राजस्थान के करौली शहर में मंगलवार का दिन पूरी तरह धार्मिक उल्लास के नाम रहा, जहां मौसम के बदले मिजाज और हल्की बारिश के बाद भी श्रद्धालुओं की आस्था अडिग नजर आई। शहर में विराट हिंदू सम्मेलन के सिलसिले में आयोजित विशाल कलश यात्रा में 500 से अधिक महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों में सिर पर मंगल कलश धारण कर हिस्सा लिया। आसमान से गिरती फुहारों के बीच ढोल-नगाड़ों की थाप और गूंजते भक्ति गीतों ने पूरे माहौल को भक्तिरस में डुबो दिया, जिससे पूरा कस्बा सनातन संस्कृति के रंगों में रंगा दिखाई दिया।
सीताराम मंदिर से शुरू होकर तीन दरवाजे तक पहुंचा कारवां
सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत से ठीक पहले निकाली गई इस कलश यात्रा का आगाज होली खिड़किया स्थित प्राचीन सीताराम मंदिर परिसर से हुआ। इसके बाद यात्रा शहर के प्रमुख व्यापारिक और रिहायशी मार्गों से गुजरी, जिसमें गणेश गेट और चटिकना जैसे मुख्य इलाके शामिल रहे। रास्ते भर में श्रद्धालुओं का भारी जमावड़ा देखने को मिला। यात्रा का समापन मेला गेट के नजदीक तीन दरवाजे पर हुआ। पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं का उत्साह देखकर शहरवासी भी सड़कों पर निकल आए और पूरे रास्ते इस अनुष्ठान का हिस्सा बने रहे।
फूल बरसाकर शहरवासियों ने बढ़ाया श्रद्धालुओं का हौसला
धार्मिक शोभायात्रा के मार्ग में स्थानीय नागरिकों और दुकानदारों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर कलशधारी महिलाओं का स्वागत और सत्कार किया। तेज बारिश की आशंका के बावजूद महिलाओं के कदम नहीं रुके, जिसे देखकर हर कोई उनकी श्रद्धा की प्रशंसा कर रहा था। उपस्थित जनसमूह ने जयकारों के साथ यात्रा में शामिल मातृशक्ति का उत्साहवर्धन किया। शहर के प्रमुख चौराहों पर लोग कतारबद्ध खड़े होकर इस दृश्य के साक्षी बने और पूरे मार्ग पर सौहार्दपूर्ण आध्यात्मिक माहौल बना रहा।
विराट हिंदू सम्मेलन में सांस्कृतिक चेतना और एकजुटता पर मंथन
कलश यात्रा के समापन स्थल पर विराट हिंदू सम्मेलन की मुख्य सभा आयोजित की गई। इस मंच से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े वक्ताओं और अन्य आमंत्रित विशिष्ट अतिथियों ने समाज को संबोधित किया। वक्ताओं ने अपनी बात रखते हुए सनातन संस्कृति, सदियों पुरानी परंपराओं और सामाजिक एकजुटता को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। मंच से कहा गया कि इस प्रकार के सामुदायिक समागमों से समाज में सांस्कृतिक चेतना का संचार होता है और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों व नैतिक मूल्यों से जुड़े रहने का मार्गदर्शन मिलता है।
संत रुद्रनाथ महाकाल का उद्बोधन और हनुमान चालीसा का पाठ
सम्मेलन में राष्ट्रीय अनहद महायोग पीठ के संस्थापक शिवयोगी संत श्री रुद्रनाथ महाकाल की गरिमामयी मौजूदगी रही। अपने उद्बोधन के दौरान उन्होंने सनातन संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और मानव जीवन में उसके दार्शनिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। सभा में उपस्थित महिलाओं ने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया और पारंपरिक फाल्गुनी होली गायन की प्रस्तुतियां दीं, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। पूरे कार्यक्रम को शांतिपूर्ण ढंग से पूरा कराने के उद्देश्य से स्थानीय पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे और संवेदनशील बिंदुओं पर अतिरिक्त जाप्ता तैनात किया था, जिससे यह आयोजन बिना किसी व्यवधान के सकुशल संपन्न हुआ।


















