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15 अगस्त को हरियाली तीज पर बन रहा सिद्धि और शिव योग का दुर्लभ संयोग, पंडित कल्कि राम ने बताया विशेष महत्वत्योहार
7 अग॰ 2026, 10:24 am (45 दिन पहले)· 1

15 अगस्त को हरियाली तीज पर बन रहा सिद्धि और शिव योग का दुर्लभ संयोग, पंडित कल्कि राम ने बताया विशेष महत्व

हरियाली तीज 15 अगस्त 2026 शनिवार को मनाई जाएगी। इस दिन सिद्धि योग और शिव योग का शुभ संयोग बनने से पूजा-पाठ का फल कई गुना बढ़ जाएगा।

सनातन धर्म में श्रावण मास के दौरान मनाया जाने वाला हरियाली तीज का त्योहार अखंड सौभाग्य, सुहाग, अगाध श्रद्धा और प्रकृति के सौंदर्य का पावन प्रतीक माना जाता है। वर्ष 2026 में यह पवित्र पर्व 15 अगस्त, दिन शनिवार को पूरे देश में अपार उत्साह के साथ मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए कड़ा निर्जला व्रत रखती हैं। वे दिनभर जल की एक बूंद भी ग्रहण किए बिना पूर्ण श्रद्धा भाव से भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से उपासना करती हैं। दूसरी ओर, अविवाहित कन्याएं भी मनचाहा और योग्य जीवनसाथी पाने की अभिलाषा के साथ इस व्रत को रखती हैं। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से इस वर्ष की तिथि बेहद कल्याणकारी रहने वाली है, क्योंकि इस दिन कई दुर्लभ धार्मिक और ज्योतिषीय योग एक साथ बन रहे हैं।

सिद्धि और शिव योग का बन रहा अद्भुत संयोग

अयोध्या के प्रतिष्ठित ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम के अनुसार, वर्ष 2026 की हरियाली तीज धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी साबित होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बार भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित इस पावन पर्व पर सिद्धि योग के साथ-साथ शिव योग का अत्यंत शुभ निर्माण हो रहा है। इसके अलावा, शनिवार का दिन होने के कारण इस तिथि का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व कई गुना अधिक बढ़ गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब भी ऐसे दुर्लभ और शुभ संयोगों में व्रत रखा जाता है अथवा पूजा-अर्चना की जाती है, तो साधक को कई गुना अधिक पुण्यफल की प्राप्ति होती है। पंडित कल्कि राम ने बताया कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से इस दिन नियमपूर्वक व्रत रखकर भोलेनाथ और जगदंबा पार्वती की आराधना करेंगे, उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी।

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सुहागिनों और कुंवारी कन्याओं के लिए पूजा विधान

हरियाली तीज का व्रत स्त्रियों के जीवन में विशेष स्थान रखता है। ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम बताते हैं कि शादीशुदा महिलाएं इस पावन अवसर पर माता पार्वती और भगवान शिव का ध्यान करते हुए अपने वैवाहिक जीवन में मिठास, खुशहाली और परिवार की समृद्धि के लिए प्रार्थना करती हैं। महिलाएं इस दिन पूर्ण निष्ठा के साथ माता पार्वती को सुहाग की सामग्रियां अर्पित करती हैं। दूसरी तरफ, मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त करने की कामना रखने वाली कुंवारी कन्याएं इस दिन चारों पहर भगवान शिव का विशेष पूजन करती हैं। सनातन शास्त्र में यह दृढ़ विश्वास है कि यदि पूरी पवित्रता, सच्ची निष्ठा और तय नियमों के अनुसार यह व्रत संपन्न किया जाए, तो भगवान शिव और माता पार्वती प्रसन्न होकर भक्तों के सभी कष्ट दूर करते हैं तथा उनके मनोरथ सिद्ध करते हैं।

प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का पावन संदेश

धार्मिक अनुष्ठानों के अतिरिक्त हरियाली तीज का उत्सव प्रकृति के साथ मनुष्य के गहरे जुड़ाव को भी दर्शाते हैं। पंडित कल्कि राम का कहना है कि यह पर्व केवल एक धार्मिक कर्मकांड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वर्षा ऋतु की सुंदरता, सावन के महीने में चारों ओर फैली हरियाली और प्रकृति के नवजीवन का उत्सव है। हमारी सनातन परंपरा में अधिकतर त्यौहार पर्यावरण और प्रकृति के बदलते स्वरूपों से गहराई से जुड़े हुए हैं, जिनमें से हरियाली तीज एक अत्यंत मनमोहक उदाहरण है। यह त्यौहार हमें प्रकृति के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त करने, पर्यावरण का संरक्षण करने और एक अनुशासित आध्यात्मिक जीवन जीने का संदेश देता है। इसीलिए इस पावन दिन पर श्रद्धालुओं को भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने के साथ-साथ प्रकृति की रक्षा करने और पौधे लगाने का भी संकल्प अवश्य लेना चाहिए।

सवाल-जवाब

2026 में हरियाली तीज किस तारीख को है?
वर्ष 2026 में हरियाली तीज का पर्व 15 अगस्त, दिन शनिवार को मनाया जाएगा।
हरियाली तीज 2026 पर कौन से शुभ योग बन रहे हैं?
इस वर्ष हरियाली तीज पर सिद्धि योग, शिव योग और शनिवार का दुर्लभ धार्मिक संयोग बन रहा है।
हरियाली तीज का व्रत कौन और क्यों रखता है?
विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य के लिए तथा कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर पाने के लिए यह व्रत रखती हैं।
ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम ने इस पर्व के बारे में क्या बताया?
अयोध्या के ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम के अनुसार, इस दिन बने शुभ संयोगों में पूजा और व्रत करने से श्रद्धालुओं को कई गुना पुण्यफल मिलता है।
हरियाली तीज का पर्यावरण से क्या संबंध है?
यह त्यौहार सावन महीने की हरियाली और प्रकृति के नवजीवन का उत्सव है, जो हमें पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है।
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