यूक्रेन में जारी युद्ध के पांचवें वर्ष में प्रवेश करने के बीच राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की एक बार फिर यूरोपीय देशों से मजबूत समर्थन जुटाने की कूटनीतिक यात्रा पर हैं। अमेरिकी नीतियों में बदलाव और आगामी सर्दियों की गंभीर चुनौतियों के बीच ज़ेलेंस्की लंदन पहुंचे, जहां उन्होंने ब्रिटिश प्रधानमंत्री बर्नहैम के साथ अहम द्विपक्षीय बातचीत की। लंदन के बाद यूक्रेनी नेता का अगला पड़ाव ब्रुसेल्स तय किया गया है, जिसका मकसद यूरोपीय सहयोगियों को एकजुट रखना और सैन्य आपूर्ति में निरंतरता बनाए रखना है। दोनों नेता इससे पहले पिछले महीने न्यूयॉर्क शहर में भी मुलाकात कर चुके हैं।
डाउनिंग स्ट्रीट में औपचारिक स्वागत और सैन्य सहायता का नया संकल्प
लंदन स्थित डाउनिंग स्ट्रीट में यूक्रेनी राष्ट्रपति का स्वागत सैन्य गार्ड ऑफ ऑनर के साथ किया गया। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच बैठक की औपचारिक शुरुआत को दिखाते हुए एक सीमित फोटो सेशन रखा गया। पूर्ववर्ती दौरों की तरह इस बार भी दोनों नेताओं की कोई पूर्ण अथवा खुली संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित नहीं की गई, जिसमें पत्रकारों को विस्तृत और तीखे सवाल पूछने की अनुमति मिल सके। इसके बजाय डाउनिंग स्ट्रीट ने रात में ही एक समयबद्ध प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी थी, जिसमें ज़ेलेंस्की के प्रति ब्रिटेन के निरंतर और अडिग सहयोग की बात कही गई थी।
ब्रिटिश सरकार ने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि वह यूक्रेन को वित्तीय और सैन्य मदद पहुंचाने की प्रक्रिया को और तेज करने के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री बर्नहैम ने विशेष रूप से हल्के बहुउद्देशीय मिसाइलों की खेप तेजी से यूक्रेन भेजने की प्रतिबद्धता जताई। ये विशेष मिसाइलें तेज गति वाले जेट-संचालित रूसी ड्रोनों को मार गिराने में यूक्रेनी हवाई रक्षा तंत्र को काफी मजबूती प्रदान करेंगी, जो इस समय नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए बेहद आवश्यक हैं।
हाउस ऑफ कॉमन्स में तीखी बहस और अमेरिकी प्रतिबंधों का मुद्दा
संसद के निचले सदन हाउस ऑफ कॉमन्स में अपने साप्ताहिक प्रश्नकाल की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री बर्नहैम ने ज़ेलेंस्की के प्रति अपने अटूट समर्थन को दोहराया। उन्होंने सांसदों के सामने वादा किया कि आने वाले दिनों में ब्रिटेन यूक्रेन को और अधिक रक्षात्मक तथा वित्तीय साधन उपलब्ध कराएगा। हालांकि, इस दौरान ब्रिटिश संसद के भीतर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गहरे मतभेद भी खुलकर सामने आ गए।
लिबरल डेमोक्रेट नेता सर एड डेवी ने संसद में कड़े सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री पर अमेरिकी रुख को लेकर चुप्पी साधने का आरोप लगाया। सर एड डेवी ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को खत्म करने के फैसले पर ब्रिटिश प्रधानमंत्री जानबूझकर टिप्पणी करने से बच रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि हाउस ऑफ कॉमन्स, राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की और बहादुर यूक्रेनी सहयोगियों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि इस पूरे मामले पर ब्रिटेन का स्पष्ट रुख क्या है। उन्होंने प्रधानमंत्री से सीधा सवाल किया कि क्या वे इसे यूक्रेनी जनता और समूची यूरोपीय सुरक्षा के साथ डोनाल्ड ट्रंप का एक और विश्वासघात नहीं मानते।
ट्रंप पर सीधी टिप्पणी से परहेज और सेतु निर्माण की भूमिका
संसद में पूछे गए तीखे सवालों का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री बर्नहैम ने स्वीकार किया कि यह राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की के लिए एक अत्यंत अंधकारमय और कठिन क्षण है, जिसमें वे सबसे भारी बोझ अपने कंधों पर उठाए हुए हैं। इसके बावजूद प्रधानमंत्री ने डोनाल्ड ट्रंप की किसी भी तरह की सार्वजनिक आलोचना करने से पूरी तरह परहेज किया। उन्होंने साफ शब्दों में संकेत दिया कि वे ट्रंप के खिलाफ व्यापक यूरोपीय निंदा के स्वर में शामिल नहीं होने जा रहे हैं।
बर्नहैम ने सांसदों को संबोधित करते हुए कहा कि उनके पद की जिम्मेदारी यह है कि वे कूटनीतिक सेतुओं की मरम्मत करने की कोशिश करें ताकि खोया हुआ समर्थन फिर से हासिल किया जा सके। उन्होंने कहा कि इस नाजुक समय में उन्हें बेहद सतर्कता बरतनी होगी ताकि सभी पक्षों को दोबारा बातचीत की मेज पर एक साथ लाया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समय वे यही भूमिका निभाना चाहते हैं और यही उनके लिए सबसे सही रास्ता है। प्रधानमंत्री ने दोहराया कि वे राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की की बातों को बहुत ध्यान से सुनेंगे और यूक्रेनी राष्ट्रपति आज ब्रिटेन से खाली हाथ वापस नहीं लौटेंगे।
कूटनीतिक संतुलन और यूक्रेन के लिए सर्दियों की कड़ी चुनौती
इस पूरे कूटनीतिक घटनाक्रम में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जोनाथन पॉवेल की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है, जिन्होंने वाशिंगटन और कीव के बीच लगातार यात्राएं कर तनाव को कम करने और कड़वाहट को दूर करने का प्रयास किया है। ऐसा प्रतीत होता है कि प्रधानमंत्री बर्नहैम भी ब्रिटेन के लिए इसी प्रकार की मध्यस्थ और सेतु-निर्माता भूमिका बनाए रखना चाहते हैं, जहां अमेरिका और यूक्रेन के बीच संतुलन बिगड़ने न पाए।
यह कूटनीतिक कसरत ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई महीनों तक इस संघर्ष में अपेक्षाकृत अनुकूल भूमिका में दिखाई दे रहे थे, जिसमें उन्होंने यूक्रेन को उन्नत अमेरिकी वायु रक्षा तकनीक तक अधिक पहुंच देने का वादा किया था और रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी थी। लेकिन हालिया नीतिगत बदलावों के बाद लाखों आम यूक्रेनी नागरिकों के सामने एक बेहद कठिन और कठोर सर्दी खड़ी है। अमेरिकी समर्थन में संभावित कमी के बीच यूरोपीय देशों से तुरंत मदद हासिल करना कीव के लिए अस्तित्व से जुड़ा सबसे जरूरी काम बन चुका है।


















