आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में 12 अक्टूबर 2026 का दिन आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी माना जा रहा है। इस पावन तिथि पर शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन होने के साथ-साथ सोमवार का व्रत भी पड़ रहा है। पंचांग की गणना बताती है कि आज के दिन आश्विन शुक्ल द्वितीया तिथि रहेगी, जो रात 10:13 बजे तक प्रभावी रहेगी और उसके बाद तृतीया तिथि आरंभ हो जाएगी। नक्षत्रों की स्थिति पर दृष्टि डालें तो स्वाति नक्षत्र रात 11:52 बजे तक बना रहेगा, जिसके उपरांत विशाखा नक्षत्र का आगमन होगा। करण के स्तर पर बालव करण सुबह 09:48 बजे तक रहेगा, जिसके बाद कौलव करण रात 10:13 बजे तक प्रभावी रहेगा। इसके अतिरिक्त विष्कंभ योग रात 08:32 बजे तक विद्यमान रहेगा, जिसके उपरांत प्रीति योग का संचरण होगा। दिशाशूल की बात करें तो आज पूर्व दिशा का दिशाशूल है, वहीं चंद्रमा संपूर्ण दिन तुला राशि में गोचर करेंगे जबकि सूर्य देव कन्या राशि में विराजमान रहेंगे।
मां ब्रह्मचारिणी और देवाधिदेव महादेव की संयुक्त उपासना का महत्व
सोमवार का दिन भगवान शिव और चंद्रदेव की पूजा के लिए समर्पित माना जाता है, जबकि नवरात्रि का दूसरा दिन मां दुर्गा के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की आराधना का विधान लेकर आता है। इस दुर्लभ संयोग के चलते साधकों को शक्ति स्वरूपा देवी और देवाधिदेव महादेव दोनों की कृपा प्राप्त करने का उत्तम अवसर मिलता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए हजारों वर्षों तक कठिन तपस्या की थी। कठोर तप और साधना में लीन रहने के कारण ही उनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा। मां ब्रह्मचारिणी की भक्तिभाव से उपासना करने से साधक के जीवन में धैर्य, तपस्या और असीम आत्मबल का संचार होता है। वहीं दूसरी ओर भगवान भोलेनाथ की पूजा से मन की अशांति दूर होती है और परिवार में सुख, शांति तथा समृद्धि का वास होता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस पावन दिन पर शिवजी और माता ब्रह्मचारिणी की विधिवत अर्चना करने से जन्मकुंडली में स्थित चंद्रमा और मंगल ग्रह की स्थिति को विशेष मजबूती मिलती है।
सोमवार और नवरात्रि द्वितीय दिवस की प्रामाणिक पूजा विधि
इस पावन तिथि पर साधना करने के लिए प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के समय स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। सबसे पहले पूजा स्थल पर भगवान शिव का स्मरण करें। शिवलिंग पर शुद्ध जल अर्पित करें और इसके पश्चात पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार बेलपत्र, श्वेत पुष्प और ताजे फल चढ़ाएं। धूप और दीप प्रज्वलित करके पूर्ण एकाग्रता के साथ 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करें तथा अंत में शिवजी की आरती उतारें। पूजा के समय मन में संयम, पवित्रता और अटूट आस्था का भाव बनाए रखना आवश्यक है।
इसके उपरांत नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के नवदुर्गा स्वरूपों का ध्यान करते हुए मां ब्रह्मचारिणी की चौकी की ओर मुख करें। माता को पुष्प, अक्षत, चंदन और रोली अर्पित करें। नैवेद्य के रूप में माता को शक्कर, मिश्री, पंचामृत और ताजे फलों का भोग लगाएं। आराधना के समय 'ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः' मंत्र का निरंतर जप करें। पूजा के समापन पर माता की आरती करें तथा अपने जीवन में संयम, सफलता और मानसिक शांति की प्रार्थना करें। साथ ही चंद्र ग्रह के अनुकूल प्रभाव के लिए सोमवार के दिन ध्यान साधना करना और जरूरतमंदों को श्वेत वस्तुओं का दान करना अत्यंत कल्याणकारी माना गया है।
शुभ योग और दिन के महत्वपूर्ण मुहूर्त
पंचांग के अनुसार 12 अक्टूबर 2026 को दैनिक पूजा और मांगलिक कार्यों के संपादन के लिए कई महत्वपूर्ण शुभ समय उपलब्ध रहेंगे
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:41 बजे से सुबह 05:31 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:45 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:04 बजे से दोपहर 02:50 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 05:56 बजे से शाम 06:21 बजे तक
- अमृत काल: दोपहर 02:35 बजे से शाम 04:16 बजे तक
- निशिता मुहूर्त: रात 11:44 बजे से 13 अक्टूबर की मध्यरात्रि 12:33 बजे तक
- शिववास स्थिति: रात 10:13 बजे तक गौरी के साथ, इसके उपरांत सभा में उपस्थिति
अशुभ काल और वर्जित समय सारणी
किसी भी नए अथवा विशेष कार्य के प्रारंभ से पूर्व दिन के अशुभ समय का विचार करना आवश्यक माना जाता है। इस दिन के मुख्य अशुभ काल इस प्रकार रहेंगे
- राहुकाल: सुबह 07:47 बजे से सुबह 09:14 बजे तक
- यमगण्ड: सुबह 10:41 बजे से दोपहर 12:08 बजे तक
- गुलिक काल: दोपहर 01:35 बजे से दोपहर 03:02 बजे तक
- दुर्मुहूर्त: दोपहर 12:31 बजे से दोपहर 01:18 बजे तक
- आडल योग: सुबह 06:21 बजे से रात 11:52 बजे तक
- विडाल योग: रात 11:52 बजे से 13 अक्टूबर की सुबह 06:21 बजे तक

















