भारतीय रेलवे के बुनियादी ढांचे को अधिक मजबूत और आधुनिक बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में हुई केंद्रीय कैबिनेट की एक अहम बैठक के दौरान 8 प्रमुख मल्टीट्रैकिंग रेलवे प्रोजेक्ट्स को औपचारिक हरी झंडी दे दी गई है। इन तमाम योजनाओं पर कुल 20,804 करोड़ रुपये का भारी-भरकम खर्च आएगा। देश के 9 अलग-अलग राज्यों में फैले लगभग 1,196 किलोमीटर के इस अत्यधिक व्यस्त रेल नेटवर्क पर पटरियों का जाल और अधिक फैलाया जाएगा। इस व्यापक योजना के तहत कई चुनिंदा रेल खंडों पर तीसरी और चौथी लाइनें बिछाई जाएंगी, जबकि कुछ अन्य महत्वपूर्ण मार्गों पर दोहरीकरण का काम भी तेजी से पूरा किया जाएगा। सरकार के इस कदम से केवल यात्री गाड़ियों के समय पर चलने में ही मदद नहीं मिलेगी, बल्कि देश भर में नई ट्रेनें चलाने के रास्ते भी साफ होंगे। इसके अलावा कोयला, स्टील, सीमेंट और लौह अयस्क जैसी जरूरी औद्योगिक सामग्रियों की ढुलाई भी अब बेहद कम समय में पूरी हो सकेगी।
इस संपूर्ण योजना के दायरे में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के लिए कई बड़े लाभ शामिल हैं। कटनी से पेंड्रा रोड के बीच लगभग 201 किलोमीटर लंबी नई चौथी रेल लाइन बिछाने का प्रावधान किया गया है। इस महत्वपूर्ण निर्माण कार्य के पूरा हो जाने से कोरबा, गेवरा, दीपका और कुसमुंडा की खदानों से देश भर के विभिन्न थर्मल पावर प्लांटों तक कोयले की आपूर्ति पूरी तरह से निर्बाध और तेज गति से हो सकेगी। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के भीतर बिलासपुर यानी उस्लापुर से पेंड्रा रोड के बीच 87 किलोमीटर के एक अन्य खंड पर तीसरी लाइन बनाई जाएगी, जिससे सीमेंट, स्टील और कोयले के परिवहन में आ रही बाधाएं दूर होंगी। दूसरी तरफ, पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा को आपस में जोड़ने वाले खड़गपुर से झारसुगुड़ा के 367 किलोमीटर लंबे रेल मार्ग पर भी चौथी लाइन बिछाई जाएगी। इस व्यवस्था से हल्दिया और पारादीप बंदरगाहों तक खनिज पदार्थों का आवागमन बेहद सुगम हो जाएगा। इन तमाम हाई-डेंसिटी रेल रूटों पर तीसरी और चौथी लाइन के विस्तार से देश के सबसे प्रमुख हावड़ा-मुंबई रेल कॉरिडोर पर यात्रियों और मालगाड़ियों का दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इन तमाम परियोजनाओं के विस्तृत आंकड़े साझा करते हुए बताया कि पूरे देश में करीब 11 हजार किलोमीटर लंबे कुल 7 हाई-डेंसिटी कॉरिडोर मौजूद हैं, जिन पर भारतीय रेलवे का लगभग 40 प्रतिशत यातायात सीधे तौर पर निर्भर करता है। इनमें से करीब 2 हजार किलोमीटर के हिस्से पर चार लाइनों का काम पूरी तरह से पूरा हो चुका है, जबकि 5 हजार किलोमीटर के हिस्से पर या तो काम प्रगति पर है या उसे आधिकारिक स्वीकृति मिल चुकी है। शेष बचा हुआ 4 हजार किलोमीटर का हिस्सा फिलहाल मंजूरी की विभिन्न प्रक्रियाओं के अधीन है। कैबिनेट की तरफ से स्वीकृत किए गए इस पहले पैकेज के अंतर्गत पूर्वी और मध्य भारत के 3 प्रमुख हाई-डेंसिटी रूटों पर कुल 10,783 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी। इससे लगभग 656 किलोमीटर लंबे रेल मार्ग की परिवहन क्षमता का अभूतपूर्व विस्तार देखने को मिलेगा। इन सभी मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स के धरातल पर उतरने के बाद देश के लगभग 4,790 गांवों और 56 लाख से ज्यादा आबादी को बेहतर रेल संपर्क का सीधा लाभ मिलेगा। इसके अतिरिक्त भारतीय रेलवे की सालाना माल ढुलाई की कुल क्षमता में 2.7 करोड़ टन का एक अतिरिक्त और बड़ा इजाफा दर्ज किया जाएगा।





















