पौराणिक महाकाव्यों पर आधारित फिल्मों को लेकर सिनेमा जगत में हमेशा उत्सुकता रहती है, लेकिन ऐसे प्रतिष्ठित किरदारों को पर्दे पर उतारना कलाकारों के लिए एक बड़ी चुनौती भी साबित होता है। फिल्म 'श्री रामायण कथा' में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का किरदार निभाने जा रहे अभिनेता देव शर्मा के सामने भी कुछ ऐसी ही दुविधा खड़ी हो गई थी। जब पहली बार उन्हें इस मुख्य भूमिका की पेशकश की गई, तो उनका पहला जवाब सकारात्मक नहीं था। वह इस पवित्र और गंभीर भूमिका को स्वीकार करने से झिझक रहे थे और उन्होंने शुरुआत में इस प्रोजेक्ट को करने से इनकार तक कर दिया था।
रविवार की दोपहर और अचानक आया निर्देशक का फोन
देव शर्मा ने उस घटना को याद करते हुए साझा किया कि यह वाकया एक रविवार का था, जब वह अपने घर पर आराम से बैठकर आलू के पराठे खा रहे थे। उसी दौरान फिल्म के निर्देशक अभिषेक सिंह का फोन उनके पास आया। निर्देशक ने अपने नए सिनेमाई प्रोजेक्ट की रूपरेखा साझा की। देव शर्मा को उस क्षण बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि उन्हें कौन सा रोल दिया जाने वाला है। उन्हें मन ही मन लगा कि शायद निर्देशक उन्हें लक्ष्मण या फिर रावण जैसे किसी अन्य महत्वपूर्ण किरदार के लिए कास्ट करना चाहते हैं।
जब सामने आया मुख्य किरदार का प्रस्ताव
जैसे ही निर्देशक अभिषेक सिंह ने स्पष्ट किया कि वह देव को किसी सहायक किरदार के लिए नहीं, बल्कि खुद भगवान राम की केंद्रीय भूमिका में देखना चाहते हैं, अभिनेता पूरी तरह चौंक गए। देव शर्मा के अनुसार, अपने अब तक के अभिनय करियर में उन्होंने ज्यादातर समकालीन, मॉडर्न और थोड़े लाउड किस्म के किरदारों को ही पर्दे पर जिया था। उन्हें हमेशा से यही महसूस होता था कि इस प्रकार के रोल उनकी स्वाभाविक अभिनय शैली के अधिक अनुकूल हैं। भगवान राम के पावन चरित्र की गंभीरता, गरिमा और उसके साथ जुड़ी विशाल नैतिक जिम्मेदारी को लेकर वह गहरे असमंजस में पड़ गए थे।
रणबीर कपूर की रामायण और बजट का मुकाबला
इस भूमिका को लेकर संकोच करने की एक और बहुत बड़ी वजह इंडस्ट्री में पहले से बन रही एक अन्य फिल्म थी। देव शर्मा के मन में यह स्पष्ट सवाल था कि जब रणबीर कपूर और साई पल्लवी के मुख्य अभिनय वाली भारी-भरकम बजट की 'रामायण' पर काम चल ही रहा है, तो फिर उसी पौराणिक गाथा पर एक और नई फिल्म बनाने का क्या औचित्य है। उन्होंने सीधे निर्माताओं से भी यह सवाल उठाया कि दर्शकों के सामने एक ही विषय को दोबारा पेश करने की क्या आवश्यकता है।
दिवंगत पिता की सीख जिसने बदल दिया नजरिया
जिस समय यह सारी बातचीत चल रही थी, देव शर्मा अपने पिता के पास ही बैठे हुए थे। उनके पिता, जिनका करीब दो साल पहले देहांत हो चुका है, उन्होंने अभिनेता की उलझनों को बेहद शांत और सीधे तरीके से सुलझाया। पिता ने उनसे कहा कि घर बैठकर इतने सारे सवाल खड़े करने और पहले से राय बनाने के बजाय उन्हें एक बार जाकर फिल्म के निर्माताओं और पूरी टीम से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करनी चाहिए। पिता के इस सीधे और व्यावहारिक सुझाव ने देव की सोच का रुख ही बदल दिया। उन्होंने पिता की बात मानी, फिल्म के रचनाकारों से बातचीत की और आखिरकार इस ऐतिहासिक किरदार को जीवंत करने के लिए अपनी सहमति दे दी।
प्रामाणिकता के साथ नई पीढ़ी तक पहुंचने का प्रयास
अभिनेत्री अंजलि अरोड़ा के साथ इस प्रोजेक्ट में जुड़े देव शर्मा का मानना है कि 'श्री रामायण कथा' का मुख्य उद्देश्य इस महान गाथा की मूल आत्मा और ऐतिहासिक प्रामाणिकता को सुरक्षित रखते हुए इसे आज के युवाओं और नई पीढ़ी के सामने पेश करना है। हालांकि कहानी का सार और घटनाएं वही हैं जिनसे लोग पीढ़ियों से भली-भांति परिचित हैं, लेकिन इसे बड़े पर्दे पर दिखाने के अंदाज में एक नवीनता लाने का गंभीर प्रयास किया गया है। यह बहुप्रतीक्षित फिल्म 25 सितंबर को सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने जा रही है।



















