जर्मनी की विशाल वाहन निर्माता कंपनी फॉक्सवैगन के निदेशक मंडल ने एक बड़े टर्नअराउंड प्रोग्राम के तहत अतिरिक्त 50,000 पदों को समाप्त करने की योजना पर मुहर लगा दी है। इस नवीनतम निर्णय के बाद, वर्ष 2030 तक कंपनी द्वारा कुल मिलाकर 100,000 कर्मचारियों की छंटनी किए जाने का लक्ष्य तय हो गया है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ओलिवर ब्लूम ने गुरुवार को जारी एक आधिकारिक बयान में इस कदम को भविष्य के लिए एक बेहद मजबूत संदेश करार दिया और कहा कि संगठन अपने संपूर्ण कार्यबल के प्रति पूरी तरह जवाबदेह है।
मुनाफे में गिरावट और उत्पादन कटौती
लोकप्रिय गोल्फ मॉडल का निर्माण करने वाली इस कंपनी को पिछले कुछ समय से भारी मुनाफे में गिरावट का सामना करना पड़ रहा है। बिक्री में आई सुस्ती और विशेष तौर पर चीनी ब्रांडों की ओर से मिल रही कड़ी टक्कर ने कंपनी के वित्तीय स्वास्थ्य को प्रभावित किया है। इस स्थिति से निपटने के लिए फॉक्सवैगन ने घोषणा की है कि वह साल 2035 तक अपने कुल उत्पाद मॉडलों की संख्या में 50 प्रतिशत की भारी कटौती करेगी। इसके साथ ही पेशकश की जटिलता को भी 75 प्रतिशत तक कम किया जाएगा ताकि परिचालन को अधिक सुगम बनाया जा सके।
कंपनी का यह भी कहना है कि वह सबसे आकर्षक वाहनों को प्राथमिकता देगी और प्रत्येक मॉडल का उत्पादन बड़े पैमाने पर करेगी, जिससे लागत को नीचे लाने में सीधी मदद मिलेगी। इस व्यापक रणनीति के तहत प्रबंधन स्तर के पदों सहित संपूर्ण वैश्विक कार्यबल क्षमता में मौलिक समायोजन करना अनिवार्य हो गया है, क्योंकि संगठन बदलती उपभोक्ता मांग और तीव्र तकनीकी बदलावों के दौर से गुजर रहा है।
वैश्विक स्तर पर पौधों की समीक्षा और यूनियन की प्रतिक्रिया
उत्पादन क्षमता और वास्तविक मांग के बीच असंतुलन को देखते हुए कंपनी एमडन, जुइको, हनोवर और नेकार्सुलम में स्थित अपने कारखानों के भविष्य पर भी विचार कर रही है। इन प्लांट्स की उपयोगिता को लेकर वैकल्पिक संभावनाओं का आकलन किया जा रहा है। यह पूरा पुनर्गठन अभियान फॉक्सवैगन के लगभग नौ दशकों के लंबे इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है। साल 2025 के आंकड़ों के अनुसार, यह वाहन निर्माता दुनिया भर में 660,000 से अधिक लोगों को रोजगार दे रहा था और इसके पोर्टफोलियो में सीट, बेंटले तथा लेम्बोर्गिनी जैसे ब्रांड भी शामिल हैं।
यूरोप के सबसे बड़े औद्योगिक यूनियन आईजी मेटाल की अध्यक्ष और फॉक्सवैगन पर्यवेक्षक बोर्ड की उप-अध्यक्ष क्रिस्टियाने बेनर ने कहा कि मौजूदा संकट की स्थिति से पार पाने के लिए कंपनी ने बेहतर समाधान तलाशने के वास्ते काफी कड़ा संघर्ष किया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में घटती मांग और बाहरी चुनौतियां
फॉक्सवैगन का मुनाफा बीते कुछ वर्षों में तेजी से नीचे आया है, जिसकी मुख्य वजह चीन के बाजारों में बिक्री का कमजोर होना है, जो कभी इस कंपनी के लिए सबसे बड़े और लाभकारी बाजारों में से एक हुआ करता था। इसके अलावा संयुक्त राज्य अमेरिका में भी वाहन बिक्री में गिरावट दर्ज की गई है, जिसके पीछे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा कार आयात पर लगाए गए शुल्कों का प्रत्यक्ष प्रभाव भी एक बड़ा कारण रहा है।
दूसरी तरफ, चीनी वाहन निर्माता कम उत्पादन लागत का फायदा उठाते हुए और अत्याधुनिक तकनीकों को तेजी से बाजार में उतारते हुए बेहद आक्रामक तरीके से अपना विस्तार कर रहे हैं। हाल के वर्षों में बीवाईडी जैसी कंपनियों ने ब्रिटेन, यूरोपीय संघ और दक्षिण पूर्व एशिया जैसे प्रमुख बाजारों में अपनी बिक्री को उल्लेखनीय रूप से ऊपर उठाया है।



















