मतदाता सूचियों से नागरिकों के नाम अप्रत्याशित रूप से गायब होने और मतदान अधिकारों पर उठ रहे सवालों के बीच वरिष्ठ अभिनेत्री शबाना आजमी ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने इंटरनेट मीडिया पर एक संदेश साझा करते हुए मुंबईवासियों को गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित होने वाले व्यापक शांतिपूर्ण विरोध में सम्मिलित होने का आग्रह किया है। यह प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी नामक संगठन की अगुवाई में तैयार किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर राष्ट्रव्यापी स्तर पर अपनी बात रखना है।
मताधिकार के महत्व और प्रशासनिक अड़चनों पर उठाए सवाल
शबाना आजमी ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में मत की शक्ति को रेखांकित करते हुए कहा कि एक नागरिक का वोट राष्ट्र की दशा बदल सकता है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि यदि किसी व्यक्ति का नाम ही सूची से विलोपित कर दिया जाए अथवा उसके मत की प्रासंगिकता समाप्त कर दी जाए, तो नागरिकों के पास अपनी आवाज दर्ज कराने का क्या मार्ग बचता है। प्रशासन द्वारा इस मार्च की औपचारिक अनुमति न मिलने की जानकारी देते हुए उन्होंने नागरिकों से अपने संवैधानिक हक के लिए आगे आने को कहा।
सवाल पूछना हमारा संवैधानिक अधिकार है।
अभिनेत्री ने यह स्पष्ट किया कि कई बार आवेदन देने के बाद भी प्रशासन ने सभा को स्वीकृति प्रदान नहीं की, लेकिन व्यवस्था से जवाबदेही मांगना संविधान सम्मत है। उन्होंने जनता को 2 अक्टूबर की शाम 4 बजे शिवाजी पार्क पहुंचने का खुला निमंत्रण दिया और स्वयं भी वहां उपस्थित रहकर नागरिकों के साथ खड़े होने का भरोसा दिलाया।
एसआईआर विवाद और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे
विवाद की मुख्य जड़ स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) की कवायद तथा मतदाता सूची में दर्ज विसंगतियां हैं। अभिजीत दिपके द्वारा स्थापित कॉकरोच जनता पार्टी ने इसी मामले पर देशव्यापी अभियान छेड़ने का निर्णय लिया है। संगठन का आरोप है कि बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।
संगठन की प्रमुख प्रशासनिक मांगें
आंदोलनकारी समूह ने चुनाव प्रणाली की शुचिता बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार एवं प्रशासन के सम्मुख कई कड़ी शर्तें रखी हैं
- मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा: समूह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के त्यागपत्र की मांग पर अड़ा हुआ है।
- सूची को फ्रीज करने की मांग: वर्ष 2025 की मौजूदा मतदाता सूची पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की पैरवी की गई है।
- नियुक्ति में पारदर्शिता: चुनाव आयोग के शीर्ष पदों पर होने वाले चयन को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने की बात उठाई गई है।
अभिनेत्री के इस खुलासे के बाद मुंबई में गांधी जयंती के दिन होने वाले इस शक्ति प्रदर्शन पर सभी की निगाहें टिक गई हैं। आयोजकों का मानना है कि शिवाजी पार्क का यह जमावड़ा भविष्य में चुनावी सुधारों के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है।


















