अमेरिकी ऊर्जा बाजार में एक बड़े नीतिगत बदलाव के तहत डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से डीजल आयात करने के एक नए समझौते की घोषणा की है, जिसने वाशिंगटन और कीव के बीच कूटनीतिक तनाव को काफी बढ़ा दिया है। इस कदम का सीधा विरोध करते हुए यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने कहा कि यह समझौता रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए एक बड़े तोहफे जैसा है और इसका सीधा असर युद्ध को लंबा खींचने में होगा। ज़ेलेंस्की के इस रुख को यूरोपीय सहयोगियों का भी तुरंत समर्थन मिला है, क्योंकि पश्चिमी देश लंबे समय से मॉस्को पर कड़े प्रतिबंध लगाने की नीति पर काम कर रहे थे।
डीजल आपूर्ति का तय ढांचा और चरणों की योजना
घोषित समझौते के विवरण के अनुसार, व्लादिमीर पुतिन तुरंत 300,000 टन डीजल अमेरिकी और वैश्विक बाजार के लिए जारी करने पर सहमत हुए हैं। इसके बाद आपूर्ति का दूसरा चरण नवंबर में शुरू होगा, जिसमें 500,000 टन डीजल भेजा जाएगा, जबकि इसके बाद के चरण में 10 लाख टन अतिरिक्त डीजल भेजने का प्रावधान किया गया है। आपूर्ति की इस श्रृंखला को सुविधाजनक बनाने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने रूसी डीजल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों को 7 अप्रैल तक के लिए निलंबित कर दिया है। हालांकि, अमेरिकी बैंकों में जमा अन्य रूसी संपत्तियों को इस छूट से बाहर रखा गया है और वे अभी भी पूरी तरह से फ्रीज हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक संदेश साझा करते हुए यह भी दावा किया कि आने वाले संक्षिप्त समय के भीतर 30 लाख टन अतिरिक्त रूसी डीजल की खेप भी बाजार में पहुंचाई जा सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अतिरिक्त आपूर्ति रूसी रिफाइनरियों की कार्यक्षमता और स्थिति पर निर्भर करेगी। गौरतलब है कि यूक्रेन द्वारा हाल के महीनों में किए गए हमलों के कारण कई रूसी तेल रिफाइनरियों को काफी नुकसान पहुंचा है। इसके बाद व्लादिमीर पुतिन ने भी एक बयान जारी कर कहा कि उनका देश अमेरिका और वैश्विक बाजार में तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति के लिए तैयार है, हालांकि उन्होंने अपने इस वक्तव्य में किसी निश्चित मात्रा का उल्लेख नहीं किया।
ज़ेलेंस्की की चेतावनी और यूरोपीय देशों की प्रतिक्रिया
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने इस सौदे की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि रूस इस डीजल आपूर्ति के बदले दुनिया को और अधिक आतंक लौटाएगा। उन्होंने लिखा कि यूक्रेन अपने नागरिकों की रक्षा और जीवन की सुरक्षा के लिए अमेरिका के निष्पक्ष समर्थन पर भरोसा करता है, और वाशिंगटन को मॉस्को के साथ एक मजबूत और स्पष्ट बातचीत करनी चाहिए, न कि किसी कमजोर समझौते की तरफ बढ़ना चाहिए।
इस समझौते ने डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ यूरोपीय देशों और अमेरिका के भीतर यूक्रेन समर्थक सांसदों की नाराजगी को भी भड़का दिया है। आलोचकों का मानना है कि इस कदम से रूस की युद्ध मशीनरी को सीधा वित्तीय पोषण मिलेगा। यूरोपीय संघ की विदेश मामलों की प्रमुख काजा कल्लास ने प्रतिबंधों को निलंबित किए जाने पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि पाबंदियों में यह ढील मॉस्को को युद्ध छेड़ने के लिए और अधिक राजस्व उपलब्ध कराती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समय रूस पर दबाव कम करने का बिल्कुल नहीं है और यूरोप अपने रुख से पीछे नहीं हटेगा। कल्लास ने यह भी बताया कि यूरोपीय विदेश मंत्री सोमवार को रूस के पूर्ण पैमाने पर किए गए आक्रमण के बाद से अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध पैकेज को मंजूरी देने की तैयारी कर रहे हैं।
वहीं दूसरी तरफ ब्रिटेन सरकार के एक प्रवक्ता ने अपनी स्थिति दोहराते हुए कहा कि उनका रुख पूरी तरह साफ है और वे यूक्रेन का समर्थन करने तथा स्थायी शांति स्थापित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर काम करते रहेंगे। प्रवक्ता ने जोर दिया कि ब्रिटेन अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध तंत्र के जरिए रूस पर अपना दबाव बनाए रखेगा, ताकि पुतिन की आक्रामकता की भारी कीमत वसूली जा सके और एक न्यायपूर्ण व स्थायी शांति हासिल की जा सके।
घरेलू राजनीति, महंगाई और आगामी मध्यावधि चुनाव
डोनाल्ड ट्रंप की ओर से यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब अमेरिका में मध्यावधि चुनाव सिर पर हैं और रिपब्लिकन पार्टी कांग्रेस पर अपना नियंत्रण बरकरार रखने के लिए संघर्ष कर रही है। पिछले कुछ महीनों से ट्रंप प्रशासन ईरान युद्ध के राजनीतिक और आर्थिक परिणामों से निपटने में जुटा हुआ है। फरवरी के महीने में शुरू हुए इस संघर्ष ने पेट्रोल और खास तौर पर डीजल की कीमतों को ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंचा दिया था, जिससे अमेरिकी जनता में व्यापक असंतोष पैदा हुआ और चौतरफा महंगाई ने ट्रंप की राजनीतिक स्थिति को कमजोर किया।
ट्रिपल ए के आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में अमेरिका में डीजल की औसत कीमत 6.28 डॉलर प्रति गैलन यानी 4.74 पाउंड चल रही है, जो सितंबर के अंत में दर्ज 6.53 डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर से कुछ ही नीचे है। ट्रंप की घोषणा के तुरंत बाद अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने औपचारिक रूप से एक अस्थायी लाइसेंस जारी कर दिया, जिसके जरिए रूसी डीजल को बाजार में प्रवेश की अनुमति दी गई है। इसके समानांतर व्लादिमीर पुतिन के दूत किरिल दिमित्रीव ने सोशल मीडिया पर इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि डीजल और ऊर्जा के क्षेत्र में रूस और अमेरिका का सहयोग पूरी दुनिया के लिए फायदेमंद साबित होगा।
ऊर्जा विशेषज्ञों का संदेह और आपूर्ति की सीमाएं
आर्थिक और ऊर्जा विश्लेषकों ने इस बात पर गंभीर सवाल उठाए हैं कि क्या रूस वास्तव में इतनी बड़ी मात्रा में डीजल उपलब्ध कराने की क्षमता रखता है और क्या इससे आम अमेरिकी उपभोक्ताओं को कोई ठोस राहत मिलेगी। क्विल्टर चेवियट के निवेश रणनीतिकार टिम आर्मिटेज ने विश्लेषण करते हुए कहा कि ट्रंप द्वारा बताई गई मात्रा असल में काफी छोटी है। उन्होंने रेखांकित किया कि पहली खेप लगभग 22.5 लाख बैरल के बराबर बैठती है, जबकि अमेरिका की दैनिक खपत ही लगभग 38 लाख बैरल है। इस वजह से अमेरिकी पंपों पर डीजल की कीमतों में कोई बड़ा या सार्थक बदलाव देखने को नहीं मिलेगा।
टिम आर्मिटेज ने आगे कहा कि भले ही इसके बाद दो और चरण आने बाकी हैं, लेकिन मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले मुद्रास्फीति को काबू में करने के लिए उठाया गया यह कदम राष्ट्रपति ट्रंप का एक हताश प्रयास अधिक दिखाई देता है। इधर कच्चे तेल के वैश्विक मानक ब्रेंट की कीमत अभी भी 103 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर टिकी हुई है, जबकि ईरान युद्ध शुरू होने से पहले यह लगभग 73 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था। ऐसे में यह सवाल भी बना हुआ है कि इस सौदे के बदले में रूस को अमेरिका से क्या हासिल होगा।
रिफाइनरियों पर यूक्रेनी ड्रोन हमले और ट्रंप के अन्य प्रयास
इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में रूसी तेल उद्योग की आंतरिक चुनौतियां भी जुड़ी हैं। यूक्रेन द्वारा रूसी तेल रिफाइनरियों पर किए गए सिलसिलेवार ड्रोन हमलों के चलते रूस को इस साल देश भर में ईंधन की भारी किल्लत का सामना करना पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुमान के अनुसार, इन हमलों की वजह से रूस के डीजल उत्पादन में करीब 30 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई थी। इसी कमी से निपटने के लिए रूस ने इस साल की शुरुआत में डीजल निर्यात पर प्रतिबंध भी लगाया था। डोनाल्ड ट्रंप पूर्व में इन यूक्रेनी हमलों पर अपनी नाराजगी जता चुके हैं और ईंधन की बढ़ती कीमतों के लिए इन्हें जिम्मेदार ठहराते रहे हैं।
हालांकि, वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने इन हमलों का बचाव करते हुए कहा कि यह यूक्रेन के ऊर्जा क्षेत्र के खिलाफ रूस के वर्षों लंबे आतंक का सीधा जवाब है। ज़ेलेंस्की ने दो टूक कहा कि यदि रूस यूक्रेन के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को नष्ट नहीं करेगा, तो यूक्रेन भी रूसी तेल रिफाइनरियों को निशाना नहीं बनाएगा। इसके अलावा अमेरिकी कांग्रेस ने हाल ही में एक कानून पारित किया था, जिस पर खुद राष्ट्रपति ने हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत रूसी तेल और गैस का आयात करने वाले देशों पर नए अमेरिकी प्रतिबंध और शुल्क लगाने का अधिकार दिया गया था। ऐसे में इस ताजा समझौते को एक अप्रत्याशित यू-टर्न के तौर पर देखा जा रहा है।
ईंधन की कीमतों को कम करने और अपनी पार्टी को राजनीतिक नुकसान से बचाने के लिए ट्रंप कई अन्य विकल्प भी तलाश रहे हैं। सप्ताह की शुरुआत में उन्होंने गैसोलीन पर लगने वाले संघीय कर को निलंबित करने पर विचार करने की बात कही थी। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिकी राजमार्गों पर उपयोग होने वाले तथाकथित रेड डाई डीजल को बिना संघीय कर के उपयोग करने की अनुमति देने का भी ऐलान किया। इसके पूर्व उन्होंने जी7 देशों पर अपने रणनीतिक भंडारों से 10 करोड़ बैरल तेल और डीजल जारी करने का दबाव बनाया था और अमेरिका से डीजल निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की मांगों का भी समर्थन किया था।



















