इंसान के शरीर की शारीरिक बनावट और रंग-रूप में काफी विविधता देखने को मिलती है, जिसमें बालों का रंग भी शामिल है। अगर गौर किया जाए तो ज्यादातर लोगों के बाल काले ही नजर आते हैं। क्या यह केवल एक सामान्य इत्तेफाक है या इसके पीछे कोई गहरी जैविक प्रक्रिया काम करती है? असल में हमारे बाल, आंख, त्वचा और होंठों का रंग खास पिगमेंट के आधार पर तय होता है। शरीर के भीतर काम करने वाली कोशिकाएं एक तरह की छोटी फैक्टरियों की तरह होती हैं, जिनका मुख्य काम मेलेनिन पिगमेंट तैयार करना होता है। इसी पिगमेंट के कारण हमारे बालों को उनका विशिष्ट रंग मिलता है। जब शरीर में यूमेलानिन नामक मेलेनिन का स्तर काफी अधिक होता है, तो बालों का रंग काला हो जाता है।
मेलेनिन की भूमिका और जेनेटिक्स
दुनियाभर के आंकड़ों पर नजर डालें तो लगभग 70 से 85 प्रतिशत आबादी के बालों का रंग काला ही मिलता है। हालांकि यह मान लेना पूरी तरह सही नहीं होगा कि धरती पर हर इंसान के बाल एक जैसे ही काले होते हैं। अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों और मानव समूहों में बालों के रंगों में अनोखी भिन्नता पाई जाती है। किसी के बाल गहरे भूरे होते हैं तो किसी के हल्के भूरे रंग के। इस विविधता के पीछे आनुवंशिक कारण सबसे अहम भूमिका निभाते हैं। हमारे शरीर में कई तरह के जीन होते हैं जो बालों के रंग को नियंत्रित करते हैं। इनमें MC1R नामक जीन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, जो यह निर्धारित करता है कि पिगमेंट बनाने वाली कोशिकाएं किस प्रकार का मेलेनिन अधिक मात्रा में उत्पादित करेंगी।
यूमेलानिन और फियोमेलानिन का खेल
बालों के रंग के निर्धारण में मुख्य रूप से दो प्रकार के पिगमेंट सबसे ज्यादा असर डालते हैं, जिन्हें यूमेलानिन और फियोमेलानिन कहा जाता है। जब बालों में यूमेलानिन की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, तब वे काले या फिर बहुत गहरे भूरे नजर आने लगते हैं। इसके विपरीत, यदि फियोमेलानिन की मात्रा बढ़ जाती है, तो बालों का रंग लाल या सुनहरा यानी ब्लॉन्ड हो जाता है। यही कारण है कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोगों के बाल एक जैसे नहीं दिखते। हमारे जीन ही तय करते हैं कि शरीर में किस पिगमेंट का निर्माण ज्यादा होगा। उदाहरण के लिए, दुनिया के कई देशों और समुदायों में काले या गहरे भूरे बालों की प्रधानता है, जबकि यूरोपीय देशों के मूल निवासियों में भूरे, सुनहरे और हल्के रंगों के बाल अधिक संख्या में देखने को मिलते हैं। सदियों के दौरान आनुवंशिक बदलावों और विकास क्रम के चलते बालों के रंगों में यह विशाल विविधता कायम हुई है।
क्या रंग से तय होती है बालों की सेहत?
आम तौर पर लोगों के मन में यह सवाल जरूर आता है कि क्या काले बाल होना अधिक मजबूत या स्वस्थ होने का संकेत देता है? वैज्ञानिक रूप से इसका जवाब ना है। बालों का काला, भूरा या कोई अन्य प्राकृतिक रंग होना पूरी तरह से पिगमेंटेशन और जेनेटिक्स का नतीजा है। इसे सीधे तौर पर किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य, ताकत या बालों की मजबूती का पैमाना नहीं माना जा सकता है। हर प्राकृतिक रंग अपने आप में सामान्य है और इसका संबंध केवल शरीर की आनुवंशिक बनावट से होता है।



















