जर्मनी के संघीय अभियोजक कार्यालय ने देश की विदेशी खुफिया एजेंसी के पूर्व प्रमुख ऑगस्ट हैनिंग को विदेशी शक्तियों के लिए जासूसी, गोपनीय दस्तावेज हासिल करने और देशद्रोह के गंभीर संदेह में हिरासत में लिया है। पुलिस अधिकारियों ने हैनिंग को मंगलवार के दिन मुंस्टर के पास स्थित नॉर्डवाल्डे में उनके निजी आवास से गिरफ्तार किया। जांचकर्ताओं का आरोप है कि पद छोड़ने के बाद एक निजी सलाहकार के रूप में काम कर रहे हैनिंग ने अत्यधिक गोपनीय खुफिया सामग्री का उपयोग करके एक विदेशी खुफिया सेवा के अधिकारी के लिए विशेष विश्लेषण रिपोर्ट तैयार की थी। इसके साथ ही उन पर एक अन्य विदेशी जासूसी सेवा के प्रतिनिधि के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने का भी आरोप लगाया गया है।
गोपनीय दस्तावेजों की तस्करी और मैनफ्रेड डी की गिरफ्तारी
इस बड़े सुरक्षा मामले में पुलिस ने फेडरल इंटेलिजेंस सर्विस यानी बीएनडी के पूर्व कर्मचारी मैनफ्रेड डी को भी गिरफ्तार किया है। मैनफ्रेड डी को बवेरिया से हिरासत में लिया गया। अभियोजकों के अनुसार मैनफ्रेड डी पूर्व में हैनिंग के ब्यूरो प्रमुख रह चुके हैं और इस साल तक खुफिया एजेंसी के भीतर कार्यरत थे। इसके अलावा उन्होंने साल 2012 से 2026 के बीच हैनिंग के उत्तराधिकारियों के चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली थीं। जांच एजेंसी का आरोप है कि मैनफ्रेड डी ने अपने इस संवेदनशील पद का फायदा उठाकर एजेंसी की अत्यधिक गोपनीय सूचनाओं तक सीधी पहुंच बनाई और फिर पैसे के बदले वे दस्तावेज हैनिंग तक पहुंचाए।
संघीय अभियोजकों के आधिकारिक बयान के मुताबिक अब तक सामने आए निष्कर्ष दर्शाते हैं कि कई वर्षों की अवधि के दौरान मैनफ्रेड डी ने हैनिंग को लगभग 2,000 दस्तावेज मुहैया कराए। इनमें से अधिकांश दस्तावेज बेहद गोपनीय प्रकृति के थे और उनका उपयोग केवल फेडरल इंटेलिजेंस सर्विस के आंतरिक उद्देश्यों के लिए ही किया जाना तय था। मैनफ्रेड डी पर इस पूरे मामले में देशद्रोह के प्रयास और देशद्रोही जासूसी में सहायता करने तथा उसे बढ़ावा देने के गंभीर आरोप तय किए गए हैं। जहां मैनफ्रेड डी को मंगलवार को ही अदालत में पेश किया गया, वहीं हैनिंग की अदालत में पेशी बुधवार को तय की गई है।
विदेशी खुफिया एजेंसियों को सूचनाएं लीक करने के आरोप
जांच अधिकारियों ने अभी तक उन विदेशी शक्तियों अथवा देशों के नामों का खुलासा नहीं किया है जिनके लिए यह खुफिया जानकारी जुटाई जा रही थी। अभियोजकों का कहना है कि एक मौके पर हैनिंग ने गोपनीय खुफिया जानकारी का इस्तेमाल किसी विदेशी खुफिया सेवा के अधिकारी के लिए एक विशेष विश्लेषण तैयार करने में किया था। हालांकि जांचकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल यह पूरी तरह तय नहीं हो पाया है कि वह सामग्री वास्तव में संबंधित प्राप्तकर्ता तक पहुंच पाई थी या नहीं।
इसके अतिरिक्त ऑगस्ट हैनिंग पर कई वर्षों तक एक अन्य विदेशी खुफिया सेवा के प्रतिनिधि के बेहद करीबी संपर्क में रहने का भी आरोप है। जांच एजेंसियों के अनुसार हैनिंग ने उस प्रतिनिधि को नियमित रूप से राजनीतिक जानकारियां साझा कीं। यह राजनीतिक सूचनाएं आंशिक रूप से उन्हीं गोपनीय दस्तावेजों पर आधारित थीं जो मैनफ्रेड डी ने अवैध रूप से एजेंसी से चुराकर हैनिंग को सौंपे थे। ऑगस्ट हैनिंग ने 1998 से 2005 तक बीएनडी का नेतृत्व किया था और उसके बाद से वे एक स्वतंत्र सलाहकार के रूप में निजी क्षेत्र में काम कर रहे थे।
अपहरण विवाद और डाटा स्टोरेज डिवाइस से हुआ खुलासा
हैनिंग के पास खुफिया दस्तावेजों की अवैध मौजूदगी का यह पूरा मामला एक बिल्कुल अलग आपराधिक मामले की जांच के दौरान सामने आया। यह मामला जर्मन स्टेकहाउस की वारिस क्रिस्टीना ब्लॉक से जुड़ा हुआ है। हैम्बर्ग लोक अभियोजक कार्यालय ने क्रिस्टीना ब्लॉक पर बच्चों की कस्टडी को लेकर चल रहे विवाद के कारण 2023 में अपने दो सबसे छोटे बच्चों के अपहरण की साजिश रचने का औपचारिक आरोप लगाया था।
उसी मामले में जांचकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि ऑगस्ट हैनिंग उन बच्चों के अपहरण के एक पहले के असफल प्रयास में शामिल थे, हालांकि हैनिंग ने इस आरोप का पूरी तरह खंडन किया है। उस जांच के सिलसिले में जब राज्य आपराधिक पुलिस के अधिकारियों ने तलाशी ली, तो उन्हें एक इलेक्ट्रॉनिक डाटा स्टोरेज डिवाइस हाथ लगा। इस डिवाइस की फोरेंसिक जांच में संवेदनशील खुफिया जानकारी पाई गई, जिसमें बीएनडी के हालिया गोपनीय दस्तावेज भी शामिल थे। इसी बरामदगी ने अधिकारियों को देश की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस जासूसी नेटवर्क की तह तक पहुंचाया।
जर्मन खुफिया सेवा के भीतर बढ़ता जासूसी का संकट
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब जर्मन खुफिया तंत्र पहले से ही अपने भीतर संवेदनशील सूचनाएं लीक होने के मामलों से जूझ रहा है। इससे पहले भी बीएनडी के पूर्व अधिकारी कार्स्टन एल का मामला सामने आ चुका है, जिन पर यूक्रेन में चल रहे युद्ध और वैगनर भाड़े के सैनिक समूह से जुड़ी अत्यधिक गोपनीय खुफिया जानकारियां साझा करने का गंभीर आरोप लगाया गया था। अभियोजकों के अनुसार कार्स्टन एल ने इस जासूसी के बदले लगभग €400,000 प्राप्त किए थे, जो करीब $450,000 या £340,000 के बराबर रकम है। कार्स्टन एल का मुकदमा अदालत में अभी भी जारी है, और अब पूर्व प्रमुख की गिरफ्तारी ने खुफिया विभाग की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।



















