अमिताभ बच्चन और हेमा मालिनी द्वारा निभाए गए माता-पिता के चरित्र थे। इस भावनात्मक कथा में परेश रावल, महिमा चौधरी, अमन वर्मा और रिमी सेन जैसे कलाकारों ने भी अहम भूमिकाएं निभाई थीं। कहानी एक ऐसे बुजुर्ग दंपती के जीवन संघर्ष को रेखांकित करती है, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी और सारी खुशियां अपने चार बेटों की परवरिश पर न्योछावर कर दीं, मगर बुढ़ापे की दहलीज पर वही बेटे स्वार्थी बनकर उन्हें अलग कर देते हैं और गहरा मानसिक कष्ट पहुंचाते हैं।
इस पूरी पृष्ठभूमि के बीच सलमान खान एक विशेष और प्रभावशाली भूमिका में सामने आए। उन्होंने एक ऐसे दत्तक पुत्र का किरदार निभाया जो रक्त संबंधों वाले सगे बेटों से कहीं आगे बढ़कर अपने माता-पिता के मान-सम्मान और सेवा के लिए खड़ा होता है। सलमान का यह संवेदनशील रूप फिल्म के भावनात्मक प्रभाव को शिखर तक ले जाता है, और यही वजह है कि पारिवारिक सिनेमा के शौकीनों के लिए यह फिल्म आज भी बेहद प्रासंगिक बनी हुई है।
मुझसे शादी करोगी में रोमांस और कॉमेडी की जुगलबंदी
साल 2004 में सिनेमाघरों में आई ‘मुझसे शादी करोगी’ ने बड़े पर्दे पर एक अनूठी कॉमिक ऊर्जा पेश की थी। निर्देशक डेविड धवन के निर्देशन में तैयार इस फिल्म में सलमान खान और अक्षय कुमार की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री को दर्शकों ने हाथों-हाथ लिया था। इस कहानी में प्रियंका चोपड़ा मुख्य अभिनेत्री की भूमिका में नजर आई थीं, जिन्हें पाने के लिए समीर और सनी नाम के दो युवकों के बीच मजेदार खींचतान शुरू होती है।
एक ही लड़की के दिल में जगह बनाने की इस दौड़ में दोनों किरदारों के बीच की नोकझोंक और चुटीले संवाद दर्शकों को खूब हंसाते हैं। फिल्म का संगीत साजिद-वाजिद और अनु मलिक ने मिलकर तैयार किया था, जिसके गाने चार्टबस्टर साबित हुए और फिल्म ने टिकट खिड़की पर जोरदार कमाई दर्ज की। कहानी का अंतिम मोड़ और क्लाइमैक्स का अप्रत्याशित ट्विस्ट अंत तक दर्शकों का पूरा मनोरंजन करता है, जिससे यह फिल्म कॉमेडी के शौकीनों की पसंदीदा सूची में शामिल रही है।
दुल्हन हम ले जाएंगे में तीन मामाओं को साधने की चुनौती
सलमान खान और डेविड धवन की रचनात्मक साझेदारी ने बॉक्स ऑफिस पर कई यादगार और मनोरंजक फिल्में दी हैं। इसी क्रम में साल 2000 में आई फिल्म ‘दुल्हन हम ले जाएंगे’ ने दर्शकों का दिल जीता था। इस फिल्म में सलमान खान के साथ करिश्मा कपूर की लोकप्रिय जोड़ी देखने को मिली थी।
फिल्म का ताना-बाना एक प्रेम कहानी के इर्द-गिर्द बुना गया है, जिसमें नायक को अपनी प्रेमिका से शादी करने के लिए उसके तीन अलग-अलग मिजाज वाले मामाओं की सहमति हासिल करनी होती है। लड़की के अभिभावकों को रिझाने, उनकी अजीबोगरीब शर्तों को पूरा करने और उनके दिल में जगह बनाने के लिए नायक द्वारा किए जाने वाले संघर्ष को बेहद हास्यप्रद तरीके से परोसा गया है। यह हल्की-फुल्की मनोरंजक फिल्म भी वर्तमान में ओटीटी पर उपलब्ध है।
लकी नो टाइम फॉर लव और नई सह-कलाकार की चर्चा
साल 2005 में प्रदर्शित हुई फिल्म ‘लकी नो टाइम फॉर लव’ के जरिए सलमान खान ने एक नई अभिनेत्री स्नेहा उल्लाल को बॉलीवुड में पेश किया था। इस फिल्म के कलाकारों में विक्रम गोखले और कादर खान जैसे मंझे हुए अभिनेता भी शामिल थे। फिल्म के पर्दे पर आते ही स्नेहा उल्लाल के चेहरे-मोहरे की तुलना ऐश्वर्या राय से की जाने लगी, जिससे वह रातों-रात व्यापक चर्चा के केंद्र में आ गईं।
ऐश्वर्या राय से रूप-रंग के मेल को लेकर उस समय मीडिया और दर्शकों के बीच जबरदस्त कौतूहल बना रहा था। हालांकि, इस शुरुआती लोकप्रियता के बावजूद स्नेहा उल्लाल धीरे-धीरे फिल्म जगत की मुख्यधारा से दूर होती चली गईं। बाद में यह बात सामने आई कि वह ऑटोइम्यून डिसऑर्डर नामक स्वास्थ्य समस्या से जूझ रही थीं, और इसी गंभीर बीमारी के चलते उन्होंने फिल्मों में नियमित अभिनय से दूरी बना ली थी।
बाबुल के जरिए विधवा पुनर्विवाह का गंभीर सामाजिक संदेश
साल 2006 में आई फिल्म ‘बाबुल’ के साथ निर्देशक रवि चोपड़ा ने एक बार फिर सामाजिक और पारिवारिक संवेदनाओं को बड़े पर्दे पर उतारा। इस फिल्म में उन्होंने ‘बागवान’ के मुख्य कलाकारों अमिताभ बच्चन और हेमा मालिनी को फिर से साथ लाने के साथ-साथ सलमान खान को भी एक खास और अहम भूमिका सौंपी। फिल्म में रानी मुखर्जी ने मुख्य किरदार निभाया था।
यह कहानी एक संवेदनशील फैमिली ड्रामा है जो रूढ़िवादी सोच से परे जाकर विधवा पुनर्विवाह के मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाती है। इसमें एक ससुर द्वारा अपने बेटे की असामयिक मृत्यु के बाद अपनी बहू की उजड़ी जिंदगी को दोबारा संवारने और उसे खुशियों से भरने के साहसी फैसले को गहराई के साथ चित्रित किया गया है।



















