निजी कंपनियों में भी लागू हो चाइल्ड केयर लीव और मिले पिताओं को 365 दिन की छुट्टी, राष्ट्रीय महिला आयोग का बड़ा प्रस्तावव्यस्त दिनचर्या में भी मिनटों में परोसें गरमा-गरम आलू पराठा, अपनाएं एडवांस तैयारी की यह आसान विधिबाहर से सेहतमंद दिखने वालों को भी घेर रहा दिल का दौरा, आठ सालों में तीन गुना बढ़े मामलेदेहरादून में जाम से मिलेगी मुक्ति, मसूरी जाने वाले मुसाफिरों के लिए मैक्स अस्पताल से धोरण तक बनेगा एलिवेटेड टनल मार्गईटानगर में कचरा गाड़ियों की लाइव ट्रैकिंग के लिए नया मोबाइल ऐप शुरू, मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने किया उद्घाटनसीमा पर ड्रैगन की चालबाजी होगी नाकाम, केंद्र ने लद्दाख के 28 भौगोलिक स्थानों के आधिकारिक नाम किए तयकम बजट में सजाएं अपना आशियाना, 1500 रुपये से कम में मिलने वाले 8 आकर्षक फेस्टिव डेकोर प्रोडक्ट्सबिना मिट्टी के छत पर उगाएं हरी सब्जियां, हाइड्रोपोनिक विधि से कम जगह और कम पानी में तैयार होगा किचन गार्डनहोटल में प्रेम प्रकाश खींची की मौत पर भड़का आक्रोश, परिजनों और वकीलों ने रोका टोंक रोडअमेरिकी रोजगार आंकड़ों में भारी गिरावट से डॉलर फिसला, यूरो में 1.1260 के करीब लौटी रिकवरी
सास बहू और भूत शो बना यूट्यूब पर चर्चा का विषय, 40 वर्ष बाद आजाद आत्मा फंसी पारिवारिक कलेश मेंमनोरंजन
2 अक्तू॰ 2026, 5:43 pm (2 घंटे पहले)· 0

सास बहू और भूत शो बना यूट्यूब पर चर्चा का विषय, 40 वर्ष बाद आजाद आत्मा फंसी पारिवारिक कलेश में

यूट्यूब पर प्रसारित हो रहे नए कॉमेडी शो 'सास, बहू और भूत' में चार दशकों से बोतल में बंद आत्मा को सास-बहू के घरेलू झगड़े झेलने पड़ रहे हैं। राजेश रणशिंगे निर्मित और संकेत श्रीरंग चक्रवर्ती निर्देशित यह धारावाहिक शाम 7 बजे प्रसारित हो रहा है।

पारंपरिक हॉरर कहानियों में आत्माएं इंसानों को डराने और आतंक फैलाने के लिए पहचानी जाती हैं, मगर डिजिटल माध्यम पर प्रस्तुत एक नए धारावाहिक ने इस स्थापित ढर्रे को पूरी तरह पलट कर रख दिया है। आरडीसी टीवी चैनल पर शुरू हुआ वेब शो 'सास, बहू और भूत' एक ऐसे जिन्न जैसी आत्मा की दास्तान लेकर आया है, जो लंबे समय तक कैद रहने के बाद मुक्ति तो पाता है, लेकिन उसे क्या मालूम था कि उसका सामना दो तीखे मिजाज वाली महिलाओं के रोजमर्रा के झगड़ों से होने जा रहा है। हास्य और भूतिया माहौल के इस अनोखे मिश्रण में आत्मा खुद इंसानी गृहक्लेश से पनाह मांगती नजर आ रही है।

दीमक धाम और लाल बोतल का पुराना रहस्य

इस विचित्र घटनाक्रम की शुरुआत साल 1976 के दौर से जुड़ती है, जहां धूल और जालों से भरा एक वीरान बंगला 'दीमक धाम' मौजूद था। इसी बंगले के एक अंधेरे और उपेक्षित कोने में लाल रंग की कांच की आकर्षक बोतल रखी हुई थी। इस बोतल के भीतर पिछले 40 सालों से एक बेबस भूत कैद पड़ा हुआ था। वह लगातार छटपटाते हुए यह विनती करता रहता था कि जो कोई भी उसे इस बंदिश से रिहा करेगा, वह अगले सात सालों तक निष्ठापूर्वक उसका गुलाम बनकर सेवा करेगा। चार दशकों तक उस खंडहर में उसकी पुकार सुनने वाला कोई नहीं पहुंचा, जब तक कि उस परिसर में साल्गांवकर परिवार ने अपना ठिकाना नहीं बनाया।

ये भी पढ़ें

साल्गांवकर परिवार का प्रवेश और ताले की जंग

दीमक धाम की चौखट पर पहुंचे साल्गांवकर परिवार में कुल चार सदस्य शामिल थे। इनमें अपनी कड़वी और तीखी जुबान के लिए जानी जाने वाली सास, किसी भी मुद्दे पर मुंहतोड़ और हाजिरजवाब जवाब देने वाली बहू, शांति पसंद सीधे-साधे ससुर और दोनों महिलाओं के बीच में निरंतर पिसता हुआ बेटा था। उनके साथ परिवार का एक पुराना वफादार नौकर भी वहां मौजूद था। नए आशियाने में कदम रखते ही सास और बहू के बीच तीखी नोक-झोंक शुरू हो गई। इसी दौरान घर के एक कोने में भारी ताले से बंद रहस्यमयी कमरे पर दोनों की नजरें टिक गईं।

घर के पुराने नौकर ने उन्हें साफ शब्दों में चेतावनी दी कि मालिक ने इस खास कमरे को खोलने पर सख्त पाबंदी लगा रखी है। इसके बावजूद सास और बहू अपनी हठ पर अड़ी रहीं और किसी तरह चाबी हासिल करके उस प्रतिबंधित कमरे में दाखिल हो गईं। कबाड़ के सामान के बीच चमकती लाल बोतल को देखकर दोनों के भीतर उसे हासिल करने का लालच जाग उठा। दोनों के बीच इस बात को लेकर छीना-झपटी मच गई कि उस खूबसूरत बोतल पर किसका मालिकाना हक होगा। इसी तनातनी के दौरान वह बोतल हाथ से फिसलकर फर्श पर गिरी और टुकड़ों में बिखर गई।

आजादी का जश्न और शुरू हुआ असली कलेश

बोतल के टूटते ही कमरे में घना धुआं फैल गया और चार दशकों से फंसी आत्मा आजाद हो गई। बंधनमुक्त होने के उत्साह में भूत ने गर्व से अपना 40 साल पुराना वचन दोहराया कि वह अगले सात वर्षों तक उन दोनों महिलाओं की गुलामी स्वीकार करेगा। मगर बेचारे भूत की यह खुशी पल भर में काफूर हो गई। रिहा होते ही उसके सामने सास-बहू का भीषण क्लेश शुरू हो गया, जिसमें तानेबाजी, बर्तन पटकने की गूंज और चीख-पुकार का माहौल बन गया।

जो रूह दशकों तक लोगों में खौफ पैदा करने का दावा करती थी, वह इन दोनों महिलाओं के घरेलू झगड़ों के आगे बेबस हो गई। भूत की स्थिति इतनी दयनीय हो गई कि वह अपनी जान और मानसिक शांति बचाने के लिए कभी सोफे के पीछे दुबक जाता तो कभी भागकर फ्रिज के ऊपर चढ़ जाता। ससुर, बेटा और नौकर भी इस अराजक माहौल में आग में घी डालने जैसा काम करते रहे।

अतरंगी किरदारों की दस्तक और निर्माण दल

जब हालात पूरी तरह बेकाबू होने लगे, तब मामले को संभालने के लिए तेज-तर्रार पुलिस इंस्पेक्टर सौदामिनी और एक अजीबोगरीब तांत्रिक का आगमन हुआ। इन दोनों की मौजूदगी ने डर के वातावरण को शुद्ध हास्य और ठहाकों में तब्दील कर दिया। इस 20 से 25 मिनट के एपिसोड वाले शो का प्रसारण आरडीसी टीवी चैनल के यूट्यूब मंच पर हर शाम 7 बजे किया जा रहा है।

इस धारावाहिक का निर्देशन संकेत श्रीरंग चक्रवर्ती ने किया है, जबकि इसके निर्माता राजेश रणशिंगे हैं। कलाकारों के प्रदर्शन की बात करें तो परन गाला और प्राची घिल्डियाल ने सास और बहू की तीखी केमिस्ट्री को बखूबी निभाया है। वहीं अभिनेता पंकज उपाध्याय ने एक डरे-सहमे, परेशान हाल भूत के किरदार में अपनी कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को खूब हंसाया है।

सवाल-जवाब

शो 'सास, बहू और भूत' का प्रसारण किस प्लेटफॉर्म और समय पर होता है?
यह शो यूट्यूब के आरडीसी टीवी चैनल पर रोजाना शाम 7 बजे प्रसारित होता है।
इस धारावाहिक के निर्माता और निर्देशक कौन हैं?
इस वेब शो का निर्देशन संकेत श्रीरंग चक्रवर्ती ने किया है और इसके निर्माता राजेश रणशिंगे हैं।
भूत कितने सालों से बोतल में बंद था और उसकी क्या शर्त थी?
भूत 40 सालों से लाल कांच की बोतल में बंद था और उसने रिहा करने वाले की सात साल तक गुलामी करने का वादा किया था।
शो में मुख्य भूमिकाएं कौन से कलाकार निभा रहे हैं?
शो में परन गाला और प्राची घिल्डियाल सास-बहू के रूप में हैं, जबकि पंकज उपाध्याय परेशान भूत का किरदार निभा रहे हैं।
साल्गांवकर परिवार जिस बंगले में रहने आया, उसका क्या नाम था?
साल्गांवकर परिवार साल 1976 के पुराने और वीरान बंगले 'दीमक धाम' में रहने आया था।
एपिसोड की समय सीमा कितनी है?
इस शो का प्रत्येक एपिसोड लगभग 20 से 25 मिनट की अवधि का है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp